Revision summary
चन्द्रयान-3 का लक्ष्य चन्द्रयान-2 की लैंडर असफलता के बाद नरम अवतरण सिद्ध करना था। प्रज्ञान रोवर चलाना और सतह डेटा भेजना लक्ष्य था। विज्ञान दक्षिण-ध्रुवीय मिट्टी, ऊष्मा, भूकंप और प्लाज्मा पर था। प्रणोदन मॉड्यूल पर शेप ने चंद्र कक्षा से पृथ्वी अवलोकन जोड़ा। 23 अगस्त 2023 की सफलता ने भारत को उस उच्च दक्षिणी अवतरण अक्षांश पर पहला बनाया।
Model answer
Introduction
चन्द्रयान-3 इसरो का 2023 चंद्र मिशन है जिसने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास नरम अवतरण किया। यह चन्द्रयान-2 के लैंडर असफलता के बाद बनाया गया। प्रमुख उद्देश्य पहले तकनीकी प्रदर्शन हैं, फिर उच्च अक्षांश स्थल से स्थल-विज्ञान।
Body
प्रमुख उद्देश्य
- चंद्र सतह पर सुरक्षित और नरम अवतरण सिद्ध करना — वह क्षमता जो चन्द्रयान-2 का विक्रम 2019 में पूरा नहीं कर सका।
- रोवर संचालन सिद्ध करना: प्रज्ञान रोवर को अवतरण स्थल से घूमना, चित्र लेना और डेटा भेजना था।
- सतह और निकट-सतह पर्यावरण पर स्थल वैज्ञानिक प्रयोग करना, विशेषकर दक्षिण ध्रुव के पास जहाँ बर्फ और तापीय चरम रुचि के हैं।
- बाद के चंद्र और ग्रहीय मिशनों के लिए अंत-से-अंत भारतीय अवतरण-रोविंग स्टैक (प्रणोदन मॉड्यूल, लैंडर विक्रम, रोवर प्रज्ञान) सिद्ध करना।
उस उद्देश्य में विज्ञान पेलोड
- लैंडर यंत्र (चास्टे तापीय प्रोब, आईएलएसए भूकंपमापी, लैंगम्यूर प्रोब) तापमान, कंपन और प्लाज्मा मापते हैं।
- रोवर यंत्र (एलआईबीएस और एपीएक्सएस) मिट्टी की मौलिक संरचना अनुमानित करते हैं।
- प्रणोदन मॉड्यूल का शेप प्रयोग बोनस स्पेक्ट्रोस्कोपी लक्ष्य के रूप में चंद्र कक्षा से पृथ्वी देखता था।
कार्यक्रम इसरो के भारतीय चंद्र अन्वेषण / चन्द्रयान श्रृंखला में है, अवतरण लगभग 69 डिग्री दक्षिण पर, उस उच्च दक्षिणी अक्षांश पर किसी एजेंसी का पहला।
Flow diagram
flowchart TD C2[चन्द्रयान-2 लैंडर अंतर] --> C3[चन्द्रयान-3] C3 --> L[नरम अवतरण विक्रम] C3 --> R[रोवर प्रज्ञान] C3 --> S[दक्षिण ध्रुव स्थल विज्ञान] L --> O[इसरो चंद्र क्षमता] R --> O S --> O
Conclusion
चन्द्रयान-3 के प्रमुख उद्देश्य चन्द्रयान-2 की ठोकर के बाद नरम अवतरण, रोवर गति और ध्रुवीय स्थल-विज्ञान थे। इन्हें पूरा कर भारत चंद्र दक्षिण ध्रुव के पास नरम अवतरण करने वाला पहला और चंद्रमा पर नरम अवतरण करने वाला चौथा देश बना।
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क्या चन्द्रयान-3 ड्रिल से जल बर्फ खोजने वाला था?
नहीं। यह सतह यंत्रों के साथ अवतरण-रोवर प्रदर्शन था। बर्फ मानचित्रण अधिक ऑर्बिटर और भविष्य मिशन का काम है।
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क्या इसमें चन्द्रयान-2 जैसा ऑर्बिटर था?
अलग विज्ञान ऑर्बिटर नहीं। प्रणोदन मॉड्यूल ने लैंडर-रोवर ढोया और शेप चलाया, जबकि चन्द्रयान-2 का ऑर्बिटर अभी उड़ता है।
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