Q5 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2025 · GS V (UP) · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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संवैधानिक प्रमुख के रूप में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।

विषय: Political system of UP. पाठ्यक्रम: Political System of UP — Governance, Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Assembly and State Council, Centre-State Relations. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2025 और Political system of UP से।

Revision summary

अनुच्छेद 153–162 राज्यपाल को उत्तर प्रदेश का संवैधानिक प्रमुख बनाते हैं। सामान्य कार्यपालिका कृत्य अनुच्छेद 163 के अधीन मंत्रिपरिषद का अनुसरण करते हैं। सदन आहूत करना, अनुमति, क्षमा और अनुच्छेद 356 रिपोर्ट मुख्य औपचारिक शक्तियाँ हैं। 403 सीटों वाले राज्य में त्रिशंकु सदनों ने पद की परीक्षा ली है। प्रमुख तभी संवैधानिक रहता है जब विवेक अपवाद हो।

Model answer

Introduction

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल अनुच्छेद 153 से 162 के अधीन राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं। टिप्पणी औपचारिक प्रमुख को दुर्लभ विवेकाधीन कृत्यों से अलग करे, विशेषकर भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य में।

Body

संवैधानिक स्थिति

  • अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल देता है; अनुच्छेद 155 कहता है कि राष्ट्रपति राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं।
  • अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है, किंतु अनुच्छेद 163 सामान्य स्थितियों में उसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बाँधता है।
  • अनुच्छेद 161 क्षमा शक्ति है; अनुच्छेद 174 विधान सभा को आहूत, सत्रावसान और भंग करने की शक्ति है; अनुच्छेद 200 विधेयकों पर अनुमति है, जिसमें राष्ट्रपति के लिए आरक्षण शामिल है।
  • अनुच्छेद 356 की राज्यपाल रिपोर्ट राष्ट्रपति शासन खोल सकती है, जो लखनऊ पर संघ का सबसे तीक्ष्ण लीवर है।

यूपी पद पर टिप्पणी

  • संवैधानिक प्रमुख के रूप में राजभवन, लखनऊ के राज्यपाल संघ का प्रतिनिधित्व करते हैं, बजट प्राप्त करते हैं, और त्रिशंकु सदन के बाद मंत्रिमंडल स्थापित करते हैं।
  • 403 विधान सभा सीटों वाले राज्य में सरकार गठन, फ्लोर टेस्ट और विधेयक आरक्षण ने पद को अक्सर राजनीतिक रूप से दिखाई दिया है।
  • उच्चतम न्यायालय की सहायता-सलाह रेखा का अर्थ है कि राज्यपाल समानांतर मुख्यमंत्री नहीं हैं; विवेक त्रिशंकु परिणाम, फ्लोर टेस्ट और कुछ विधेयक फाइलों के लिए अपवाद है।

सीमा

  • यदि राज्यपाल विधेयक रोकें या स्पष्ट बहुमत के बिना मंत्रिमंडल चुनें, तो पद संवैधानिक प्रमुख जैसा नहीं, राजनीतिक कर्ता जैसा दिखने लगता है।

Flow diagram

flowchart TD
  C[अनुच्छेद 153 से 162] --> G[राज्यपाल यूपी]
  G --> M[सहायता सलाह मुख्यमंत्री]
  G --> D[विवेक त्रिशंकु विधेयक 356]
  M --> H[संवैधानिक प्रमुख]
  D --> H

Conclusion

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल अनुच्छेद 153–162 के अधीन संवैधानिक प्रमुख हैं, सामान्य कार्य में मंत्रि सलाह पर चलते हैं। टिप्पणी यह है कि पद तभी वैध रहता है जब विवेक दुर्लभ हो और सरकार का निर्णय राजभवन नहीं, सदन का तल तय करे।

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  • क्या राज्यपाल यूपी सरकार रोज चलाते हैं?

    नहीं। अनुच्छेद 163 सामान्य कार्यपालिका शक्ति विधान सभा के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों के पास रखता है।

  • विवेक कब वास्तविक है?

    त्रिशंकु विधान सभा, बहुमत सिद्ध करने के लिए मुख्यमंत्री का चयन, कुछ विधेयक फाइलें, और अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट।

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