Q2 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2023 · GS I · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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आधुनिक शिक्षा में सर सैयद अहमद खान के योगदान पर एक टिप्पणी लिखिए।

विषय: Modern Indian history. पाठ्यक्रम: Modern Indian history from A.D. 1757 to A.D. 1947 — significant events, personalities and issues. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2023 और Modern Indian history से।

Revision summary

सर सैयद ने 1857 के बाद मुस्लिम पुनर्प्राप्ति का केंद्र आधुनिक शिक्षा बनाया। वैज्ञानिक सोसाइटी (1864) ने पश्चिमी विद्या का उर्दू अनुवाद किया। एमएओ कॉलेज (1875) 1920 में एएमयू बना और अंग्रेजी-शिक्षित अभिजात तैयार किया। तहजीब-उल-अखलाक और 1886 का शिक्षा सम्मेलन अलीगढ़ कार्यक्रम फैलाते हैं। सीमा अभिजात कॉलेज शिक्षा है, जन प्राथमिक शिक्षा नहीं।

Model answer

Introduction

सर सैयद अहमद खान (1817–1898) ने आधुनिक शिक्षा को 1857 के बाद भारतीय मुसलमानों की पुनर्प्राप्ति का मार्ग माना। योगदान की टिप्पणी में वैज्ञानिक सोसाइटी, अलीगढ़ कॉलेज और शिक्षा सम्मेलन आने चाहिए, केवल राजनीति नहीं।

Body

उनके द्वारा स्थापित संस्थाएँ

  • वैज्ञानिक सोसाइटी, 1864 में गाजीपुर में आरंभ और अलीगढ़ स्थानांतरित, पश्चिमी विज्ञान और इतिहास का उर्दू अनुवाद करती थी ताकि अंग्रेजी विद्या एक भाषा के पीछे बंद न रहे।
  • मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज, 1875 में अलीगढ़ में अंग्रेजी आवासीय कॉलेज की तर्ज पर खुला, उनकी मृत्यु के बाद 1920 के अधिनियम से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।
  • अखिल भारतीय मुहम्मदन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस, पहली बार 1886 में, अंग्रेजी, विज्ञान और निष्ठापूर्ण लोक सेवा के उसी कार्यक्रम को एक परिसर से आगे ले गई।

शैक्षिक कार्यक्रम की विषयवस्तु

  • सर सैयद ने कहा कि कुरआनी विद्या और आधुनिक विज्ञान साथ रह सकते हैं, और तहजीब-उल-अखलाक पत्रिका से सामाजिक जड़ता पर प्रहार कर पश्चिमी शिक्षा की प्रशंसा की।
  • वे मुसलमानों को औपनिवेशिक सेवाओं और व्यवसायों में चाहते थे, इसलिए कॉलेज ने अंग्रेजी, गणित और प्राकृतिक विज्ञान को इस्लामी शिक्षण से जोड़ा।
  • अलीगढ़ आंदोलन ने इसलिए एक आधुनिक मुस्लिम मध्य वर्ग बनाया; वह गरीबों की जन प्राथमिक शिक्षा नहीं बनाता, जो योगदान की सीमा है।

उन्नीसवीं सदी के सुधार में स्थान

  • 1857 के बाद उन्होंने असबाब-ए-बगावत-ए-हिंद लिखा और बाद में ब्रिटिश सद्भाव चाहा, क्योंकि उन्होंने आंका कि टकराव स्कूल और नौकरियाँ बंद कर देगा।
  • उनका शैक्षिक कार्य शताब्दी के अन्य देशी-आधुनिक प्रयोगों के साथ खड़ा है, किंतु अलीगढ़ उस कार्यक्रम का सबसे टिकाऊ मुस्लिम परिसर बना।

Flow diagram

flowchart TD
  S[सर सैयद] --> C[वैज्ञानिक सोसाइटी 1864]
  S --> M[एमएओ कॉलेज 1875]
  M --> U[एएमयू 1920]
  S --> T[तहजीब सम्मेलन]

Conclusion

आधुनिक शिक्षा में सर सैयद का योगदान वैज्ञानिक सोसाइटी, एमएओ कॉलेज (बाद में एएमयू), तहजीब-उल-अखलाक और एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस है। उन्होंने मुस्लिम अभिजात के लिए अंग्रेजी और विज्ञान खोले; जन साक्षरता उनकी उपलब्धि नहीं, और 8 अंक की टिप्पणी का यही न्यायसंगत अंत है।

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  • क्या सर सैयद ने जीवनकाल में एएमयू स्थापित किया?

    नहीं। उन्होंने 1875 में एमएओ कॉलेज स्थापित किया। एएमयू 1920 के अधिनियम से बना, मृत्यु के बाईस वर्ष बाद।

  • क्या उनका कार्य केवल धार्मिक था?

    नहीं। कॉलेज अंग्रेजी, गणित और विज्ञान इस्लामी शिक्षण के साथ पढ़ाता था। उद्देश्य आस्था के साथ आधुनिक लोक रोजगार भी था।

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