Revision summary
उन्नीसवीं सदी का यूपी पुनर्जागरण क्षेत्रीय है: बनारस में हिंदी, लखनऊ में उर्दू, और अलीगढ़ आंदोलन। भारतेंदु का मुद्रण और हिंदी-उर्दू बहस ने भाषा को सार्वजनिक प्रश्न बनाया। सर सैयद का 1875 का एमएओ कॉलेज मुस्लिम धारा का मुख्य शैक्षिक स्मारक है। सभाएँ, आर्य समाज और कन्या शिक्षा इसे साहित्य के साथ सामाजिक बनाती हैं। यह इतालवी पुनर्जागरण की नकल नहीं है।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश में उन्नीसवीं सदी का पुनर्जागरण औपनिवेशिक मुद्रण और कानून के अधीन भाषा, शिक्षा और सामाजिक-धार्मिक बहस का क्षेत्रीय जागरण था। स्वरूप हिंदी-उर्दू साहित्य, महाविद्यालय निर्माण और सुधार सभाएँ हैं, इतालवी पुनर्जागरण की नकल नहीं।
Body
भाषा और मुद्रण
- बनारस ने भारतेंदु हरिश्चंद्र के इर्द-गिर्द हिंदी सार्वजनिक क्षेत्र बनाया, जिनके पत्र और नाटक सामाजिक सुधार तथा औपनिवेशिक शासन को एक प्रश्न मानते थे।
- 1867 के बाद उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में तीखी हिंदी-उर्दू बहस ने भाषा को राजनीतिक पहचान बना दिया, इसलिए यहाँ का पुनर्जागरण लिपि और न्यायालय-भाषा का संघर्ष भी है।
- लखनऊ उर्दू गद्य और बाद की पत्रकारिता का केंद्र रहा, इसलिए जागरण द्विभाषी है, केवल हिंदी कथा नहीं।
शिक्षा और संगठन
- सर सैयद अहमद खाँ का अलीगढ़ आंदोलन, 1875 के मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज सहित, इस्लामी आत्म-सम्मान के साथ आधुनिक विज्ञान चाहता था और इस क्षेत्रीय पुनर्जागरण की मुख्य मुस्लिम धारा है।
- बनारस संस्कृत कॉलेज, बाद का सेंट्रल हिंदू कॉलेज, तथा मिशन और सरकारी स्कूल अंग्रेजी और देशी साक्षरता फैलाते हैं जिससे समाचारपत्र और सभाएँ पलती हैं।
- आर्य समाज, विधवा पुनर्विवाह और कन्या शिक्षा की बहस, तथा स्थानीय अंजुमन-सभा राजनीति को सामाजिक चरित्र देती है, केवल साहित्यिक नहीं।
- स्वरूप इसलिए सुधारवादी और संगठनात्मक है: मुद्रण, महाविद्यालय और सभा, बनारस, अलीगढ़, लखनऊ और इलाहाबाद में केंद्रित, समस्त परंपरा से अचानक विच्छेद नहीं।
Flow diagram
flowchart TD R[यूपी 19वीं पुनर्जागरण] --> H[भारतेंदु हिंदी मुद्रण] R --> A[अलीगढ़ महाविद्यालय] R --> L[लखनऊ उर्दू] H --> P[सभा और सुधार] A[A] --> P[P] L[L] --> P[P]
Conclusion
उन्नीसवीं सदी का यूपी पुनर्जागरण हिंदी और उर्दू में मुद्रण-महाविद्यालय जागरण था, जिसके आसन अलीगढ़, बनारस और लखनऊ हैं। स्वरूप सामाजिक-धार्मिक सुधार के साथ भाषा राजनीति है, यूरोपीय शैली का शास्त्रीय कला पुनर्जन्म नहीं।
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क्या यह पुनर्जागरण केवल हिंदी आंदोलन था?
नहीं। बनारस हिंदी मुद्रण केंद्र है, किंतु अलीगढ़ और लखनऊ उर्दू यूपी कथा के समान भाग हैं।
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क्या यह बंगाल पुनर्जागरण के समान है?
मुद्रण, महाविद्यालय और सुधार साझा हैं, किंतु आसन, भाषाएँ और हिंदी-उर्दू प्रश्न उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के विशिष्ट हैं।
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