Revision summary
पूर्व स्वीकृति सद्भावपूर्ण सरकारी कर्म को प्रेरित एफआईआर से बचाने के लिये थी। दं.प्र.सं. 197 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 19 सामान्य ताले हैं। ताला नहीं, अनंत विलंब भ्रष्टाचार का कवच है। द्वितीय एआरसी और सीवीसी घड़ी तथा कारणयुक्त आदेश चाहते थे, मानी गई स्वीकृति सहित। समय-रेखा और बोलता आदेश सुधारें; हर छलनी मत मिटाएँ।
Model answer
Introduction
लोक सेवक पर मुकदमे से पहले स्वीकृति का अर्थ उत्पीड़क मामलों को रोकना था जो ईमानदार पत्रावली जमा दें। कथन आधा सत्य है: वही ताला, बिना घड़ी के, बेईमान का कवच बन जाता है।
Body
स्वीकृति क्यों है
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 पूर्व स्वीकृति माँगती हैं ताकि हर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बोलते आदेश को अपराध न बना दे।
- विचार वेबर की निर्वैयक्तिकता है: अधिकारी को प्रेरित एफआईआर के दैनिक भय बिना निर्णय करना चाहिए।
- ईमानदार भूल और सद्भावपूर्ण नीति चुनाव रिश्वत नहीं; स्वीकृति छलनी है, क्षमा नहीं।
- द्वितीय एआरसी ने छलनी मानी पर समय-सीमा, कारणयुक्त आदेश, और सरकार सोए तो मानी गई स्वीकृति माँगी।
वह कवच कैसे बनती है
- विलंब असली कवच है: पत्रावली वर्षों पड़ी रहे, गवाह बूढ़े हों, और आरोपी चुपचाप सेवानिवृत्त हो।
- स्वीकृति प्राधिकारी पर मौखिक दबाव, और ‘सेवा बचाओ’ की संस्कृति, विधिक ताले को जाति-सी एकजुटता बना देती है।
- विनीत नारायण और बाद की उच्चतम न्यायालय पंक्तियाँ कहती हैं कि स्वीकृति जाँच का वीटो नहीं; सीवीसी दिशानिर्देश तीन महीने की घड़ी चाहते थे।
- 2018 के संशोधन ने कुछ स्थितियों में सेवानिवृत्त अधिकारियों तक स्वीकृति संस्कृति बढ़ाई, जिसे आलोचक मोटा कवच पढ़ते हैं।
- कांट की परीक्षा तब गिरती है जब नियम सार्वभौम न हो: यदि हर बेईमान लिपिक ‘मनोबल के लिये सुरक्षित’ हो, लोक वर्दी पर विश्वास नहीं कर सकता।
न्यायसंगत परीक्षण
- कथन वहाँ सही है जहाँ स्वीकृति अनंत, अस्पष्ट, और पहले से पके ट्रैप मामले के बाद भी चले।
- वह गलत है यदि कोई छलनी ही न चाहे: प्रेरित अभियोजन की बाढ़ स्वयं साहस भ्रष्ट करेगी।
- नैतिक सुधार समयबद्ध, बोलती स्वीकृति या इंकार, स्वतंत्र समीक्षा, और रंगे हाथों रिश्वत पर कोई प्रतिरक्षा नहीं।
Flow diagram
flowchart TD F[उत्पीड़क मामले की छलनी] --> S[स्वीकृति] D[विलंब और मौन] --> H[बेईमान का कवच] S --> E[समयबद्ध बोलता आदेश] E --> J[निष्पक्ष मुकदमा या ईमानदार इंकार]
Conclusion
स्वीकृति प्रेरित अभियोजन के विरुद्ध वैध छलनी है। जब विलंब और मौन कारणयुक्त, समयबद्ध निर्णय की जगह लें तो वह भ्रष्टाचार का कवच बनती है। छलनी रखें; समय का कवच हटाएँ।
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क्या रंगे हाथों रिश्वत के मामले स्वीकृति की प्रतीक्षा करें?
जाँच प्रतीक्षा न करे। जहाँ कानून अभी स्वीकृति माँगे, घड़ी लगे; ट्रैप मामला नीति मतभेद नहीं।
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क्या सारी स्वीकृति मिटाना नैतिक उत्तर है?
नहीं। प्रेरित मामलों की बाढ़ स्वयं ईमानदार टिप्पणी दंडित करेगी। नीति तेज, कारणयुक्त छलनी चाहती है, शून्य छलनी नहीं।
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