Q10 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2025 · GS I · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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मानसून की उत्पत्ति के हालिया सिद्धांतों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा मानसून पर एल-नीनो के प्रभावों की चर्चा कीजिए।

विषय: Physical geography. पाठ्यक्रम: Salient features of Physical Geography — Earthquake, Tsunami, Volcanic activity, Cyclone, Ocean Currents, winds and glaciers. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2025 और Physical geography से।

Revision summary

मानसून केवल स्थल-सागर समीर नहीं; हालिया सिद्धांत में आईटीसीजेड खिसकाव और तिब्बत तापन केंद्र हैं। हिंद महासागर युग्मन, द्विध्रुव सहित, भी वर्षा विसंगतियाँ गढ़ता है। एल-नीनो वाकर परिसंचरण बदलकर अक्सर अखिल भारतीय ग्रीष्म वर्षा कमजोर करता है। हर एल-नीनो वर्ष सूखा नहीं होता, इसलिए प्रभाव संभाव्य है। पूर्वानुमान नीनो 3.4 के साथ हिंद महासागर द्विध्रुव प्रयोग करते हैं।

Model answer

Introduction

भारतीय मानसून पवन और वर्षा का मौसमी उलटाव है। हालिया सिद्धांत उसे केवल विशाल स्थल-सागर समीर नहीं मानते, और एल-नीनो एक महासागरीय नियंत्रण है जो वर्षा कमजोर कर सकता है।

Body

उत्पत्ति के हालिया सिद्धांत

  • हैली का शास्त्रीय विचार कि गर्म एशियाई स्थलखंड और ठंडे हिंद महासागर का तापांतर आधार है, किंतु वह पूर्ण उत्पत्ति सिद्धांत नहीं है।
  • फ्लोन और बाद के शोधकर्ता मानसून को भारत पर अंतः-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र के मौसमी खिसकाव के रूप में देखते हैं, जो साधारण समीर से बेहतर अचानक आगमन समझाता है।
  • तिब्बत पठार को अब बड़ी भूमिका दी जाती है: पठार का ग्रीष्म तापन और हिमालयी अवरोध ऊपरी उच्च दाब और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट बनाते हैं।
  • हिंद महासागर में वायु-सागर युग्मन, जिसमें हिंद महासागर द्विध्रुव शामिल है, वर्षा विसंगतियों की सह-उत्पत्ति माना जाता है, केवल पार्श्व प्रभाव नहीं।
  • आलोचनात्मक सीमा यह है कि कोई एक सिद्धांत अभी स्थिर मौसमी पूर्वानुमान नहीं देता, क्योंकि संवहन, एरोसोल और हिमालयी हिम अभी शोर जोड़ते हैं।

एल-नीनो के प्रभाव

  • एल-नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत का उष्ण चरण है; वह अक्सर वाकर परिसंचरण कमजोर करता है और भारतीय ग्रीष्म मानसून वर्षा घटा सकता है।
  • कई गंभीर अखिल भारतीय सूखा वर्ष एल-नीनो के साथ रहे, किंतु हर एल-नीनो वर्ष सूखा नहीं होता, इसलिए संबंध यांत्रिक नहीं, सांख्यिकीय है।
  • एल-नीनो आगमन और वापसी का समय भी खिसका सकता है, इसलिए प्रभाव मौसमी योग के साथ वितरण पर भी है।
  • ला-नीना, शीत चरण, अधिक बार अधिक वर्षा से जुड़ा है, फिर भी बाढ़ को स्थानीय अवदाब और भू-आकृति चाहिए।
  • पूर्वानुमान एजेंसियाँ इसलिए अकेले एल-नीनो नहीं, नीनो 3.4 सूचकांक के साथ हिंद महासागर द्विध्रुव देखती हैं।

Flow diagram

flowchart TD
  T[तिब्बत तापन आईटीसीजेड] --> M[ग्रीष्म मानसून]
  P[प्रशांत एल नीनो] --> W[कमजोर वाकर]
  W[W] --> M[M]
  I[हिंद महासागर द्विध्रुव] --> M

Conclusion

हालिया मानसून सिद्धांत स्थल तापन, आईटीसीजेड, तिब्बत पठार और हिंद महासागर युग्मन को जोड़ता है। एल-नीनो अक्सर भारतीय ग्रीष्म मानसून सुखाता है, किंतु हर घटना में नहीं, इसलिए आलोचनात्मक परीक्षण में प्रशांत और हिंद महासागर सूचकांक साथ रहने चाहिए।

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  • क्या एल-नीनो भारत में हमेशा सूखा लाता है?

    नहीं। वह सामान्य से कम वर्षा की संभावना बढ़ाता है। कुछ एल-नीनो वर्ष लगभग सामान्य रहते हैं जब हिंद महासागर द्विध्रुव या अन्य कारक क्षतिपूर्ति करते हैं।

  • क्या हैली सिद्धांत त्यागा जा चुका है?

    वह अधूरा है, त्यागा नहीं। स्थल-सागर तापन अभी आधार है, अब आईटीसीजेड, तिब्बत और महासागर युग्मन से जुड़ा है।

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