Q3 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2020 · GS IV · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

← Q2 Q4 →

“बेईमान अधिकारियों के अभियोजन के लिये सरकार की स्वीकृति की आवश्यकता, भ्रष्टाचार के लिये एक सुरक्षा कवच है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।

विषय: Probity in Governance. पाठ्यक्रम: Probity in Governance — concept of public service, philosophical basis of governance and probity. Right to Information, codes of ethics, codes of conduct, citizens' charter, work culture, quality of service delivery. Challenges of corruption. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2020 और Probity in Governance से।

Revision summary

पूर्व स्वीकृति सद्भावपूर्ण सरकारी कर्म को प्रेरित एफआईआर से बचाने के लिये थी। दं.प्र.सं. 197 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 19 सामान्य ताले हैं। ताला नहीं, अनंत विलंब भ्रष्टाचार का कवच है। द्वितीय एआरसी और सीवीसी घड़ी तथा कारणयुक्त आदेश चाहते थे, मानी गई स्वीकृति सहित। समय-रेखा और बोलता आदेश सुधारें; हर छलनी मत मिटाएँ।

Model answer

Introduction

लोक सेवक पर मुकदमे से पहले स्वीकृति का अर्थ उत्पीड़क मामलों को रोकना था जो ईमानदार पत्रावली जमा दें। कथन आधा सत्य है: वही ताला, बिना घड़ी के, बेईमान का कवच बन जाता है।

Body

स्वीकृति क्यों है

  • दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 पूर्व स्वीकृति माँगती हैं ताकि हर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बोलते आदेश को अपराध न बना दे।
  • विचार वेबर की निर्वैयक्तिकता है: अधिकारी को प्रेरित एफआईआर के दैनिक भय बिना निर्णय करना चाहिए।
  • ईमानदार भूल और सद्भावपूर्ण नीति चुनाव रिश्वत नहीं; स्वीकृति छलनी है, क्षमा नहीं।
  • द्वितीय एआरसी ने छलनी मानी पर समय-सीमा, कारणयुक्त आदेश, और सरकार सोए तो मानी गई स्वीकृति माँगी।

वह कवच कैसे बनती है

  • विलंब असली कवच है: पत्रावली वर्षों पड़ी रहे, गवाह बूढ़े हों, और आरोपी चुपचाप सेवानिवृत्त हो।
  • स्वीकृति प्राधिकारी पर मौखिक दबाव, और ‘सेवा बचाओ’ की संस्कृति, विधिक ताले को जाति-सी एकजुटता बना देती है।
  • विनीत नारायण और बाद की उच्चतम न्यायालय पंक्तियाँ कहती हैं कि स्वीकृति जाँच का वीटो नहीं; सीवीसी दिशानिर्देश तीन महीने की घड़ी चाहते थे।
  • 2018 के संशोधन ने कुछ स्थितियों में सेवानिवृत्त अधिकारियों तक स्वीकृति संस्कृति बढ़ाई, जिसे आलोचक मोटा कवच पढ़ते हैं।
  • कांट की परीक्षा तब गिरती है जब नियम सार्वभौम न हो: यदि हर बेईमान लिपिक ‘मनोबल के लिये सुरक्षित’ हो, लोक वर्दी पर विश्वास नहीं कर सकता।

न्यायसंगत परीक्षण

  • कथन वहाँ सही है जहाँ स्वीकृति अनंत, अस्पष्ट, और पहले से पके ट्रैप मामले के बाद भी चले।
  • वह गलत है यदि कोई छलनी ही न चाहे: प्रेरित अभियोजन की बाढ़ स्वयं साहस भ्रष्ट करेगी।
  • नैतिक सुधार समयबद्ध, बोलती स्वीकृति या इंकार, स्वतंत्र समीक्षा, और रंगे हाथों रिश्वत पर कोई प्रतिरक्षा नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  F[उत्पीड़क मामले की छलनी] --> S[स्वीकृति]
  D[विलंब और मौन] --> H[बेईमान का कवच]
  S --> E[समयबद्ध बोलता आदेश]
  E --> J[निष्पक्ष मुकदमा या ईमानदार इंकार]

Conclusion

स्वीकृति प्रेरित अभियोजन के विरुद्ध वैध छलनी है। जब विलंब और मौन कारणयुक्त, समयबद्ध निर्णय की जगह लें तो वह भ्रष्टाचार का कवच बनती है। छलनी रखें; समय का कवच हटाएँ।

Quick related

Students also ask

  • Discuss the following in the context of civil services.

    Next question in the 2020 paper (Q4). View answer →

  • क्या रंगे हाथों रिश्वत के मामले स्वीकृति की प्रतीक्षा करें?

    जाँच प्रतीक्षा न करे। जहाँ कानून अभी स्वीकृति माँगे, घड़ी लगे; ट्रैप मामला नीति मतभेद नहीं।

  • क्या सारी स्वीकृति मिटाना नैतिक उत्तर है?

    नहीं। प्रेरित मामलों की बाढ़ स्वयं ईमानदार टिप्पणी दंडित करेगी। नीति तेज, कारणयुक्त छलनी चाहती है, शून्य छलनी नहीं।

समान विषय · पिछले पेपर

UPPSC ने यह पहले भी पूछा है

ये पिछले वर्षों के प्रश्न उसी विषय पर हैं। अभ्यास के लिए खोलें।

  1. 2025 · Q12 · UPGS4 · 12 marks

    In the age of digital governance and big data, public officials rely increasingly on algorithms and automated decision-making systems. Critically examine the ethical risks involved in algorithmic bias, opacity and lack of accountability and suggest guiding principles for responsible use of such technologies in public administration.

    उत्तर देखें →

  2. 2021 · Q5 · UPGS4 · 8 marks

    A peaceful protest was being carried out by a group of milk traders. The Superintendent of Police instructs the Police Officials to prevent the group from committing any type of violence. He, however, tells them to ‘teach them a lesson’, if situation warrants. A police official on duty indulges into an argument with a protestor and beats him up. When inquired about his action, he says that he was told to teach them a lesson by the Superintendent of Police. Give your comment on ethical behaviour of both the Superintendent of Police and the Police official in the light of the above-mentioned incident.

    उत्तर देखें →

More from this paper

Q1 · UPSC Mains 2020 · UPGS4 · 8 marks · Solution

मूल्य बोध में परिवार, समाज और शिक्षण संस्थानों की भूमिका की विवेचना कीजिए।

Civil Service aptitude and values

परिवार दैनिक उदाहरण से विश्वास, सहानुभूति और सम्मान बोता है, और पूर्वाग्रह भी बो सकता है। समाज गली, बाजार और मीडिया में उन आदतों को पुरस्कृत या दंडित करता है। विद्यालय सार्वजनिक तर्क जोड़ता है ताकि मूल्य कुल से परे टिके। नई तालीम, मध्याह्न भोजन और नागरिक सभाएँ व्याख्यान से अधिक समता का अभ्यास हैं। पद की नीति इन मानचित्रों पर परत है, स्थान नहीं।

Q2 · UPSC Mains 2020 · UPGS4 · 8 marks · Solution

शासन में पारदर्शिता के लिये ‘सूचना के अधिकार’ की भूमिका की विवेचना कीजिए।

Probity in Governance

आरटीआई पत्रावली देखने की इच्छा को विधिक दावा बनाता है। धारा 4 स्वतः प्रकटन नैतिक हृदय है; आवेदन पिछला सहारा हैं। द्वितीय एआरसी ने आरटीआई को सुशासन की मुख्य कुंजी माना। मजदूरी, राशन और ठेके की सामाजिक लेखापरीक्षा उसी कुंजी पर टिकती है। छूट संकीर्ण रहें और आवेदक सुरक्षित हो, नहीं तो पारदर्शिता व्यवहार में मरती है।

Q4 · UPSC Mains 2020 · UPGS4 · 8 marks · Solution

सिविल सेवा के संदर्भ में निम्नलिखित की विवेचना कीजिए।

Civil Service aptitude and values

निष्पक्षता मित्र और अजनबी पर एक विधिवत मापदंड लगाती है। प्रतिबद्धता पद के संवैधानिक प्रयोजन की सहनशक्ति है, संरक्षक की नहीं। नोलन और द्वितीय एआरसी दोनों को आधारभूत सेवा मूल्य मानते हैं। वेबर की निर्वैयक्तिकता निष्पक्षता है; पटेल की अखिल भारतीय सेवा भारत के प्रति प्रतिबद्धता है। बिना न्याय का जोश गुट है; बिना सहनशक्ति का न्याय बंद पत्रावली है।

PDF