Revision summary
झुग्गियों में जल, स्वच्छता, नाली, प्रकाश और भूधृति की कमी है, केवल कानूनी हक की नहीं। नियोजन को यथास्थान उन्नयन और अंतिम-मील नागरिक नेटवर्क जोड़ना चाहिए। पीएमएवाई-यू, राजीव आवास का स्लम-फ्री विचार, एसबीएम-यू और एनयूएलएम योजना परत हैं। 74वाँ संशोधन इसे नगरपालिका कर्तव्य बनाता है, केवल राज्य आवास परियोजना नहीं। रोजगार रहित दूर पुनर्वास सुविधा विकास नहीं है।
Model answer
Introduction
झुग्गियाँ जल, शौचालय, नाली, प्रकाश और सुरक्षित भूधृति से वंचित घनी अनौपचारिक बस्तियाँ हैं, केवल अवैध झोपड़ियाँ नहीं। नगर-नियोजन यह सार्वजनिक निर्णय है कि सेवाएँ कहाँ जाएँगी, बस्ती यथास्थान उठेगी, या परिवार आजीविका के बिना दूर प्लॉट पर सरकेंगे।
Body
भूधृति, अभिन्यास और यथास्थान सेवाएँ
- मूलभूत नागरिक सुविधाएँ — पाइप जल, घरेलू या सामुदायिक शौचालय, वर्षा नालियाँ, पक्की गलियाँ, स्ट्रीट लाइट, ठोस अपशिष्ट संग्रह, तथा क्लिनिक या आंगनवाड़ी — तब असफल होती हैं जब झुग्गी को जिए गए वार्ड की बजाय मास्टर प्लान पर खाली धब्बा माना जाता है।
- यथास्थान झुग्गी पुनर्विकास और क्रमिक उन्नयन लोगों को काम के पास रखता है; परिवहन और रोजगार रहित दूर पुनर्वास केवल गरीबी सरकाता है, जैसा कई भारतीय नगर परियोजनाएँ दिखा चुकी हैं।
- पूर्ण स्वामित्व से कम सही, सुरक्षित भूधृति या अध्यासन अधिकार शौचालय और तार में घरेलू निवेश खोलते हैं; स्लम-फ्री सिटी का राजीव आवास विचार और पीएमएवाई-शहरी यथास्थान पुनर्विकास उसी नियोजन तर्क पर टिके हैं।
- प्लॉट अभिन्यास, अग्नि अंतराल और अंतिम-मील नालियाँ अभियांत्रिकी हैं; उन्हें फिर भी अधिसूचित लेआउट या टाउन प्लानिंग स्कीम चाहिए ताकि नगरपालिका दल कानूनी रूप से प्रवेश कर सकें।
संस्थाएँ और सीमाएँ
- 74वें संविधान संशोधन (1992) जल, स्वच्छता और झुग्गी सुधार को नगरपालिका सूची पर रखता है; राज्य नगर-नियोजन अधिनियम, भवन उपविधियाँ और स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम (2014) तय करते हैं कि अनौपचारिक काम नियोजित होगा या झाड़ दिया जाएगा।
- राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी शौचालय, सीवर और आजीविका जोड़ते हैं, किंतु नियोजन वहाँ असफल होता है जहाँ भूमि कब्जा हो, ठेकेदार नाली छोड़ दें, या ‘पुनर्वास’ केवल ऊँची इमारत हो बिना सबसे गरीब के लिए किराया आपूर्ति।
- जलवायु-तैयार झुग्गी नियोजन अब ऊँचे प्लिंथ, ऊष्मा आश्रय और निकासी आउटफॉल शामिल करता है, क्योंकि गंगा मैदान के उत्तर प्रदेश नगरों में नागरिक सुविधा बाढ़ और गर्मी सुरक्षा भी है।
- इसलिए टिप्पणी को नियोजन को मानचित्र, भूधृति, वित्त और रखरखाव साथ मानना चाहिए, रंगीन जोनल मानचित्र नहीं जो बस्ती अनदेखी करे।
Flow diagram
flowchart TD P[नगर नियोजन] --> T[भूधृति अभिन्यास अधिकार] P --> A[जल शौचालय नाली प्रकाश कचरा] T --> I[यथास्थान उन्नयन] A --> I I --> L[आजीविकाएँ रहती हैं] R[दूर फेंक पुनर्वास] --> F[सुविधा विफलता]
Conclusion
नगर-नियोजन झुग्गी सुविधाएँ तब विकसित करता है जब स्थान नियमित करे, यथास्थान जल-स्वच्छता-निकासी को निधि दे, और आजीविकाएँ अक्षुण्ण रखे। भूधृति और नगरपालिका रखरखाव के बिना योजनाएँ एकबारगी कंक्रीट बनती हैं, नागरिक जीवन नहीं।
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क्या तोड़-पुनर्निर्माण एकमात्र नियोजन औजार है?
नहीं। जल, शौचालय और नाली का क्रमिक यथास्थान उन्नयन अक्सर सबसे गरीब की बिना किराया सहारे की दूर ऊँची इमारत से बेहतर सेवा करता है।
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क्या मास्टर प्लान अकेले झुग्गियाँ सुधारता है?
नहीं यदि बस्ती ‘अनधिकृत’ और सेवा-रहित छोड़ दी जाए। सुविधाओं को पाइपों का कानूनी मार्ग और रखरखाव बजट चाहिए।
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