Q14 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2023 · GS IV · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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नीतिशास्त्र में मानवीय क्रिया से क्या तात्पर्य है? मानवीय क्रिया में नैतिकता के निर्धारक और परिणामों की विवेचना कीजिए।

विषय: Ethics and Human Interface. पाठ्यक्रम: Ethics and Human Interface — Essence, determinants and consequences of Ethics in human action. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2023 और Ethics and Human Interface से।

Revision summary

मानवीय क्रिया स्वैच्छिक और ज्ञात है, प्रतिवर्त नहीं; हस्ताक्षर या मौन ऐसा कर्म हो सकता है। निर्धारक वस्तु, आशय, परिस्थितियाँ, आदत, सामाजिक परिवेश और अंतःकरण हैं। कुछ वस्तुएँ मीठे हेतु से भी गलत रहती हैं। परिणाम कर्ता, कमजोर, कार्यालय और लोक विश्वास गढ़ते हैं। देखी जा सकने वाली अनदेखी हानि अभी कर्ता का नैतिक परिणाम है।

Model answer

Introduction

नीतिशास्त्र में मानवीय क्रिया ज्ञान और इच्छा से किया गया स्वैच्छिक कर्म है, छींक या प्रतिवर्त नहीं। नीति उस कर्म का न्याय करती है कि उसे क्या चलाया और उसने चरित्र तथा दूसरों के साथ क्या किया।

Body

मानवीय क्रिया का अर्थ

  • मानवीय क्रिया (ऐक्टस ह्यूमेनस) चुनी हुई है: व्यक्ति मोटे तौर पर जानता है कि क्या हो रहा है और अन्यथा कर सकता था।
  • केवल व्यवहार (ऐक्टस होमिनिस) — नींद में चलना, इच्छा बिना बाध्यता — पूर्ण अर्थ में अभी नैतिक कर्म नहीं।
  • लोक जीवन में “क्रिया” अक्सर हस्ताक्षर, विलंब, लीक, या मौन होता है जो फिर भी चुनाव था।
  • हेतु, आशय, साधन और परिस्थिति मिलकर कर्म की नैतिक पहचान बनाते हैं, उसके बाद का प्रेस नोट नहीं।

मानवीय क्रिया में नैतिकता के निर्धारक

  • वस्तु: कर्म स्वयं क्या है — सच्चा प्रमाणपत्र या जाली — पहली सीमा सेट करता है; कुछ वस्तुएँ अच्छी कामना से धुल नहीं सकतीं।
  • आशय (साध्य): अधिकारी क्यों करता है — अकाल खिलाने या दाता प्रसन्न करने — वही बाहरी चाल गहरा या विषैला कर सकता है।
  • परिस्थितियाँ: किसे हानि, पद कितना सार्वजनिक, क्या हलका साधन था, क्या कर्ता दबाव में था।
  • चरित्र और आदत: दोहराया छोटा विलंब भ्रष्ट स्वभाव प्रशिक्षित करता है; दोहराया ईमानदार ना साहस प्रशिक्षित करता है।
  • सामाजिक और कानूनी परिवेश: आचरण नियम, प्रथा और वरिष्ठों का उदाहरण बाहरी निर्धारक हैं जो भीतरी स्वतंत्रता छोड़ते हैं।
  • अंतःकरण: अंतिम भीतरी निर्धारक, जो सुगठित या खरीदा जा सकता है।

मानवीय क्रिया में नैतिकता के परिणाम

  • कर्ता पर: सत्यनिष्ठा बढ़ती या घटती है; लज्जा या शांति आती है; व्यक्ति उस अधिकारी जैसा बनता है जिसे बदतर पत्रावली सौंपी जा सके।
  • पीड़ित और लाभार्थी पर: रिश्वत कमजोर से वसूलती है; ईमानदार छूट राशन लौटाती है।
  • संस्थाओं पर: एक पका नोट पूरे अनुभाग को सिखाता है कि सत्य वैकल्पिक है; एक दर्ज असहमति सिखाती है कि विधि अभी जीवित है।
  • लोक विश्वास पर: नागरिक मेज की नकल करते हैं; नैतिक क्रिया लोक हित है, अनैतिक क्रिया लोक अहित।
  • अनपेक्षित परिणाम अभी कर्ता के हैं यदि वे देखे जा सकते थे और अनदेखे रहे।

प्रशासनिक दृष्टांत

  • दंगा सप्ताह में सांप्रदायिक शॉर्टकट मना करना वह मानवीय क्रिया है जिसकी वस्तु समान संरक्षण है, आशय विधि सहित शांति है, और परिणाम पदस्थापना का जोखिम तथा वह जिला है जो अधिकारी की पहरेदारी में नहीं जला।

Flow diagram

flowchart TD
  K[ज्ञान और इच्छा] --> A[मानवीय क्रिया]
  O[वस्तु] --> E[कर्म की नीति]
  N[आशय] --> E
  C[परिस्थितियाँ] --> E
  A --> E
  E --> T[चरित्र और विश्वास]

Conclusion

नीतिशास्त्र में मानवीय क्रिया जानती-इच्छित कर्म है। उसकी नीति वस्तु, आशय, परिस्थिति, आदत और अंतःकरण से सेट होती है। उसके परिणाम चरित्र, कमजोर, संस्थाओं और विश्वास पर गिरते हैं — देखी जा सकने वाली हानि सहित।

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