Q14 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2025 · GS V (UP) · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक जीवन में बिरहा और कजरी लोकगीतों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

विषय: UP society, festivals and languages. पाठ्यक्रम: Rural, Urban and Tribal issues — social structure, festivals, fairs, music, folk dances, literature and languages/dialects, social customs of UP. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2025 और UP society, festivals and languages से।

Revision summary

बिरहा अवध और पूर्वांचल का विरह गीत है, ऐतिहासिक रूप से ग्वालों में मजबूत। कजरी मिर्जापुर, बनारस और बुंदेलखंड का सावन वर्षा गीत है। दोनों अभी भी मेले, विवाह और रात सभा में चलते हैं। बिरहा सामाजिक जीवन पर व्यंग्य करता है; कजरी स्त्रियों की सावन प्रतीक्षा गाती है। वे ध्वनि में उत्तर प्रदेश के दो आंतरिक क्षेत्रों का मानचित्र बनाते हैं।

Model answer

Introduction

बिरहा और कजरी उत्तर प्रदेश के जीवित लोकगीत हैं, संग्रहालय वस्तु नहीं। उनका महत्व यह है कि वे अभी भी अवध, पूर्वांचल, मिर्जापुर और बुंदेलखंड में श्रम, सावन और विरह चिह्नित करते हैं।

Body

बिरहा

  • विरह से निकला बिरहा विछोह का गीत है, पारंपरिक रूप से अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अहीर-यादव ग्वालों में मजबूत।
  • खरी और अन्य बिरहा रूप मुख्य गायक और सहयोगी दल रखते हैं, अक्सर नगाड़ा या ढोलक के साथ, रात सभा और मेले में।
  • गीत पशु मार्ग, जाति मान, प्रेम और सामाजिक व्यंग्य लाता है, इसलिए वह ग्रामीण अखबार भी है, केवल राग नहीं।
  • हीरालाल यादव जैसे गायकों ने बिरहा को गाँव अखाड़े से सार्वजनिक मंच पर लिया बिना पूर्वांचल बोली छोड़े।

कजरी

  • कजरी या कजली सावन का वर्षा गीत है, मिर्जापुर–बनारस पट्टी में सबसे मजबूत और बुंदेलखंड में भी सुना जाता है।
  • झूले, बादल और अनुपस्थित पति पर स्त्रियों का गायन कजरी को प्रतीक्षा और पूर्वी पठार की मौसमी आवाज बनाता है।
  • मिर्जापुर कजरी नामित स्थानीय स्कूल है; बनारस घराना ठुमरी ने कजरी को लघु-शास्त्रीय सहोदर के रूप में भी लिया।
  • मंदिर और रेडियो ने कुछ विकासखंडों में फसल श्रम घटने के बाद रूप को सार्वजनिक रखा।

सांस्कृतिक जीवन में महत्व

  • दोनों विधाएँ यूपी के आंतरिक सांस्कृतिक भूगोल का मानचित्र बनाती हैं: बिरहा अवध–पूर्वांचल ग्वाली मैदान के लिए, कजरी मिर्जापुर–बुंदेलखंड वर्षा के लिए।
  • वे बिना स्कूल भाषा, लिंग भूमिका और मौसम सिखाते हैं, इसलिए पॉप संगीत की होड़ में भी सांस्कृतिक जीवन में केंद्रीय हैं।
  • त्योहार, विवाह और राजनीतिक सभाएँ अभी भी उनकी धुन उधार लेती हैं, इसलिए यहाँ लोकगीत घरेलू के साथ नागरिक भी है।

Flow diagram

flowchart TD
  B[बिरहा] --> A[अवध पूर्वांचल]
  K[कजरी] --> M[मिर्जापुर बुंदेलखंड]
  A --> C[यूपी सांस्कृतिक जीवन]
  M --> C

Conclusion

बिरहा विरह और पशु जीवन के गीतों से अवध तथा पूर्वांचल को बाँधता है; कजरी सावन से मिर्जापुर तथा बुंदेलखंड को बाँधती है। यूपी सांस्कृतिक जीवन में उनका महत्व यह है कि वे अभी भी मौसम और अपनी पहचान को देशी भाषा में चलाते हैं।

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  • क्या बिरहा और कजरी एक ही गीत हैं?

    नहीं। बिरहा मुख्यतः अवध–पूर्वांचल का मैदानी विरह-कथा रूप है। कजरी मिर्जापुर–बुंदेलखंड का वर्षा गीत है।

  • क्या वे दैनिक संस्कृति में अभी मायने रखते हैं?

    हाँ। वे मेले, सावन और विवाह में गाए जाते हैं, और रेडियो तथा राजनीति में उनकी धुन दोहराई जाती है।

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