Q13 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2022 · GS I · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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प्राचीन भारतीय ज्ञान के उन बिन्दुओं को स्पष्ट कीजिए जिनके आधार पर भारत को 'विश्वगुरु' अभिहित किया गया।

विषय: Indian culture. पाठ्यक्रम: History of Indian Culture — Art Forms, literature and Architecture from ancient to modern times. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2022 और Indian culture से।

Revision summary

षड्दर्शन और उपनिषदीय वाद विश्वगुरु के पीछे दार्शनिक बिंदु हैं। पाणिनि की व्याकरण ने भाषा को सिखाए जाने योग्य विज्ञान बनाया। आर्यभट और ब्रह्मगुप्त के माध्यम से दशमलव स्थानीय मान और शून्य सबसे मजबूत वैश्विक गणितीय दावा हैं। चरक और सुश्रुत ने चिकित्सा और शल्य व्यवस्थित किए। नालंदा और तक्षशिला विदेशी छात्रों वाली व्यवस्थित उच्च शिक्षा दिखाते हैं; नाम प्रत्येक आधुनिक आविष्कार तक नहीं खींचना चाहिए।

Model answer

Introduction

विश्वगुरु सभ्यता का बाद का सम्मान-नाम है जो ग्रंथ, गुरु और विश्वविद्यालय से सिखाती थी, गुप्त दरबार का मंत्रालय पद नहीं। नाम के पीछे प्राचीन ज्ञान के बिंदु दर्शन, व्याकरण, गणित, आयुर्वेद, धातुकर्म और तक्षशिला-नालंदा जैसी व्यवस्थित शिक्षा हैं।

Body

चिंतन, भाषा और राज्य

  • उपनिषद और षड्दर्शन (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत) ने आत्मा, द्रव्य और प्रमाण पर तर्क सिखाया, जिसे आगंतुक विश्व-विद्यालय मानते थे।
  • पाणिनि की अष्टाध्यायी संस्कृत की उत्पादक व्याकरण है जो प्राचीनता में संक्षिप्तता में अद्वितीय रही; पतंजलि और बाद के कोशों ने भाषा को विज्ञान बनाया।
  • अर्थशास्त्र परंपरा और धर्मशास्त्र संग्रहों ने राजशासन, विधि और राजस्व को केवल रिवाज नहीं, सिखाए जाने योग्य ज्ञान के रूप में रखा।
  • बौद्ध और जैन आगम, हेतुविद्या और नीति के साथ, मध्य एशिया, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया गए; गुरु छवि उपमहाद्वीप से इसी तरह निकली।

गणित, ज्योतिष और शरीर

  • दशमलव स्थानीय मान और शून्य का प्रयोग, आर्यभट, ब्रह्मगुप्त और बाद में भास्कर में परिपक्व, विश्वगुरु सूची का सबसे मजबूत वैश्विक दावा है।
  • यज्ञ वेदियों की शुल्ब-सूत्र ज्यामिति, ज्या (sine) और सिद्धांत ग्रंथों के ग्रह मॉडल ने कर्मकांड और खगोल दोनों पाले।
  • चरक संहिता और सुश्रुत संहिता ने कायचिकित्सा और शल्य को व्यवस्थित किया, यंत्रों और त्रिदोष सहित, जिनसे अरबी और बाद के यूरोपीय चिकित्सक अनुवाद से मिले।
  • धातुकर्म (वूट्ज इस्पात, राजस्थान में जस्ता आसवन, महरौली स्तंभ) और हड़प्पा नगर-स्मृति अक्सर जोड़ी जाती हैं; वे भौतिक ज्ञान हैं, भले साहित्यिक पगडंडी पतली हो।

विश्वविद्यालय, और नाम का आलोचनात्मक प्रयोग

  • तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी आवासीय विश्वविद्यालय थे—वाद, पुस्तकालय, विदेशी छात्र;ह्वेनसांग का नालंदा क्लासिक साक्षी है।
  • आयुर्वेद, योग और संगीत शास्त्र ज्ञान को जिया हुआ अनुशासन दिखाते हैं, केवल पुस्तक नहीं।
  • विश्वगुरु प्रचार बन जाता है यदि प्रत्येक विमान और प्रत्येक टीका को वैदिक श्लोक में ठूँसा जाए; ईमानदार बिंदु वे हैं जिन्हें अन्य सभ्यताओं ने वास्तव में उधार लिया या सराहा।
  • 12 अंक का उत्तर इसलिए प्रमाण, पाणिनि, शून्य, चरक-सुश्रुत और नालंदा नामित करता है, और सूची को आधुनिक प्रयोगशालाओं की होड़ तक नहीं फुलाता।

Flow diagram

flowchart TD
  P[दर्शन पाणिनि] --> V[विश्वगुरु नाम]
  M[शून्य आर्यभट] --> V
  A[चरक सुश्रुत] --> V
  N[नालंदा तक्षशिला] --> V

Conclusion

भारत को विश्वगुरु दर्शन-व्याकरण, दशमलव-शून्य गणितीय भाषा, चिकित्सा संहिताओं और विश्व को पढ़ाने वाले विश्वविद्यालयों के बल पर कहा गया। नाम तब ठहरता है जब इन्हीं दर्ज दानों की ओर इशारा करे, और तब फिसलता है जब बाद के पूरे विज्ञान का कंबल बन जाए।

Quick related

Students also ask

  • Throw light on the factors of continuity and change in Indian Society.

    Next question in the 2022 paper (Q14). View answer →

  • क्या प्राचीन भारत ने आधुनिक विज्ञान सब गढ़ लिया?

    नहीं। विश्वगुरु उन दर्ज भारतीय योगदानों के लिए न्यायसंगत है जो यात्रा कर गए। वैदिक काल में विमान, आनुवंशिकी या डिजिटल कंप्यूटर पीछे तिथि करने का लाइसेंस नहीं है।

  • क्या नालंदा एकमात्र केंद्र था?

    नहीं। तक्षशिला यश में पहले है; विक्रमशिला, ओदंतपुरी और वल्लभी उसी विश्वविद्यालय मानचित्र के हैं।

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