Revision summary
धारा 89 सीपीसी, 1996 का मध्यस्थता अधिनियम और 2023 का सुलह अधिनियम एडीआर को कानूनी आधार देते हैं। 1987 के विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के अधीन लोक अदालतें शमनीय दावों का थोक निपटान करती हैं। शासन तब लाभ पाता है जब अनुबंध और कल्याण शिकायतें विचारण के वर्षों न ठहरें। न्याय-प्रदाय तभी सुधरता है जब कमजोर पक्ष अन्यायपूर्ण सौदे पर मजबूर न हों। अपराध और संवैधानिक अधिकारों के लिए न्यायालय आवश्यक रहते हैं।
Model answer
Introduction
भारत में न्यायालयों पर लंबा लंबित भार है, इसलिए राज्य ने मध्यस्थता, मध्यस्थता-सुलह, सुलह और लोक अदालत के समानांतर मार्ग बनाए हैं। एडीआर शासन को तभी सुदृढ़ करता है जब वह निष्पक्ष, सस्ता और सार्वजनिक विधि से जुड़ा रहे।
Body
कुशल शासन
- सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 न्यायालय को उपयुक्त सिविल विवाद पूर्ण विचारण के बजाय मध्यस्थता, सुलह, मध्यस्थता या लोक अदालत भेजने देती है।
- मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 और मध्यस्थता अधिनियम, 2023 निजी निपटान को वैधानिक रूप देते हैं ताकि अनुबंध और वाणिज्यिक नीति डिक्री के वर्षों इंतजार न करें।
- मुकदमे से पूर्व मध्यस्थता और ऑनलाइन विवाद निपटान कलेक्टरों और नियामकों का बोझ काटते हैं जो अन्यथा डिफ़ॉल्ट शिकायत डेस्क बन जाते हैं।
न्याय-प्रदाय
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अधीन लोक अदालतें शमनीय और धन दावों का थोक निपटान करती हैं, जिस गति से साधारण बोर्ड नहीं चल सकते।
- वाणिज्यिक मध्यस्थता और न्यायालय-संलग्न सुलह फर्मों को तेज मंच देते हैं, जो राज्य के कारोबार सुगमता दावे का भाग है।
- विधिक सेवा प्राधिकरण उन पक्षों तक पहुँच सकते हैं जो वरिष्ठ अधिवक्ता नहीं रख सकते, इसलिए पहुँच केवल धनवानों की गति नहीं है।
सीमाएँ
- असमान पक्ष दबाव में समझौता कर सकते हैं, और विलंबित मध्यस्थता वही लंबित भार दोहरा सकती है जिसे एडीआर टालना चाहता था।
- आपराधिक सार्वजनिक अपराध और संवैधानिक अधिकार अभी न्यायालयों के हैं; एडीआर पूरक है, न्यायिक व्यवस्था का स्थान नहीं।
Flow diagram
flowchart TD D[सिविल या वाणिज्यिक विवाद] --> A[मध्यस्थता सुलह लोक अदालत] A --> G[तेज निपटान] G --> J[न्यायालय भार कम] D --> C[अधिकार और अपराध हेतु न्यायालय]
Conclusion
एडीआर उपयुक्त विवादों को नियमित रोस्टर से हटाकर और निपटान को क़ानून देकर शासन सुदृढ़ करता है। न्याय-प्रदाय तभी सुधरता है जब सहमति वास्तविक हो और जिन अधिकारों पर सौदा नहीं हो सकता उनके लिए न्यायालय खुले रहें।
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"Legislature is supreme within its domain, yet it is not sovereign." Examine this statement in the constitutional context with examples.
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क्या एडीआर उच्च न्यायालयों का स्थान लेता है?
नहीं। यह उपयुक्त सिविल और वाणिज्यिक विवादों का समानांतर मार्ग है। रिट, अपराध और अनेक लोक-विधि प्रश्न न्यायालयों के रहते हैं।
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क्या लोक अदालत का अवार्ड बाध्यकारी है?
लोक अदालत का अवार्ड सिविल न्यायालय की डिक्री माना जाता है और उस निपटान पर पक्षों के बीच अंतिम होता है।
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