Revision summary
बच्चे व्याख्यान से अधिक पुरस्कृत और दोहराए आचरण की नकल करते हैं, जैसा बंदूरा का सामाजिक अधिगम कहता है। परिवार विश्वास, न्याय, लिंग और धन-सत्य का पहला विद्यालय है। बंद घर जाति गर्व और हिंसा को सामान्य बना सकता है। समाज — साथी, मीडिया, बाजार और दृश्य राज्य — उस मानचित्र को पुष्ट या भ्रष्ट करते हैं। रिश्वत संस्कृति और कतार तोड़ना निराशा सिखाते हैं; स्वच्छ खिड़की और साझा भोजन गरिमा सिखाते हैं।
Model answer
Introduction
मूल्य सिखाए कम, पकड़े अधिक जाते हैं। बालक उस सम्मान और पाखंड की नकल करता है जो परिवार और समाज दिखाते हैं, इसलिए दोनों गरिमा या पूर्वाग्रह बो सकते हैं।
Body
कथन
- यह दावा अल्बर्ट बंदूरा के सामाजिक अधिगम से मिलता है: बच्चे व्याख्यान से अधिक वह नकल करते हैं जो पुरस्कृत, डराया और दोहराया जाता है।
- अरस्तू घर को सद्गुण का पहला विद्यालय मानते थे; कन्फ्यूशियस पैतृक उदाहरण को लोक व्यवस्था की जड़ मानते थे।
- दीवार की शपथ जिसे माता-पिता कभी न निभाएँ, बच्चे को सिखाती है कि मूल्य मेहमानों के लिए हैं, स्वयं के लिए नहीं।
परिवार की भूमिका
- परिवार विश्वास, वाणी, बाँटने और क्षमा का पहला स्थल है; भोजन चटाई पर न्याय बच्चे का पहला न्याय-मानचित्र बनता है।
- बड़ों की देखभाल, धन के विषय में सत्य, और घरेलू श्रमिक से व्यवहार बिना पाठ्यक्रम की दैनिक नीति कक्षाएँ हैं।
- घर पर सीखे लिंग-भूमिकाएँ बाद में महिला हेल्पडेस्क पर अधिकारी की शिष्टता या अवमानना बनती हैं।
- हिंसक या जाति-गर्वी घर अवमानना को ‘हमारी रीत’ बना सकता है, जिसे बाद की संस्थाएँ महँगे मूल्य पर उतारती हैं।
- संयुक्त परिवार की कथाएँ और पर्व दान, संयम और भेद का सम्मान भी बो सकते हैं, यदि बड़े उन्हें जिएँ।
समाज की भूमिका
- पड़ोस, विद्यालय, मीडिया, जाति पंचायत, बाजार और मंदिर या मस्जिद दूसरी कक्षा हैं।
- साथी समूह नकल, कचरा फैलाना या दया सामान्य बनाते हैं; बच्चा समूह की हँसी को नैतिक प्रमाण मानता है।
- सिनेमा, व्हाट्सएप अग्रेषण और स्थानीय पर्व सिखाते हैं कि ‘हम’ कौन हैं और किसका उपहास चल सकता है।
- द्वितीय एआरसी की नैतिकता रिपोर्ट ने रिश्वत-की-संस्कृति के प्रति समाज की सहिष्णुता को युवाओं को निराशा में भर्ती करने वाली संस्कृति माना।
- सार्वजनिक उदाहरण — कमजोर से ट्यूशन न लेने वाला शिक्षक, बिना कटौती एफआईआर लिखती थाना, गरिमा से पका मध्याह्न भोजन — पाठ पलटते हैं।
- संविधान दिवस, एनसीसी और विद्यालय संसद नागरिक मूल्य जोड़ने का प्रयास करते हैं, किंतु सड़क यदि कतार तोड़ने वाले को पुरस्कृत करे तो वे गिरते हैं।
साथ में
- परिवार पहला अंतःकरण बोता है; समाज उसे पुष्ट, भ्रष्ट या सुधारता है।
- मूल्य शिक्षा नीति इसलिए नैतिक विज्ञान काल तक नहीं रुक सकती; उसे माता-पिता, मीडिया और दृश्य राज्य तक जाना चाहिए।
Flow diagram
flowchart TD O[देखा आचरण] --> F[पारिवारिक मानचित्र] O --> S[समाज की मुहर] F --> V[बालक के मूल्य] S --> V V --> A[वयस्क नागरिक आदत]
Conclusion
बालक देखकर मूल्य सीखता है। परिवार विश्वास या भय का पहला मानचित्र देता है; समाज उस पर सम्मान या निराशा की मुहर लगाता है। नैतिक लोक जीवन तब शुरू होता है जब उदाहरण और संस्था एक दिशा दें।
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यदि परिवार पहला है तो समाज को दोष क्यों?
क्योंकि साथी, मीडिया और सड़क घर के मानचित्र को मिटा या कठोर कर सकते हैं। दोनों स्थल वयस्क गढ़ते हैं।
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क्या विद्यालय पूर्वाग्रही घर को उतार सकता है?
वह प्रतिद्वंद्वी उदाहरण और अधिकारों की भाषा दे सकता है। भय या गर्व रातोंरात कम ही मिटते हैं; राज्य की दृश्य निष्पक्षता मदद करती है।
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