Revision summary
लोक निर्णयों पर व्यक्ति हस्ताक्षर करता है, इसलिए निजी ईमानदारी और संयम पत्रावली गढ़ते हैं। सत्यनिष्ठा व्यक्तिगत सद्गुण है जो बोलते आदेश में दिखे, नारे में नहीं। निजी पंथ समता, निर्वैयक्तिकता या संविधि की जगह नहीं ले सकता। आचरण नियम उस निजी दोष को दंड देते हैं जो टिप्पणी में घुसता है। अंतःकरण और कर्तव्य के टकराव में अलग होना या त्यागपत्र ईमानदार है; गुप्त वीटो नहीं।
Model answer
Introduction
लोक पद निजी डायरी नहीं, फिर भी प्रत्येक पत्रावली पर व्यक्ति हस्ताक्षर करता है। वैयक्तिक नैतिकता लोक निर्णयों पर पड़ती है, क्योंकि चरित्र नियम को न्याय से चलाने की इच्छा देता है; वह अधिकारी को संविधान की जगह निजी पंथ बैठाने की छूट नहीं देता।
Body
निजी नैतिकता लोक पत्रावली तक क्यों पहुँचती है
- लोक-जीवन का निर्णय शक्ति के अधीन चुनाव है: किसे सुनें, किसे टालें, कौन-सा तथ्य लिखें। वह चुनाव केवल संविधि नहीं; वह तथ्य के प्रति अधिकारी की ईमानदारी भी है।
- वैयक्तिक नैतिकता सत्य भाषण, संयम और व्यक्ति-सम्मान का भीतरी मापदंड है। उसके बिना पूर्ण नियम भी विलंब, रिसाव या पक्षपात का औजार बन जाता है।
- द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने सत्यनिष्ठा को व्यक्तिगत सद्गुण माना जो टिप्पणी में दिखे, गणतंत्र दिवस के भाषण में नहीं।
- गांधी का साधन-साध्य एकत्व, और कांट की माँग कि व्यक्ति साध्य हो, दोनों कहते हैं कि नागरिक को मात्र उपकरण बनाने वाला लोक कर्म पहले से कर्ता की नैतिक विफलता है।
- प्रकरण: वही भूमि-अर्जन खंड बोलता आदेश या फंदा बन सकता है; अंतर अक्सर झूठ न बोलने का निजी इन्कार होता है।
सीमा: पद मंच नहीं
- लोक-जीवन विधि, समता और जाँच योग्य कारणों से बँधा है। भक्त या संयमी अधिकारी आहार, पूजा या जाति-सम्मान नागरिक पर नहीं थोप सकता।
- वेबर ने निर्वैयक्तिकता माँगी ताकि राशन कार्ड लिपिक की निजी पसंद पर न चले। यहाँ वैयक्तिक नैतिकता उस निर्वैयक्तिकता के प्रति निष्ठा है, उत्साह नहीं।
- सीसीएस आचरण नियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम उस निजी दोष को दंड देते हैं जो पत्रावली में रिसता है: उपहार, हित-संघर्ष और झूठी टिप्पणी।
- जब निजी नैतिकता और लोक कर्तव्य टकराएँ, संविधान और बोलता आदेश जीतते हैं; इस्तीफा या अलग होना ईमानदार निकास है, गुप्त वीटो नहीं।
प्रभाव, साफ शब्दों में
- वैयक्तिक नैतिकता लोक निर्णयों पर साहस, टिप्पणी में सत्य, और गलत मौखिक आदेश के इन्कार के रूप में पड़ती है।
- वह नीति को अधिकारी की रसोई से लिखने के अधिकार के रूप में नहीं पड़ती। परीक्षा यह है कि नागरिक कारण को अभी भी सार्वजनिक रूप से चुनौती दे सके।
Flow diagram
flowchart TD M[वैयक्तिक नैतिकता] --> T[टिप्पणी में सत्य] T --> D[लोक निर्णय] L[विधि और समता] --> D M --> R[अलग होना न गुप्त वीटो]
Conclusion
वैयक्तिक नैतिकता लोक निर्णयों पर पड़ती है क्योंकि प्रत्येक पत्रावली को सत्य इच्छा चाहिए। वह संविधान पर रुकनी चाहिए: निजी सद्गुण पद की सेवा करे; नागरिक का स्वामी न बने।
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क्या लोक नीति केवल नियम मानना है?
नियम फर्श हैं। वैयक्तिक नैतिकता वह इच्छा देती है जो फर्श को विलंब या पक्षपात न बनाए।
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