Revision summary
बेरोज़गारी निर्धनता का प्रमुख कारण है, एकमात्र नहीं। छिपी बेरोज़गारी और अनौपचारिक काम कार्यरत निर्धन बनाते हैं। भूमि, स्वास्थ्य आघात, जाति-लिंग अंतर और मुद्रास्फीति भी घरों को निर्धन रखती हैं। मनरेगा और कौशल नीति नौकरियों पर प्रहार करती हैं; खाद्य सुरक्षा, आवास और एमपीआई अन्य वंचनाओं पर। कथन का शब्द ‘एकमात्र’ अस्वीकार होना चाहिए।
Model answer
Introduction
भारत में निर्धनता भोजन, स्वास्थ्य, आवास और शिक्षा पर कम अधिकार है। बेरोज़गारी एक प्रमुख कारण है, किंतु एकमात्र नहीं, क्योंकि अनेक निर्धन पहले से कम उत्पादकता वाले काम में लगे हैं।
Body
बेरोज़गारी क्यों मायने रखती है, पर एकमात्र नहीं
- पीएलएफएस से मापी गई खुली बेरोज़गारी, विशेषकर शिक्षित युवाओं में, घरेलू आय सीधे काटती है और शहरी तथा स्नातक निर्धनता का वास्तविक चालक है।
- कृषि में अल्प-रोज़गार और छिपी बेरोज़गारी परिवारों को तब भी निर्धन रखती है जब वे श्रमिक गिने जाते हैं, इसलिए समस्या अक्सर शून्य काम नहीं, कम कमाई है।
- निर्माण और फुटकर व्यापार में अनुबंधहीन अनौपचारिक काम कार्यरत निर्धन पैदा करता है, जिसे यह कथन समझा नहीं सकता।
अन्य संरचनात्मक कारण
- भूमिहीनता, अत्यंत छोटे जोत और वर्षा-आधारित खेती ग्रामीण घरों को श्रम माँग वाले वर्षों में भी निर्धनता में बाँधती हैं, इसलिए सूखा और 2015–16 के कृषि तनाव ने बिना एकमात्र बेरोज़गारी उछाल के वंचना बढ़ाई।
- स्वास्थ्य आघात, जेब से अस्पताल खर्च और खराब स्वच्छता मजदूरी कमाने के बाद भी निर्धनता दोहराते हैं; राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और आयुष्मान भारत इसी परत को छूते हैं, केवल नौकरियों को नहीं।
- एनएफएचएस और एनएसएस खपत में दर्ज जाति, लिंग और क्षेत्रीय संपत्ति-शिक्षा अंतर का अर्थ है कि दो श्रमिक समान रूप से निर्धनता से नहीं निकलते।
- भोजन और किराए की मुद्रास्फीति रोजगार स्थिर रहने पर भी घरों को निर्धनता रेखा से नीचे धकेल सकती है।
टिप्पणी का नीति निहितार्थ
- मनरेगा, 2005, एनआरएलएम, कौशल मिशन और पीएलएफएस आधारित रोजगार लक्ष्य बेरोज़गारी और अल्प-कार्य पर प्रहार करते हैं।
- नीति आयोग का बहुआयामी निर्धनता सूचकांक पोषण, आवास और ईंधन गिनता है, जो बेकार होता यदि बेरोज़गारी एकमात्र कारण होती।
Flow diagram
flowchart TD U[बेरोज़गारी अल्पकार्य] --> P[निर्धनता] L[भूमि स्वास्थ्य जाति मुद्रास्फीति] --> P W[कार्यरत निर्धन अनौपचारिक] --> P
Conclusion
कथन अत्यंत संकीर्ण है। बेरोज़गारी और अल्प-रोज़गार केंद्र हैं, किंतु भूमि, स्वास्थ्य, जाति, लिंग और मुद्रास्फीति भी भारत की व्याप्त निर्धनता पैदा करते हैं। न्यायसंगत टिप्पणी इसलिए ‘एकमात्र’ अस्वीकार करती है और नौकरियों को आवश्यक, पर्याप्त नहीं, उपचार रखती है।
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यदि सभी के पास नौकरी हो तो क्या निर्धनता समाप्त हो जाएगी?
अकेले नहीं। कम मजदूरी, अनौपचारिक और अवैतनिक पारिवारिक काम लोगों को निर्धन छोड़ सकते हैं। संपत्ति, स्वास्थ्य और कीमतें अभी मायने रखती हैं।
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क्या छिपी बेरोज़गारी खुली बेरोज़गारी के समान है?
नहीं। खुली बेरोज़गारी काम का अभाव है। छिपी बेरोज़गारी खेत या दुकान पर अतिरिक्त श्रम है जिसे हटाने से उत्पादन नहीं घटता।
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