Q1 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2024 · GS V (UP) · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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प्राचीन भारत में ‘प्रयागराज’ के सांस्कृतिक महत्व का वर्णन कीजिए।

विषय: UP history, civilisation and culture. पाठ्यक्रम: History, Civilisation, Culture and Ancient Cities of UP. Architecture, museums, archives and archaeology of UP. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2024 और UP history, civilisation and culture से।

Revision summary

प्राचीन प्रयाग आज के प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में गंगा–यमुना संगम है। पौराणिक माहात्म्य और महाभारत इसे अक्षयवट वाला मोक्ष तीर्थ बनाते हैं। कौशाम्बी और अशोक स्तंभ पट्टी को मगध और वत्स शक्ति से जोड़ते हैं। ह्वेनसांग संगम पर हर्ष की दान-सभाएँ लिखता है। स्थल साझा पवित्र और राजकीय भूगोल है, केवल बाद का नगर नाम नहीं।

Model answer

Introduction

गंगा–यमुना संगम पर स्थित प्राचीन प्रयाग, आज के प्रयागराज जनपद, उत्तर प्रदेश में तीर्थ, राजसभा-भूमि और मध्य गंगा जगत का चिह्न था। वर्णन वैदिक, महाकाव्य, पौराणिक और यात्री स्मृति पर टिकना चाहिए, बाद के औपनिवेशिक नाम पर नहीं।

Body

तीर्थ और पवित्र भूगोल

  • वैदिक और बाद की ब्राह्मण परतें गंगा–यमुना मिलन को पवित्र संगम मानती हैं; पुराण इसे प्रयाग कहते हैं और अदृश्य सरस्वती जोड़ते हैं, जिससे त्रिवेणी स्थल का पहला सांस्कृतिक तथ्य बनी।
  • महाभारत तथा मत्स्य और पद्म पुराण की प्रयाग माहात्म्य धाराएँ अक्षयवट, संध्या स्नान और संगम पर भूमि-दान गिनती हैं, इसलिए तीर्थ, दान और मोक्ष एक ही नदी-कगार पर बैठे।
  • प्रयाग काशी और अयोध्या के साथ मोक्षपुरियों में आया, जिससे उत्तर प्रदेश के तीन पवित्र नगर एक पौराणिक मानचित्र में बँधे।

राजधर्म, स्तंभ और सभा

  • निकट कौशाम्बी, वत्स की राजधानी, और बाद में इलाहाबाद किले में लाया गया अशोक स्तंभ दिखाते हैं कि संगम पट्टी मगध और गुप्त साम्राज्य का भी स्टेशन थी।
  • चीनी यात्री स्मृति, विशेषकर ह्वेनसांग, हर्षवर्धन की प्रयाग में पंचवर्षीय महादान सभाएँ लिखती है, जहाँ कन्नौज नरेश संगम पर कोश बाँटता था—इसलिए स्थल केवल निजी तीर्थ नहीं, धर्म-राज का रंगमंच था।
  • बौद्ध और जैन मार्ग उसी गंगा गलियारे का उपयोग करते थे; काशी, सारनाथ और कौशाम्बी ने प्रयाग को चौराहा बनाया, एकाकी मंदिर नहीं।

सांस्कृतिक अर्थ

  • इसलिए प्राचीन भारत ने प्रयागराज को नदियों, ग्रंथों और दरबारों के संगम के रूप में याद किया: जहाँ स्नान, दान और राजसभा एक ही रेत पर दावा कर सकें।

Flow diagram

flowchart TD
  S[त्रिवेणी संगम] --> T[पौराणिक तीर्थ]
  S --> K[हर्ष सभा]
  P[प्रयाग माहात्म्य] --> T
  Kaush[कौशाम्बी मगध] --> C[गंगा गलियारा]
  T[T] --> C[C]

Conclusion

पौराणिक माहात्म्य, महाकाव्य भूगोल, वत्स–मगध गलियारा और हर्ष की सभाओं के आधार पर प्राचीन प्रयाग उत्तर प्रदेश की त्रिवेणी तीर्थ और गंगा राजधर्म के सार्वजनिक मंच के रूप में सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

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  • क्या प्राचीन प्रयाग केवल हिंदू तीर्थ है?

    वह पहले पौराणिक तीर्थ है, किंतु बौद्ध–जैन गंगा मार्गों पर भी बैठा और हर्ष की सार्वजनिक सभाओं का स्थल रहा।

  • अक्षयवट क्या है?

    प्रयाग के माहात्म्य में याद किया गया अविनाशी बरगद, जिसने संगम कगार पर तीर्थ को बाँधा।

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