Revision summary
आईटी और इंटरनेट डीबीटी, यूपीआई, सीएससी, शिक्षा मंच और टेलीमेडिसिन से द्वारपाल काटते हैं। वे वंचित समूहों को सार्वजनिक आवाज भी देते हैं। डिजिटल विभाजन, बायोमेट्रिक विफलता और मंच क्षति सशक्तिकरण सीमित करते हैं। भूमिका स्थानीय भाषा, कनेक्टिविटी और मानव विकल्प के साथ सबसे मजबूत है। आईटी सशक्तिकरण का उपकरण है, स्कूल और चिकित्सालय का विकल्प नहीं।
Model answer
Introduction
सूचना प्रौद्योगिकी और इंटरनेट तब सशक्त करते हैं जब धन, ज्ञान, आवाज और सार्वजनिक सेवाओं के द्वारपाल कटते हैं। मूल्यांकन में जेएएम-शैली वितरण और ऑनलाइन आवाज को डिजिटल विभाजन के विरुद्ध तौलना चाहिए, इसलिए भूमिका वास्तविक किंतु अधूरी है।
Body
सामाजिक सशक्तिकरण के लाभ
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, आधार-सीड खाते और यूपीआई मजदूरी, पेंशन और छात्रवृत्ति में बिचौलिया घटाते हैं, जो गरीब के लिए भौतिक सशक्तिकरण है यदि बहिष्करण सुधारे जाएँ।
- कॉमन सर्विस सेंटर, उमंग और राज्य पोर्टल प्रमाणपत्र, शिकायत और कल्याण गाँव तक ले जाते हैं, इसलिए तहसील की दूरी जाति-वर्ग दीवार कम रहती है।
- ऑनलाइन कक्षा, दीक्षा और मुक्त संसाधन उन लोगों के लिए शिक्षा और कौशल फैलाते हैं जिनके पास उपकरण और भाषा सहारा है।
- टेलीमेडिसिन, ई-संजीवनी और स्वास्थ्य अभिलेख उन स्त्रियों और दूरस्थ रोगियों तक पहुँच सकते हैं जो यात्रा नहीं कर सकते।
- सोशल मीडिया और आरटीआई से जुड़े मंच दलित, स्त्री और निशक्त समूहों को वह सार्वजनिक आवाज देते हैं जो पुराना मुद्रण अक्सर नकारता था।
मूल्यांकन की सीमाएँ
- उपकरण, डेटा, बिजली और अंग्रेजी या हिंदी साक्षरता अभी स्त्रियों, वृद्धों और सबसे निर्धनों को बाहर रखती हैं, इसलिए आईटी उसी सोपान को दोहरा सकता है जिसे समतल करने का दावा करता है।
- निगरानी, फर्जी खबर और मंच घृणा उन्हीं समूहों को कमजोर कर सकती है जो आवाज के लिए नेट प्रयोग करते हैं।
- लॉगिन विफलता और बायोमेट्रिक त्रुटि नया सशक्तिकरण-हरण बन जाती है जब कल्याण केवल डिजिटल हो।
- इसलिए सशक्तिकरण वहाँ सबसे अधिक है जहाँ कनेक्टिविटी, स्थानीय भाषा और मानव विकल्प साथ हों, न कि जहाँ इंटरनेट स्कूल, चिकित्सालय और पंचायत का विकल्प माना जाए।
Flow diagram
flowchart TD I[आईटी और इंटरनेट] --> C[डीबीटी यूपीआई सीएससी] I --> V[आवाज शिक्षा स्वास्थ्य] C --> E[सामाजिक सशक्तिकरण] V --> E D[डिजिटल विभाजन त्रुटि] --> E
Conclusion
आईटी और इंटरनेट नकद, सेवा, शिक्षा और आवाज तक सस्ती पहुँच से सशक्त करते हैं। मूल्यांकन मिश्रित है: लिंग और ग्रामीण डिजिटल विभाजन बंद किए बिना, और मानव विकल्प के बिना, वे कमजोर को राज्य से बाहर भी कर सकते हैं।
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क्या इंटरनेट स्वतः गरीब को सशक्त करता है?
नहीं। जब नकद, सेवा और आवाज वास्तव में पहुँचें तभी सशक्तिकरण है। बहिष्करण त्रुटि और उपकरणहीनता सशक्तिकरण छीन सकती हैं।
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क्या सोशल मीडिया सामाजिक सशक्तिकरण के समान है?
वह आवाज बढ़ा सकता है, किंतु घृणा, अफवाह और निगरानी लाभ उलट सकते हैं; सेवा वितरण कठिन परीक्षा है।
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