Q2 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2020 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 1 min read

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"भारत का राष्ट्रपति तानाशाह नहीं बन सकता।" समझाइये।

विषय: Indian Constitution. पाठ्यक्रम: Indian Constitution — historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2020 और Indian Constitution से।

Revision summary

चौवालीसवें संशोधन के बाद अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को मंत्रिमंडलीय सहायता-परामर्श से बाँधता है। शमशेर सिंह राष्ट्रपति को संसदीय कार्यपालिका का औपचारिक प्रमुख मानता है। अध्यादेश और आपात शक्तियाँ व्यक्तिगत नहीं; वे परिषद पर सवार हैं। पाँच वर्ष का कार्यकाल, निर्वाचक मंडल और अनुच्छेद 61 महाभियोग स्व-स्थायित्व रोकते हैं। न्यायालय जाँच सकते हैं कि कार्य सच में परामर्श पर था, इसलिए तानाशाही का संवैधानिक द्वार नहीं।

Model answer

Introduction

अनुच्छेद 53 के अधीन राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, पर भारत संसदीय गणराज्य है। पद व्यक्तिगत तानाशाही नहीं बन सकता क्योंकि सहायता-परामर्श, कार्यकाल और हटाया जाना मंत्रिपरिषद तथा संसद से बँधे हैं।

Body

पद निरंकुश क्यों नहीं

  • चौवालीसवें संशोधन के बाद अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और परामर्श पर कार्य करने को बाध्य करता है, केवल एक बार परामर्श लौटाने के साथ।
  • शमशेर सिंह (1974) ने कहा कि वास्तविक कार्यपालिका शक्ति परिषद की है; राष्ट्रपति कुछ दुर्लभ स्थितियों को छोड़ औपचारिक प्रमुख हैं।
  • अध्यादेश (अनुच्छेद 123) और आपात शक्तियाँ भी मंत्रिमंडलीय परामर्श से चलती हैं; वे व्यक्तिगत आरक्षित कोष नहीं।

राजनीतिक और कानूनी रोक

  • राष्ट्रपति पाँच वर्ष के लिए निर्वाचक मंडल से चुने जाते हैं (अनुच्छेद 54-55), स्व-नियुक्ति से नहीं, और संविधान उल्लंघन पर महाभियोग से हटाए जा सकते हैं (अनुच्छेद 61)।
  • धन, विधायन और विश्वास लोक सभा में रहते हैं; बहुमत मंत्रालय की अवज्ञा करने वाले राष्ट्रपति के पास बजट और कानूनी आवरण नहीं होता।
  • न्यायालय जाँच सकते हैं कि तथाकथित ‘व्यक्तिगत’ कार्य वास्तव में परामर्श पर था या नहीं, इसलिए पद तख्तापलट को औपचारिक भाषा में नहीं छिपा सकता।

कथन का पाठ

  • कथन संवैधानिक रूप से ठोस है: डिज़ाइन, बयालीसवें संशोधन के बाद का इतिहास और व्यवहार राष्ट्रपति तानाशाही रोकते हैं।
  • त्रिशंकु सदन या बर्खास्तगी में अवशिष्ट विवेक अभी भी सीमित है, एक-व्यक्ति शासन का मार्ग नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  P[राष्ट्रपति अनुच्छेद 53] --> A[अनुच्छेद 74 सहायता परामर्श]
  A --> C[मंत्रिपरिषद]
  C --> L[लोक सभा विश्वास]
  P --> I[महाभियोग अनुच्छेद 61]
  P --> J[न्यायिक समीक्षा]

Conclusion

राष्ट्रपति तानाशाह इसलिए नहीं बन सकते कि अनुच्छेद 74, संसदीय विश्वास, महाभियोग और न्यायिक समीक्षा पद से स्वतंत्र कमान छीन लेते हैं। संघ कार्यपालिका मंत्रिमंडलीय है; राष्ट्रपति उसका संवैधानिक मुख हैं।

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    उसने बाध्य खंड जोड़ा; चौवालीसवें संशोधन ने बाध्यता रखी पर पुनर्विचार हेतु परामर्श एक बार लौटाने दिया।

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