Revision summary
गांधी अच्छे साध्य को स्वच्छ साधन से अलग करने से इनकार करते हैं। सार्वजनिक धन न्यास है, इसलिए झूठे बिल और गड़े टेंडर कल्याण योजना पर भी गिरते हैं। न्यासिता आहरण एवं संवितरण अधिकारी के कर्तव्य से मेल खाती है। आजीविका योजनाएँ, अस्पताल कार्य और आपदा अनुदान हाजिरी, गुणवत्ता और सही प्राप्तकर्ता से जाँचे जाते हैं। सामाजिक अंकेक्षण और खुले टेंडर साधन की पवित्रता के संस्थागत रूप हैं।
Model answer
Introduction
गांधी मानते थे कि अच्छा साध्य गंदे साधन को नहीं धोता। सार्वजनिक धन न्यास है, इसलिए कोषागार में साध्य-साधन की परीक्षा वैकल्पिक नहीं।
Body
सिद्धांत सार्वजनिक निधि पर क्यों बैठता है
- सार्वजनिक निधि नागरिक की है, इसलिए योजना का साध्य झूठा बिल, गड़ा टेंडर या विलंबित मजदूरी माफ नहीं करता।
- गांधी का न्यासिता अतिरिक्त के धारक को न्यासी मानती है, जो आहरण एवं संवितरण अधिकारी की वही संरचना है।
- यहाँ साधन की पवित्रता खुली खरीद, सही माप, और भूमि पर काम से मेल खाती रसीद है।
- आपदा राहत में गति अच्छा साध्य है, फिर भी नकली हाजिरी भूखे से चोरी है, इसलिए साधन बाध्यकारी रहते हैं।
- स्वराज आत्म-शासन है, जिसमें उस अधिकारी का आत्म-संयम शामिल है जो उस दिन पकड़े बिना मद मोड़ सकता है।
उदाहरण
- ग्रामीण रोजगार की हाजिरी जिसमें अनुपस्थित नाम हों, आजीविका के साध्य पर भी साधन परीक्षा में गिरती है।
- समय पर उद्घाटित अस्पताल भवन घटिया सीमेंट से सुरक्षा और ईमानदारी दोनों हारता है, जिसे गांधी हिंसक साधन कहेंगे।
- सही खाते तक पहुँचता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण कल्याण साध्य का स्वच्छ साधन है।
- आपदा अनुदान का समारोह में मोड़ना सार्वजनिक प्रयोजन की पोशाक में बुरा साधन है।
- सामाजिक अंकेक्षण और प्रकाशित टेंडर उसी जोर के संस्थागत रूप हैं कि मार्ग वादे जितना स्वच्छ हो।
एक सीमा
- गांधी की व्यक्तिगत सादगी अंकेक्षण नियमावली का विकल्प नहीं, फिर भी नैतिक नियम उन नियमावलियों के उपयोग को जाँचता है।
Flow diagram
flowchart TD E[कल्याण साध्य] --> M[स्वच्छ साधन] M --> T[टेंडर हाजिरी डीबीटी] T --> U[लोक न्यास]
Conclusion
सार्वजनिक वित्त में गांधीवादी साध्य और साधन वांछनीय हैं क्योंकि नागरिक का रुपया न्यास है। कल्याण साध्य तभी वैध रहते हैं जब टेंडर, हाजिरी और अंतरण ईमानदार रहें।
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Students also ask
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Write the role of self-regulation and its components in improving performance at workplace.
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क्या गांधी आपात खरीद बिना टेंडर मना करते हैं?
आपात खरीद उपयुक्त साधन हो सकती है यदि अभिलेखित, सीमित और बाद में अंकेक्षित हो। टेंडर बचाने का नकली आपात नहीं।
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क्या सादगी राजकोषीय ईमानदारी है?
नहीं। कार्यालय सादा रहकर भी झूठा बिल पार कर सकता है। वाउचर की ईमानदारी यहाँ पहली गांधी परीक्षा है।
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