Revision summary
संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 को विस्तार के कारण लघु-संविधान कहा जाता है। इसने प्रस्तावना बदली और अनुच्छेद 51A कर्तव्य तथा नए नीति निदेशक जोड़े। इसने राष्ट्रपति बाध्य किए, सदन अवधि बढ़ाई और कई विषय समवर्ती सूची में भेजे। इसने संवैधानिक संशोधनों को न्यायिक पुनर्विलोकन से बचाने का प्रयास किया। चौवालीसवें संशोधन और मिनर्वा मिल्स ने उस पुनर्लेखन का बड़ा भाग लौटाया।
Model answer
Introduction
संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 आपातकाल में पारित हुआ और इतने भाग एक साथ छूए कि उसे प्रायः लघु-संविधान या 1950 पाठ का पुनर्लेखन कहा जाता है। दावा पैमाने का है, नई संविधान सभा का नहीं।
Body
इसे पुनर्लेखन क्यों कहा जाता है
- इसने प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता जोड़कर राज्य के कथित दर्शन को बदला।
- इसने भाग IVA और अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्य जोड़े, तथा अनुच्छेद 39A, 43A और 48A में नए नीति निदेशक, जिससे अधिकार, कर्तव्य और नीति साथ रचे गए।
- इसने अनुच्छेद 74 के अधीन राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल सलाह से बाध्य किया, लोक सभा और विधानसभाओं को छह वर्ष किया, और शिक्षा, वन, वन्य जीव तथा बाट-माप समवर्ती सूची में भेजे।
पुनर्लेखन आरोप न्यायसंगत पर अधूरा क्यों है
- अनुच्छेद 31ग का विस्तार और अनुच्छेद 368 को न्यायिक पुनर्विलोकन से बचाना संशोधन को न्यायालय से परे रखना चाहता था; मिनर्वा मिल्स (1980) ने बाद में उसे काटा।
- अनुच्छेद 323क और 323ख ने अधिकरण मार्ग बनाए जो सेवा और अन्य विवाद साधारण न्यायालयों से हटाते थे।
- चौवालीसवाँ संशोधन, 1978 ने आपात, संपत्ति और सदन अवधि पर 1976-पूर्व संतुलन बहुत हद तक लौटाया, जिससे सिद्ध हुआ कि 1976 राजनीतिक पुनर्लेखन था, अंतिम नया संविधान नहीं।
Flow diagram
flowchart TD E[आपातकाल 1975-77] --> A[42वाँ संशोधन 1976] A --> P[प्रस्तावना कर्तव्य नीति निदेशक] A --> I[संस्थाएँ और समवर्ती सूची] A --> J[कटा पुनर्विलोकन] J --> M[मिनर्वा मिल्स 44वाँ संशोधन]
Conclusion
बयालीसवें संशोधन को पुनर्लेखन इसलिए कहा जाता है कि उसने एक आपात क़ानून में प्रस्तावना लिखी, कर्तव्य जोड़े, नीति निदेशक बढ़ाए, राष्ट्रपति बाध्य किए, विषय स्थानांतरित किए और संशोधनों को पुनर्विलोकन से बंद करने का प्रयास किया। बाद के संशोधन और मिनर्वा मिल्स दिखाते हैं कि पुनर्लेखन बड़ा था, स्थायी नहीं।
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क्या 42वें संशोधन ने 1950 का संविधान बदल दिया?
नहीं। उसने विद्यमान पाठ को बहुत बड़े पैमाने पर संशोधित किया। वही संविधान चला, बाद में 44वें संशोधन और न्यायालय ने सुधारा।
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किस बाद के संशोधन ने सदन अवधि पाँच वर्ष कर दी?
संविधान (चौवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 ने लोक सभा और राज्य विधानसभाओं की पाँच-वर्ष अवधि लौटाई।
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