Q11 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2024 · GS IV · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 3 min read

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वर्तमान समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निपटने के नैतिक आधारों की चर्चा कीजिए।

विषय: Probity in Governance. पाठ्यक्रम: Probity in Governance — concept of public service, philosophical basis of governance and probity. Right to Information, codes of ethics, codes of conduct, citizens' charter, work culture, quality of service delivery. Challenges of corruption. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2024 और Probity in Governance से।

Revision summary

भ्रष्टाचार लोक विश्वास की बिक्री है, पेंशन कटौती से मिलीभगत टेंडर तक। नैतिक आधार न्यासिता, संवैधानिक नैतिकता, कांटीय कर्तव्य, सबसे कमजोर के प्रति न्याय, सद्गुण और निष्काम भूमिका-धर्म हैं। उन्हें भीतरी साहस और संस्थाएँ चाहिए: आचरण नियम, पीसीए, आरटीआई, सामाजिक अंकेक्षण और साफ भुगतान नल। उदाहरण: विलंबित विधवा पेंशन गरिमा असफलता है, स्थानीय प्रथा नहीं। प्रवचन गिरते हैं यदि व्हिसल ब्लोअर दंडित हों और सम्यक प्रक्रिया की जगह भीड़ ले।

Model answer

Introduction

भ्रष्टाचार लोक विश्वास की बिक्री है। चुनौती केवल गायब रुपया नहीं; वह नागरिक है जो सीखता है कि मेज दुकान है। नैतिक आधार वे भीतरी और सार्वजनिक कारण हैं जो उस दुकान को अवैध ठहराते हैं, जब विधि धीमी हो तब भी।

Body

वर्तमान चुनौती

  • आज का भ्रष्टाचार काउंटर पर तुच्छ विलंब, मिलीभगत टेंडर, राजनीतिक चंदा अपारदर्शिता, और डिजिटल रिसाव है जो डैशबोर्ड पर साफ दिखता है।
  • वह संस्कृति भी है: “प्रथा” के रूप में उपहार, ईमानदारी की सजा के रूप में स्थानांतरण, और युवा अधिकारी जिसे कहा जाए कि तेल बिना पत्रावली नहीं चलेगी।
  • उदाहरण: कटौती तक बैठी विधवा पेंशन छोटी स्थानीय आदत नहीं; अनुच्छेद 21 की गरिमा का दैनिक इनकार है।

नैतिक आधार

  • लोक पद न्यासिता: मुहर और बजट जनता के हैं, जैसा कौटिल्य का कोष चिंता और गांधी की न्यासिता भिन्न भाषाओं में कहती हैं।
  • संवैधानिक नैतिकता: अनुच्छेद 14 और 21 समता और आजीविका बेचने से रोकते हैं; अंबेडकर की चेतावनी थी कि नैतिकता बिना रूप मुखौटा बन जाते हैं।
  • कांटीय कर्तव्य: अधिकारी नागरिक को निजी थैली का साधन न बनाए; रिश्वत उस नियम की परीक्षा हारती है जो सार्वभौम हो सके।
  • सबसे कमजोर के प्रति न्याय: रॉल्स का अंतर सिद्धांत प्रशासनिक रूप में कहता है कि राशन या छात्रवृत्ति का रिसाव उसे मारता है जो शॉर्टकट नहीं खरीद सकता।
  • सद्गुण: सत्यनिष्ठा, साहस और संयम चरित्र की आदतें हैं; उनके बिना संहिता पोस्टर है।
  • भूमिका का धर्म: निष्काम कार्य का अर्थ है अधिकारी फल का दाम लगाए बिना सही पत्रावली करे; सकाम कार्य उसी पत्रावली को निजी फसल बनाता है।
  • लोकतांत्रिक पारस्परिकता: करदाता और मतदाता प्रधान हैं; कटौती छिपाने वाला रहस्य वह समझौता तोड़ता है।

ये आधार चुनौती से कैसे मिलते हैं

  • भीतरी नियंत्रण: अंतःकरण और उस वरिष्ठ का उदाहरण जो त्योहार लिफाफा मना करे, जैसा टी. एन. शेषन की सार्वजनिक तटस्थता ने दिखाया कि एक पद मानदंड रीसेट कर सकता है।
  • संस्थागत नीति: आचरण नियम, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, लोकपाल, सीवीसी, आरटीआई, सामाजिक अंकेक्षण और ई-खरीद प्रवचन को दंड दे सकने वाली पत्रावली बनाते हैं।
  • सामाजिक नीति: वह जनता जो रिश्वत को शुल्क मानना बंद करे, और वह मीडिया जो केवल बलि का लिपिक नहीं, प्रणाली नाम दे।
  • उदाहरण: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और भू-टैग परिसंपत्ति व्यक्ति को ईमानदार नहीं बनाते, किंतु बिचौलिए का नैतिक अवसर घटाते हैं।

सीमाएँ

  • नैतिक आधार गिरते हैं यदि व्हिसल ब्लोअर स्थानांतरित हों और बड़ी मछली कभी आरोपित न हो।
  • सम्यक प्रक्रिया बिना नैतिक आक्रोश भीड़ बन सकता है, जो न्याय का दूसरा भ्रष्टाचार है।

Flow diagram

flowchart TD
  T[न्यासिता] --> M[नैतिक आधार]
  C[संवैधानिक नैतिकता] --> M
  M --> I[भीतरी साहस]
  M --> L[विधि अंकेक्षण आरटीआई]
  I --> H[ईमानदार मेज]
  L --> H

Conclusion

भ्रष्टाचार विश्वास की चोरी है। नैतिक आधार न्यासिता, संवैधानिक नैतिकता, कर्तव्य, कमजोर के प्रति न्याय, सद्गुण और भूमिका-धर्म हैं। वे तब चलते हैं जब विधि, अंकेक्षण, और अधिकार का शुल्क देने से इनकार करती जनता ईमानदार अधिकारी के साथ खड़ी हो।

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    पैमाना भिन्न है; यदि उपहार पत्रावली खरीदे तो नैतिक आधार एक है। आचरण नियम दोनों को सत्यनिष्ठा जोखिम मानते हैं।

  • क्या तकनीक नैतिक आधारों की जगह ले सकती है?

    वह अवसर घटा सकती है। पासवर्ड का बेईमान स्वामी अभी चुराता है; नीति आदेश की मालिक रहती है।

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