Q6 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2020 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 1 min read

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सरकारी नीतियों के सन्दर्भ में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

विषय: Government policies for development. पाठ्यक्रम: Government policies and interventions for development in various sectors. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2020 और Government policies for development से।

Revision summary

डिजिटल इंडिया और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 आईसीटी को नीति का वैधानिक और कार्यक्रम उपकरण बनाते हैं। डीबीटी और आधार-बीज भुगतान कल्याण में भूत काटते हैं जहाँ प्रमाणीकरण चलता है। उमंग, डिजीलॉकर, ई-ऑफिस और आरटीआई पोर्टल नागरिक-राज्य भेंट बदलते हैं। पुत्तास्वामी और डिजिटल विभाजन निजता और बहिष्करण जोखिम दिखाते हैं। आईसीटी नीति तभी गुणित करता है जब कर्मी, कनेक्टिविटी और ऑफलाइन विकल्प हों।

Model answer

Introduction

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अब केवल कार्यालय उपकरण नहीं, नीति उपकरण है। मूल्यांकन को जाँचना चाहिए कि डिजिटल इंडिया, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आधार-बीज प्रदाय ने सरकारी नीति सस्ती और अधिक ईमानदार बनाई, या केवल सतह पर डिजिटल।

Body

नीति चक्र में भूमिका

  • डिज़ाइन: डैशबोर्ड, जीआईएस और जनगणना-स्तरीय डेटाबेस मंत्रालयों को एकसमान नकद घोषणा के बजाय लक्ष्यीकरण देते हैं।
  • प्रदाय: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, आधार प्रमाणीकरण और लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पेंशन, एलपीजी और छात्रवृत्ति में भूत लाभार्थी काटते हैं।
  • संपर्क: उमंग, डिजीलॉकर, ई-ऑफिस और आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल नागरिक-राज्य संपर्क को फाइल खोज के बजाय ट्रैक लेनदेन बनाते हैं।
  • जवाबदेही: सार्वजनिक डैशबोर्ड और सीपीग्राम्स जैसी शिकायत प्रणालियाँ विलंब दिखाती हैं; आईटी अधिनियम, 2000 और बाद का डेटा संरक्षण क़ानून यह भी कर्तव्य बनाते हैं कि राज्य पहचान कैसे रखे।

मूल्यांकन

  • रिसाव-प्रवण सब्सिडी और एक राष्ट्र एक राशन-सदृश पोर्टेबिलिटी में, जहाँ कनेक्टिविटी है, लाभ वास्तविक हैं।
  • सीमाएँ: डिजिटल विभाजन, बायोमेट्रिक विफलता, पुत्तास्वामी (2017) के बाद निजता, और विक्रेता-बंधन सबसे गरीब को बाहर कर सकते या बिना सहमति डेटा केन्द्रित कर सकते हैं।
  • आईसीटी नीति की सेवा तभी करता है जब पोर्टल के पीछे वैधानिक सेवा मानक और मानवीय विकल्प हों।

संतुलित निर्णय

  • सरकारी नीति में आईसीटी लक्ष्यीकरण और अंकेक्षण का बल-गुणक है।
  • यह कर्मी, कनेक्टिविटी या ऑफलाइन सुने जाने के अधिकार का विकल्प नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  P[सरकारी नीति] --> I[आईसीटी मंच]
  I --> T[लक्ष्यीकरण और डीबीटी]
  I --> C[नागरिक पोर्टल]
  T --> A[अंकेक्षण और कम रिसाव]
  C --> A
  I --> X[विभाजन और निजता जोखिम]

Conclusion

आईसीटी ने सरकारी नीति को डिजिटल इंडिया और आईटी अधिनियम के अधीन कागज़ी लक्ष्यीकरण से प्रमाणित, अंकेक्षणयोग्य प्रदाय की ओर ले जाया है। भूमिका वहाँ प्रबल सकारात्मक है जहाँ कनेक्टिविटी और विकल्प हैं, और जहाँ नहीं वहाँ समावेश कमजोर है।

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    Next question in the 2020 paper (Q7). View answer →

  • क्या आईसीटी स्वयं नीति को वैध बना देता है?

    नहीं। पोर्टल अभी अधिनियम, नियम और बजट पर टिकना चाहिए। आईसीटी केवल डिज़ाइन और प्रदाय का ढंग बदलता है।

  • क्या हर सरकारी नीति में आधार अनिवार्य है?

    न्यायालय और बाद की विधि अनिवार्य उपयोग सीमित करते हैं। अनेक योजनाएँ आधार बीज करती हैं, पर प्रमाणीकरण विफलता से बहिष्करण जीवंत नीति समस्या है।

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