Q13 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2020 · GS IV · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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गीता का ‘अनासक्त योग’ क्या है? लोक सेवकों के लिये यह क्या सन्देश देता है? व्याख्या कीजिए।

विषय: Civil Service aptitude and values. पाठ्यक्रम: Aptitude and foundational values for Civil Service — integrity, impartiality, non-partisanship, objectivity, dedication to public services. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2020 और Civil Service aptitude and values से।

Revision summary

अनासक्त योग गीता की अनासक्ति है: पूरा कर्म करो, फल का स्वामी मत बनो। वह निष्काम कर्म है, आलस्य या ठंडक नहीं। लोक सेवक एसीआर, पदस्थापन या भीड़ की जय के लालच बिना पत्रावली चलाएँ। ईमानदारी को कैमरा न चाहिए; पदस्थापन नागरिकों पर न उतारा जाए। लोक हानि अभी मायने रखती है; अवैध आदेश भाग्य नहीं।

Model answer

Introduction

गीता में अनासक्त योग फल से चिपके बिना कर्म है। लोक सेवक के लिये वह पत्रावली को पूरा करने की भीतरी विधि है, पदस्थापन, प्रशंसा या बदला मोल किए बिना।

Body

अनासक्त योग क्या है

  • अनासक्ति फल से न चिपकना है: काम अर्पित है, परिणाम निजी संपत्ति की तरह नहीं पकड़ा जाता।
  • गीता का निष्काम कर्म वही शिक्षा है: तुम्हें कर्म का अधिकार है, गारंटी फल का नहीं।
  • वह आलस्य नहीं और उदासीनता नहीं। धनुष अभी अच्छे से खिंचे; केवल ट्रॉफी पर अहं का दावा छूटे।
  • सफलता-असफलता, गर्मी-सर्दी में समत्व योग है; कर्तव्य की गुणवत्ता ऊँची रहती है।
  • यहाँ आसक्ति तृष्णा, भय और निजी कथा है कि “यह आदेश मुझे शक्तिशाली दिखाना चाहिए”।

लोक सेवकों के लिये सन्देश

  • टिप्पणी ऐसे लिखें मानो स्थानांतरण सूची हो ही नहीं: विधवा की पेंशन अच्छे एसीआर का उपकरण नहीं।
  • कैमरा बिना लिफाफा मना करें; ईमानदारी का फल वायरल क्लिप नहीं।
  • विधिवत असुविधाजनक पदस्थापन स्वीकारें बिना जिले को नागरिकों पर उतारने योग्य दंड माने।
  • जब सत्ता भीड़ अपमान का फल चाहे तो निष्पक्ष रहें; अनासक्ति लोकप्रियता से अनासक्ति भी है।
  • अनासक्ति को ठंडक से न मिलाएँ: गीता अभी कर्म में देखभाल माँगती है; नागरिक की हानि “किसी और का फल” नहीं।

पद में शिक्षा की सीमा

  • अवैध आदेश भाग्य के रूप में स्वीकारने योग्य फल नहीं; असहमति और लिखित निर्देश कर्तव्य रहते हैं।
  • जनता के परिणाम अभी मायने रखते हैं: गिरा पुल “मैं अनासक्त था” से माफ नहीं।
  • सन्देश अहं-फल से भीतरी मुक्ति है, क्षमता या करुणा की छूट नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  A[अनासक्ति] --> D[पूर्ण कर्तव्य]
  A --> N[फल पर पकड़ नहीं]
  D --> S[निष्पक्ष सेवा]
  N --> S

Conclusion

अनासक्त योग निजी पकड़ बिना कुशल कर्तव्य है। सेवा के लिये सन्देश स्वच्छ पत्रावली, अबिका हाथ और समत्व है — नागरिक को विरक्ति का आँकड़ा बनाए बिना।

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