Revision summary
यूपी क्षेत्रीय दल राज्य-मुखी सामाजिक गठबंधन हैं, राष्ट्रीय विचारधारा की पतली प्रति नहीं। सपा, बसपा और आरएलडी मुख्य प्रकार हैं; छोटे जाति दल सहयोगी बनते हैं। उन्होंने 1990 से 2012 तक राज्य चलाया और अभी विपक्ष गढ़ते हैं। महत्व विधानसभा अंकगणित, सामाजिक न्याय भाषा और संघीय सौदा है। नेता-केंद्रित संगठन शक्ति और सीमा दोनों है।
Model answer
Introduction
1980 के दशक के अंत के बाद उत्तर प्रदेश राजनीति उन दलों के इर्द-गिर्द बनी जो राष्ट्रीय घोषणापत्र से अधिक क्षेत्र, जाति समूह और नेता बोलते हैं। प्रकृति और महत्व एसपी, बसपा, आरएलडी और छोटे सामाजिक दलों पर टिकना चाहिए।
Body
प्रकृति
- यहाँ क्षेत्रीय दल राज्य-जन्म और राज्य-मुखी हैं: अवध–पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी (1992), दलित पट्टी में बहुजन समाज पार्टी (1984), और ऊपरी दोआब की जाट–पश्चिमी यूपी पट्टी में राष्ट्रीय लोक दल।
- वे नेता-केंद्रित सामाजिक-गठबंधन मशीन हैं—एसपी के लिए यादव–मुस्लिम, बसपा के लिए जाटव-प्लस-बहुजन, आरएलडी के लिए जाट-किसान—काडर-वैचारिक दलों से अधिक।
- अपना दल (कुर्मी), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (राजभर) और निषाद पार्टी जैसी छोटी इकाइयाँ उसी प्रकृति को संकरे जाति-क्षेत्र पैमाने पर दिखाती हैं और प्रायः गठबंधन साथी के रूप में जीती हैं।
- चुनाव मौसम के बाहर संगठन पतला है; विचारधारा सामाजिक न्याय या किसान हित है; जीवित रहने की इकाई 403 सीटों का विधानसभा अंकगणित है।
राज्य राजनीति में महत्व
- मंडल वर्षों से 2012 तक वे हाशिए नहीं थे: उन्होंने सरकारें बनाईं, आरक्षण और कल्याण की भाषा तय की, और राष्ट्रीय दलों को लखनऊ में सौदा करने को बाध्य किया।
- 2007 में मायावती के अधीन बसपा का बहुमत दिखाया कि एक क्षेत्रीय सामाजिक दल अकेला यूपी चला सकता है; 2012 सहित सपा सरकारों ने पिछड़ा-मुस्लिम गठबंधन के लिए वही दिखाया।
- 2017 के बाद भी, जब एक राष्ट्रीय दल विधानसभा ले गया, सपा और बसपा मुख्य विपक्षी वोट बैंक रहे, और छोटे क्षेत्रीय दलों ने पश्चिम और पूर्व में सीट-बँटवारा तय किया।
- वे यूपी को संघीय बनाते हैं: किसान, कानून-व्यवस्था और जाति जनगणना की राज्य माँगें दिल्ली गठबंधनों में ले जाते हैं, और स्थानीय प्रभावशाली लोगों को केवल निर्दलीय नहीं, पार्टी टिकट के अंदर रखते हैं।
सीमा
- व्यक्तित्व पंथ, बदलते गठबंधन और कमजोर आंतरिक लोकतंत्र उसी प्रकृति का हिस्सा हैं; किसी दशक में महत्व सिकुड़ सकता है जब राष्ट्रीय लहर सामाजिक गठबंधन निगल ले।
Flow diagram
flowchart TD C[जाति क्षेत्र नेता] --> SP[सपा अवध] C --> BSP[बसपा दलित पट्टी] C --> RLD[आरएलडी पश्चिमी यूपी] SP --> Asm[403 सीट अंकगणित] BSP[BSP] --> Asm[Asm] RLD[RLD] --> Asm[Asm]
Conclusion
उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दल जाति-क्षेत्र और नेता-केंद्रित राज्य दल हैं। उनका महत्व यह है कि उन्होंने लखनऊ चलाया, सामाजिक गठबंधन गढ़े, और कुर्सी न होने पर भी विपक्ष तथा गठबंधन का गणित अभी तय करते हैं।
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क्या भाजपा उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय दल है?
नहीं। वह राष्ट्रीय दल है जो वर्तमान में यूपी में प्रधान है; यहाँ क्षेत्रीय का अर्थ सपा, बसपा, आरएलडी जैसे राज्य-जन्म दल हैं।
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क्या क्षेत्रीय दलों ने अकेले यूपी चलाया?
हाँ। 2007 में बसपा को बहुमत मिला; सपा भी केवल राष्ट्रीय दल की उपग्रह सरकार नहीं रही।
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