Revision summary
एसटीएफ 4 मई 1998 यूपी शासनादेश से माफिया और अंतर-जनपदीय संगठित गिरोहों के विरुद्ध बनी। मूल चार्टर में माफिया खुफिया, सूचीबद्ध गिरोह, डाकू गिरोह और विघटनकारी तत्व थे। एटीएस ने बाद में आतंक/आईएसआई हिस्सा लिया; एसटीएफ संगठित अपराध पर रही। रोकथाम राज्यव्यापी खुफिया और अपहरण–रंगदारी नेटवर्क तोड़ना है, केवल मुठभेड़ नहीं। यह जनपद पुलिस के साथ चलती है और साधारण थाना कानून-व्यवस्था नहीं बदलती।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स 4 मई 1998 के शासनादेश से बनी ताकि माफिया गिरोहों पर खुफिया संग्रह करे और सूचीबद्ध, अंतर-जनपदीय संगठित अपराध पर जनपद पुलिस के साथ वार करे। रोकथाम यहाँ उन गिरोहों को तोड़ना है जिन्हें अपहरण, सुपारी हत्या और रंगदारी ने एक जनपद पंक्ति से बड़ा बना दिया था।
Body
एसटीएफ क्यों उठाई गई
- 1990 के अंत में उत्तर प्रदेश अंतर-जनपदीय गिरोह, फिरौती अपहरण और ठेकों पर माफिया नियंत्रण झेल रहा था; अकेली जनपद पुलिस उस गिरोह का पीछा नहीं कर सकती थी जो एक रेंज में सोए और दूसरी में मारे।
- 4 मई 1998 शासनादेश ने एसटीएफ को माफिया गिरोहों पर खुफिया, जनपद पुलिस के साथ सूचीबद्ध गिरोहों पर कार्रवाई, और अंतर-जनपदीय डाकू तथा संगठित अपराधी गिरोहों पर कार्रवाई सौंपी।
- तात्कालिक सार्वजनिक स्मृति श्री प्रकाश शुक्ल का शिकार है; टिकाऊ भूमिका राज्य स्तरीय संगठित-अपराध इकाई है, जो पहले छह महीने प्रयोग के बाद स्थायी हुई।
संगठित अपराध रोकने में भूमिका
- जनपदों पर खुफिया, टेलीफोन और वित्तीय सुराग, तथा गिरोहों की राज्यव्यापी सूची एसटीएफ को अपहरण चक्र पकने से पहले वार करने देती है, जो रोकथाम है, केवल हत्या-बाद प्रतिक्रिया नहीं।
- जनपद पुलिस के साथ समन्वित छापे, गिरफ्तारी और जब्ती पूर्वांचल से एनसीआर किनारे तक सुरक्षित घर श्रृंखला तोड़ती है जिसे साधारण थाना सीमाएँ नहीं देखतीं।
- सूचीबद्ध गिरोहों और अंतर-जनपदीय डाकू समूहों पर निशाना उस सुपारी और रंगदारी बाजार को घटाता है जिसने कई पट्टियों में खनन, शराब और सार्वजनिक निर्माण कैद कर लिया था।
- एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड बनने के बाद विघटनकारी/आईएसआई चार्टर एटीएस को गया; एसटीएफ का बचा मूल रोकथाम काम माफिया, संगठित अपराधी और अंतर-जनपदीय गिरोह है—साधारण कानून-व्यवस्था का विकल्प नहीं।
विधि और सीमाएँ
- राज्यव्यापी क्षेत्राधिकार, साधारण आपराधिक कानून के अधीन तलाशी-गिरफ्तारी, और विशेषज्ञ संवर्ग औजार हैं; रोकथाम असफल यदि रिक्तियाँ, कमजोर अभियोजन या राजनीतिक आश्रय गिरोह फिर भरें।
- मुठभेड़-केंद्रित सार्वजनिक छवि शांत रोकथाम काम न छिपाए: डोजियर, समन्वय सेल, और गिरोह को अपहरण कैलेंडर से बाहर रखना।
- एसटीएफ जनपद एसएसपी को नहीं बदलती; वह राज्य की छुरी है उन संगठित नेटवर्कों के लिए जो एक जनपद से आगे भागते हैं।
Flow diagram
flowchart TD GO[शासनादेश 4 मई 1998] --> Int[माफिया खुफिया] Int --> List[सूचीबद्ध गिरोह] List --> Raid[अंतर जनपद कार्रवाई] Dist[जनपद पुलिस] --> Raid Raid --> Prev[अपहरण रंगदारी तोड़]
Conclusion
यूपी पुलिस एसटीएफ राज्यव्यापी खुफिया, सूचीबद्ध गिरोह कार्रवाई और अंतर-जनपदीय वार से संगठित अपराध रोकती है जो थाना नहीं चला सकता। 1998 में माफिया और अपहरण नेटवर्कों के विरुद्ध उठी, एटीएस द्वारा आतंक चार्टर लेने के बाद भी विशेषज्ञ संगठित-अपराध भुजा है—केवल अभियोजन और जनपद साझेदारी से प्रभावी।
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क्या एसटीएफ आतंक बल है?
एटीएस के बाद नहीं। एसटीएफ का वर्णित काम माफिया और अंतर-जनपदीय संगठित अपराध है; आतंक विघटन एटीएस को गया।
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एसटीएफ दंड के अलावा रोकती कैसे है?
खुफिया सूचियों, समन्वय, और अगले अपहरण या सुपारी हत्या के पकने से पहले गिरोहों पर वार से।
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