Q2 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2020 · GS IV · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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शासन में पारदर्शिता के लिये ‘सूचना के अधिकार’ की भूमिका की विवेचना कीजिए।

विषय: Probity in Governance. पाठ्यक्रम: Probity in Governance — concept of public service, philosophical basis of governance and probity. Right to Information, codes of ethics, codes of conduct, citizens' charter, work culture, quality of service delivery. Challenges of corruption. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2020 और Probity in Governance से।

Revision summary

आरटीआई पत्रावली देखने की इच्छा को विधिक दावा बनाता है। धारा 4 स्वतः प्रकटन नैतिक हृदय है; आवेदन पिछला सहारा हैं। द्वितीय एआरसी ने आरटीआई को सुशासन की मुख्य कुंजी माना। मजदूरी, राशन और ठेके की सामाजिक लेखापरीक्षा उसी कुंजी पर टिकती है। छूट संकीर्ण रहें और आवेदक सुरक्षित हो, नहीं तो पारदर्शिता व्यवहार में मरती है।

Model answer

Introduction

पारदर्शिता नागरिक की वह क्षमता है जिससे वह देख सके कि शक्ति ने पत्रावली कैसे चलाई। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, उस क्षमता को विधिक दावा बनाता है, ताकि गोपनीयता अधिकारी का डिफ़ॉल्ट उपहार न रहे।

Body

पारदर्शिता के लिये आरटीआई क्या करता है

  • धारा 3 प्रत्येक नागरिक को लोक प्राधिकारी के पास सूचना का अधिकार देती है; पत्रावली निजी अलमारी नहीं रहती।
  • धारा 4 की स्वतः प्रकटन नीति नैतिक केंद्र है: आवेदन से पहले बजट, लाभार्थी और मानक छापें — द्वितीय एआरसी ने आरटीआई को सुशासन की मुख्य कुंजी कहा।
  • स्वतंत्र सूचना आयोग और समयबद्ध उत्तर नैतिक विनती को जाँच योग्य कर्तव्य बनाते हैं, जो बेंथम के प्रचार सिद्धांत ने शक्ति से माँगा।
  • मनरेगा, पीडीएस सूची और कोविड खरीद की सामाजिक लेखापरीक्षा इसलिए संभव हुई कि ग्रामीण हाजिरी और बिल माँग सके।
  • आरटीआई अनुच्छेद 19 की वाणी और अनुच्छेद 21 की गरिमा का सहारा है: जो नहीं जानता कि राशन क्यों कटा, राज्य से विवाद नहीं कर सकता।

सीमाएँ जो अभी नीति की सेवा करती हैं

  • धारा 8 की छूट — सुरक्षा, मंत्रिमंडल पत्र, निजी गोपनीयता — कंबल नहीं; उन्हें संकीर्ण पढ़ना है, जैसा उच्चतम न्यायालय ने अक्सर कहा।
  • विलंबित, कटे या धमकाने वाले उत्तर व्यवहार में अधिकार मारते हैं; पारदर्शिता तब गिरती है जब जन सूचना अधिकारी आवेदक को शत्रु माने।
  • सूचना चाहने वालों पर हमले हुए हैं; बिना शारीरिक सुरक्षा के पारदर्शी कानून कागजी दीपक है।
  • मुक्त डेटा पोर्टल और ऑनलाइन आरटीआई ‘पत्रावली नहीं मिली’ के पीछे छिपने का अवसर घटाते हैं।
  • नैतिक उपयोग सक्रिय प्रकटन और बोलता आदेश है, ‘हिम्मत हो तो पूछो’ की संस्कृति नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  R[आरटीआई अधिनियम 2005] --> S4[स्वतः प्रकटन]
  R --> A[नागरिक आवेदन]
  S4 --> T[पारदर्शिता]
  A --> T
  T --> G[जवाबदेह पत्रावली]

Conclusion

आरटीआई पारदर्शिता को अधिकारी की कृपा नहीं, नागरिक का अधिकार बनाता है। वह तब चलता है जब धारा 4 जिए जाए, छूट संकीर्ण रहें, और आवेदक सुरक्षित हो। उसके बिना अधिनियम फॉर्म है, दीपक नहीं।

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