Revision summary
सदी के मध्य के बाद मृत्यु जन्म से तेज गिरी, जिससे भारत का जनसंख्या विस्फोट बना। युवा आयु संरचना का संवेग प्रजनन गिरने पर भी जारी रहता है। शीघ्र विवाह, पुत्र प्राथमिकता और कमजोर गर्भनिरोध ने निर्धन पट्टी में जन्म ऊँचे रखे। उपाय कन्या शिक्षा, अंतराल, स्त्री श्रम और गुणवत्तापूर्ण परिवार कल्याण हैं। दबावपूर्ण नसबंदी लक्ष्य टिकाऊ हल नहीं है।
Model answer
Introduction
भारत में जनसंख्या विस्फोट वह लंबा चरण है जिसमें मृत्यु दर जन्म दर से तेज गिरी, इसलिए 1951 के बाद संख्या तेजी बढ़ी। कारण जनसांख्यिकीय और सामाजिक हैं; उपाय बिना अत्यधिक दबाव के प्रजनन धीमा करें, और 8 अंक के उत्तर में दोनों आधे रहने चाहिए।
Body
कारण
- टीका, एंटीबायोटिक और खाद्य सुरक्षा से मृत्यु दर गिरी, जबकि जन्म दर ऊँची रही, जिससे द्वितीय जनसांख्यिकीय संक्रमण चरण का शास्त्रीय विस्फोट बना।
- युवा आयु संरचना संभावित माता-पिता की संख्या ऊँची रखती है, भले कुल प्रजनन दर गिरने लगे, इसलिए वृद्धि में संवेग है।
- शीघ्र विवाह, पुत्र प्राथमिकता, और सीमित स्त्री शिक्षा तथा वेतन श्रम निर्धन जनपदों में ऊँचा प्रजनन बनाए रखते हैं।
- जन्मों के बीच कम अंतराल और गर्भनिरोध तक असमान पहुँच, विशेषकर उत्तर प्रदेश सहित हिंदी क्षेत्र के भागों में, प्रजनन गिरावट को विलंबित करती रही।
- निर्धनता और अनौपचारिक श्रम बच्चों को वृद्धावस्था और कृषि श्रम का सहारा बनाते हैं, इसलिए कारण केवल “जागरूकता का अभाव” नहीं है।
सुझाव
- कानून के साथ व्यवहार में विवाह आयु बढ़ाएँ, कन्या माध्यमिक शिक्षा और प्रथम जन्म विलंब से।
- अंतराल विधियाँ, प्रसवोत्तर गर्भनिरोध, और उच्च प्रजनन जनपदों पर मिशन परिवार विकास जैसी एकाग्रता बढ़ाएँ, पुरुष भागीदारी के साथ।
- स्त्रियों के वेतन श्रम, संपत्ति और स्वास्थ्य बीमा को छोटे वांछित परिवार से जोड़ें।
- शहरी आवास, पोषण और बाल उत्तरजीविता मजबूत रहें ताकि माता-पिता बीमा के रूप में अतिरिक्त जन्म न माँगें।
- नसबंदी लक्ष्य को एकमात्र उपकरण न बनाएँ; देखभाल की गुणवत्ता और स्त्री सहमति टिकाऊ पथ हैं।
Flow diagram
flowchart TD D[गिरती मृत्यु दर] --> E[जनसंख्या विस्फोट] Y[युवा आयु संरचना] --> E S[शीघ्र विवाह पुत्र प्राथमिकता] --> E E --> R[शिक्षा अंतराल स्त्री श्रम]
Conclusion
भारत का जनसंख्या विस्फोट गिरती मृत्यु, युवा आयु संरचना, शीघ्र विवाह और असमान गर्भनिरोध से आया। इससे निपटने के लिए कन्या शिक्षा, अंतराल, स्त्री श्रम और जनपद-केंद्रित परिवार कल्याण चाहिए, आतंक या एक-विधि दबाव नहीं।
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क्या भारत विस्फोट चरण छोड़ चुका है?
1971-91 से प्रजनन बहुत गिर चुका है, किंतु संवेग और असमान राज्य दरों से निरपेक्ष संख्या अभी बढ़ती है।
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क्या दो-संतान कानून मुख्य सुझाव है?
बिना शिक्षा, अंतराल और स्त्री श्रम के कानून दबाव दोहराता है। गुणवत्ता सेवा और विलंबित विवाह बेहतर 8 अंक पंक्ति हैं।
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