Revision summary
रामचरितमानस, ब्रज भक्ति, कबीर और प्रेमचंद घरों तथा स्कूलों में आते हैं। ठुमरी, दादरा, बिरहा और कजरी विवाह, सावन और फसल चिह्नित करते हैं। लखनऊ, बनारस और ब्रज साहित्यिक तथा संगीत क्षेत्र दोनों हैं। दैनिक यूपी संस्कृति केवल पढ़ी नहीं, गाई और कही जाती है।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश का दैनिक जीवन संगीत सभा से अधिक पद्य, कथा और गीत से चलता है। स्पष्टीकरण घर, त्योहार और काम पर साहित्य तथा संगीत दिखाना चाहिए।
Body
साधारण दिनों में साहित्य
- तुलसीदास का अवधी रामचरितमानस घरों और रामलीला मैदानों में पढ़ा और गाया जाता है, इसलिए महाकाव्य घरेलू ग्रंथ है, केवल पुस्तकालय पाठ नहीं।
- सूरदास की ब्रज कविता और कृष्ण लीला चक्र मथुरा-वृंदावन के मंदिर गायन को आकार देते हैं।
- कबीर के दोहे, प्रेमचंद की हिंदी-उर्दू कहानियाँ और लखनऊ की नवाबी उर्दू अभी भी कहावत, स्कूल पाठ और मुशायरे देती हैं।
साधारण दिनों में संगीत
- बनारस और लखनऊ घरानों की ठुमरी, दादरा और कजरी दरबारी स्मृति से विवाह बैंड, रेडियो और मंदिर में आती हैं।
- बिरहा, कजरी, आल्हा और फसल गीत अवध, पूर्वांचल, मिर्जापुर और बुंदेलखंड में किसानों तथा ग्वालों के मौसम चिह्नित करते हैं।
- कव्वाली, सोज़ और गंगा-यमुना आरती दिखाते हैं कि मुस्लिम और हिंदू ध्वनि-संसार लखनऊ, बनारस और प्रयागराज जैसे नगर साझा करते हैं।
- कथक बोल और लोक नौटंकी गाँव के मेले में कथा और लय रखते हैं।
महत्व
- यहाँ साहित्य और संगीत बिना टिकट मंच के धर्म, मौसम और अपनी पहचान सिखाते हैं, इसलिए वे दैनिक यूपी जीवन में सांस्कृतिक रूप से केंद्रीय हैं।
Flow diagram
flowchart TD Lit[रामचरितमानस ब्रज उर्दू] --> Day[दैनिक यूपी जीवन] Mus[ठुमरी बिरहा कजरी] --> Day Day --> F[घर त्योहार काम]
Conclusion
उत्तर प्रदेश में अवधी-ब्रज पद्य, हिंदी-उर्दू मुद्रण, तथा लोक और घराना संगीत पूजा, श्रम और त्योहार चलाते हैं। उनका सांस्कृतिक महत्व यह है कि वे प्रतिदिन जिए जाते हैं, केवल अकादमी में नहीं रखे जाते।
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क्या यूपी का संगीत जीवन केवल शास्त्रीय है?
नहीं। घराना ठुमरी दैनिक प्रयोग में बिरहा, कजरी, रामलीला और कव्वाली के साथ बैठती है।
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साहित्य हर दिन क्यों मायने रखता है?
रामकथा, दोहे और मुशायरे घरेलू तथा गली रूप हैं, इसलिए पद्य त्योहार और बोलचाल चलाता है।
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