Revision summary
भ्रष्टाचार लोक धन का दुरुपयोग करता है, ईमानदार काम धीमा करता है, और योजनाओं को किराया बनाता है। रोकथाम प्रकाशित नियम, ई-ऑफिस और बोलते आदेश से विवेक काटती है। आरटीआई, सामाजिक लेखापरीक्षा, डीबीटी और संपत्ति प्रकटन अंधेरे बाजार को सिकोड़ते हैं। सतर्कता और व्हिसल ब्लोअर रक्षा शिकायतकर्ता को दंडित न करें। मूल्यांकन तर्कसंगत इन्कार पुरस्कृत करे, और राजनीतिक धन पत्रावली ऊपर से न बेचे।
Model answer
Introduction
भ्रष्टाचार केवल निजी दाग नहीं। वह राजकोष चुराता है, पत्रावली धीमी करता है, और विकास योजना को किराया बना देता है। रोकथाम विधि, विवेक घटाने वाली व्यवस्था, और छिप न सकने वाली सेवा का मिश्रण है।
Body
कथन कहाँ सही है
- राजकोष का दुरुपयोग पहला घाव है: फूला बिल, भूत लाभार्थी, या वह कार्य जिसमें कटौती के बिना प्रगति न हो।
- प्रशासनिक अक्षमता पीछे आती है क्योंकि अधिकारी का समय सौदेबाजी पर जाता है, सेवा पर नहीं, और ईमानदार कर्मचारी सीखते हैं कि गति दंडित होती है।
- राष्ट्रीय विकास रुकता है जब सड़क, विद्यालय और अस्पताल कागज पर हों, और गरीब दो बार दे — कर और रिश्वत।
सार्वजनिक जीवन में रोकथाम
- काउंटर पर विवेक घटाएँ: प्रकाशित मापदंड, ई-ऑफिस, ऑनलाइन ट्रैकिंग, और बोलता आदेश जिसे नागरिक चुनौती दे सके।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोकायुक्त और सतर्कता मार्ग, तथा व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम चलाएँ ताकि शिकायत करियर-मृत्यु न बने।
- सूचना का अधिकार और निविदा, प्रतीक्षा सूची, लाभार्थी पंजिका का स्वतः प्रकटन प्रयोग करें; अंधकार कटौती का बाजार है।
- स्वीकृति अधिकारी को भुगतान अधिकारी से अलग रखें, संवेदनशील पद घुमाएँ, और संपत्ति घोषणा जीवनशैली से मिलाएँ।
- ईमानदार टिप्पणी की रक्षा करें: मूल्यांकन तर्कसंगत ‘ना’ को पुरस्कृत करे, केवल शांत ‘हाँ’ को नहीं जो बाद में लेखापरीक्षा में फटे।
- नागरिक चार्टर, सामाजिक लेखापरीक्षा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण वहाँ बिचौलिया काटते हैं जहाँ रिसाव सबसे मोटा है।
- राजनीतिक और चुनावी धन की पारदर्शिता मायने रखती है, क्योंकि यदि पत्रावली पद के ऊपर बिके तो लोकसेवक स्वच्छ नहीं रह सकता।
नीति, केवल जाल नहीं
- सत्यनिष्ठा प्रशिक्षण व्यर्थ है यदि क्षेत्र का पहला महीना सिखाए कि कटौती सामान्य है। नेतृत्व का उदाहरण और तेज, न्यायपूर्ण जाँच साथ चलें।
- सुनवाई के बिना तकनीक नया किराया बन जाती है; रोकथाम को डिजिटल पगडंडी और मानवीय शिकायत द्वार दोनों चाहिए।
Flow diagram
flowchart TD C[भ्रष्टाचार] --> T[राजकोष रिसाव] C --> I[अक्षमता] C --> D[रुका विकास] S[प्रकटन और ई-ऑफिस] --> P[रोकथाम] L[विधि और सतर्कता] --> P
Conclusion
भ्रष्टाचार राजकोष खींचता है, कार्यालय मंद करता है, और विकास रोकता है। रोकथाम मौखिक प्रवचन कम और जाँच योग्य व्यवस्था, सुरक्षित शिकायतकर्ता, तथा शक्तिशाली को न छोड़ने वाला दंड अधिक है।
Quick related
Students also ask
-
Describe the relevance of the following in the context of civil services: (a) Ethical Governance (b) Probity in public life.
Next question in the 2021 paper (Q4). View answer →
-
क्या डिजिटलीकरण भ्रष्टाचार रोकने को काफी है?
कुछ नकद काउंटर कटता है। मिलीभगत, नकली आँकड़े और कैद विक्रेता तब तक रहते हैं जब तक लेखापरीक्षा और शिकायत चलें।
-
क्या हर विलंब भ्रष्टाचार माना जाए?
नहीं। कमी और खराब डिजाइन भी विलंब करते हैं। भ्रष्टाचार उस निर्णय या मौन की बिक्री है जो मुक्त होना चाहिए था।
समान विषय · पिछले पेपर
UPPSC ने यह पहले भी पूछा है
ये पिछले वर्षों के प्रश्न उसी विषय पर हैं। अभ्यास के लिए खोलें।
More from this paper
Q1 · UPSC Mains 2021 · UPGS4 · 8 marks · Solution
क्या वैयक्तिक नैतिकता का प्रभाव लोक-जीवन के निर्णयों पर पड़ता है?
Ethics and Human Interface
लोक निर्णयों पर व्यक्ति हस्ताक्षर करता है, इसलिए निजी ईमानदारी और संयम पत्रावली गढ़ते हैं। सत्यनिष्ठा व्यक्तिगत सद्गुण है जो बोलते आदेश में दिखे, नारे में नहीं। निजी पंथ समता, निर्वैयक्तिकता या संविधि की जगह नहीं ले सकता। आचरण नियम उस निजी दोष को दंड देते हैं जो टिप्पणी में घुसता है। अंतःकरण और कर्तव्य के टकराव में अलग होना या त्यागपत्र ईमानदार है; गुप्त वीटो नहीं।
Q2 · UPSC Mains 2021 · UPGS4 · 8 marks · Solution
महात्मा गांधी के मत के अनुसार कौन से आवश्यक सद्गुण हैं जो एक आदर्श मानवीय नैतिक व्यवहार हेतु उत्तरदायी होते हैं? विवेचना कीजिए।
Moral thinkers and philosophers
गांधी की नीति दैनिक व्रत है, भाषण नहीं। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, संयम और अभय मूल हैं। श्रम, स्वदेशी, धर्म-सम्मान और अस्पृश्यता का अंत लोक चेहरा पूरा करते हैं। व्रत एक हैं: लोभ या भय बाकी तोड़ देता है। लोकसेवक के लिए वे संविधि के अधीन सत्य टिप्पणी और अहिंसा हैं, मंच नहीं।
Q4 · UPSC Mains 2021 · UPGS4 · 8 marks · Solution
लोक सेवा के संदर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का निरूपण कीजिए: (a) नैतिक शासन (b) लोक जीवन में सत्यनिष्ठा।
Civil Service aptitude and values
नैतिक शासन आधिकारिक शक्ति का जाँच योग्य, जन-केंद्रित प्रयोग है। यह प्रासंगिक है क्योंकि लोकसेवक नीति को जिए गए हाँ या ना में बदलता है। नोलन सिद्धांत और द्वितीय एआरसी कार्य मानचित्र देते हैं। सत्यनिष्ठा खरापन है: कटौती नहीं, छिपा संघर्ष नहीं, झूठी टिप्पणी नहीं। दोनों के बिना कुशलता अधिक कुशल किराया बन जाती है।