Q2 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2023 · GS V (UP) · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दलों की प्रकृति की विवेचना कीजिए। राज्य राजनीति में उनके महत्व पर प्रकाश डालिए।

विषय: Public service and constitutional bodies in UP. पाठ्यक्रम: Public Service, Public Service Commission, Auditing, Advocate General, High Court and its jurisdiction in UP. Special State Selection Criteria, Official Language, Consolidated Fund and Contingency Fund, Political Parties and State Election Commission of UP. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2023 और Public service and constitutional bodies in UP से।

Revision summary

यूपी क्षेत्रीय दल राज्य-मुखी सामाजिक गठबंधन हैं, राष्ट्रीय विचारधारा की पतली प्रति नहीं। सपा, बसपा और आरएलडी मुख्य प्रकार हैं; छोटे जाति दल सहयोगी बनते हैं। उन्होंने 1990 से 2012 तक राज्य चलाया और अभी विपक्ष गढ़ते हैं। महत्व विधानसभा अंकगणित, सामाजिक न्याय भाषा और संघीय सौदा है। नेता-केंद्रित संगठन शक्ति और सीमा दोनों है।

Model answer

Introduction

1980 के दशक के अंत के बाद उत्तर प्रदेश राजनीति उन दलों के इर्द-गिर्द बनी जो राष्ट्रीय घोषणापत्र से अधिक क्षेत्र, जाति समूह और नेता बोलते हैं। प्रकृति और महत्व एसपी, बसपा, आरएलडी और छोटे सामाजिक दलों पर टिकना चाहिए।

Body

प्रकृति

  • यहाँ क्षेत्रीय दल राज्य-जन्म और राज्य-मुखी हैं: अवध–पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी (1992), दलित पट्टी में बहुजन समाज पार्टी (1984), और ऊपरी दोआब की जाट–पश्चिमी यूपी पट्टी में राष्ट्रीय लोक दल।
  • वे नेता-केंद्रित सामाजिक-गठबंधन मशीन हैं—एसपी के लिए यादव–मुस्लिम, बसपा के लिए जाटव-प्लस-बहुजन, आरएलडी के लिए जाट-किसान—काडर-वैचारिक दलों से अधिक।
  • अपना दल (कुर्मी), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (राजभर) और निषाद पार्टी जैसी छोटी इकाइयाँ उसी प्रकृति को संकरे जाति-क्षेत्र पैमाने पर दिखाती हैं और प्रायः गठबंधन साथी के रूप में जीती हैं।
  • चुनाव मौसम के बाहर संगठन पतला है; विचारधारा सामाजिक न्याय या किसान हित है; जीवित रहने की इकाई 403 सीटों का विधानसभा अंकगणित है।

राज्य राजनीति में महत्व

  • मंडल वर्षों से 2012 तक वे हाशिए नहीं थे: उन्होंने सरकारें बनाईं, आरक्षण और कल्याण की भाषा तय की, और राष्ट्रीय दलों को लखनऊ में सौदा करने को बाध्य किया।
  • 2007 में मायावती के अधीन बसपा का बहुमत दिखाया कि एक क्षेत्रीय सामाजिक दल अकेला यूपी चला सकता है; 2012 सहित सपा सरकारों ने पिछड़ा-मुस्लिम गठबंधन के लिए वही दिखाया।
  • 2017 के बाद भी, जब एक राष्ट्रीय दल विधानसभा ले गया, सपा और बसपा मुख्य विपक्षी वोट बैंक रहे, और छोटे क्षेत्रीय दलों ने पश्चिम और पूर्व में सीट-बँटवारा तय किया।
  • वे यूपी को संघीय बनाते हैं: किसान, कानून-व्यवस्था और जाति जनगणना की राज्य माँगें दिल्ली गठबंधनों में ले जाते हैं, और स्थानीय प्रभावशाली लोगों को केवल निर्दलीय नहीं, पार्टी टिकट के अंदर रखते हैं।

सीमा

  • व्यक्तित्व पंथ, बदलते गठबंधन और कमजोर आंतरिक लोकतंत्र उसी प्रकृति का हिस्सा हैं; किसी दशक में महत्व सिकुड़ सकता है जब राष्ट्रीय लहर सामाजिक गठबंधन निगल ले।

Flow diagram

flowchart TD
  C[जाति क्षेत्र नेता] --> SP[सपा अवध]
  C --> BSP[बसपा दलित पट्टी]
  C --> RLD[आरएलडी पश्चिमी यूपी]
  SP --> Asm[403 सीट अंकगणित]
  BSP[BSP] --> Asm[Asm]
  RLD[RLD] --> Asm[Asm]

Conclusion

उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दल जाति-क्षेत्र और नेता-केंद्रित राज्य दल हैं। उनका महत्व यह है कि उन्होंने लखनऊ चलाया, सामाजिक गठबंधन गढ़े, और कुर्सी न होने पर भी विपक्ष तथा गठबंधन का गणित अभी तय करते हैं।

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  • क्या क्षेत्रीय दलों ने अकेले यूपी चलाया?

    हाँ। 2007 में बसपा को बहुमत मिला; सपा भी केवल राष्ट्रीय दल की उपग्रह सरकार नहीं रही।

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