Revision summary
दल सामाजिक माँगें जोड़ते हैं और उन्हें सरकार तथा विपक्ष में बदलते हैं। गठबंधन क्षेत्रीय दलों को संघ राजनीति गढ़ने देते हैं। लागत में वंश नियंत्रण, महँगे अभियान और टिकटों का अपराधीकरण हैं। दसवीं अनुसूची का व्हिप सदन में असहमति चुप करा सकता है। व्यवस्था पार्टी-केंद्रित रहती है; आंतरिक लोकतंत्र और वित्त सुधार कमजोर हैं।
Model answer
Introduction
राजनीतिक दल भारत की संसदीय लोकतंत्र की इंजन हैं: वे उम्मीदवार चुनते हैं, सरकार बनाते हैं और विपक्ष गठित करते हैं। समालोचना उन कार्यों को वंश, धन और ध्रुवीकरण प्रभाव के विरुद्ध तौलनी चाहिए।
Body
व्यवस्था में भूमिका
- दल जाति, क्षेत्र और वर्ग की माँगों को कार्यक्रम में जोड़ते हैं जिसे मतदाता चुन सके, जो स्वतंत्र उम्मीदवारी पैमाने पर नहीं कर सकती।
- बहुमत दल या गठबंधन मंत्रिपरिषद और विधायी अनुशासन देता है, जिसके बिना त्रिशंकु सदन शासन नहीं कर सकता।
- विपक्षी दल जाँच करते हैं, विकल्प देते हैं, और समिति तथा सड़क का उपयोग सदन के साथ करते हैं।
प्रभाव, लागत सहित
- राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल राजनीति को संघीय बनाते हैं, गठबंधनों से राज्यों को केंद्र में आवाज़ देते हैं।
- ऊँचा चुनाव खर्च, आपराधिक टिकट और कमजोर आंतरिक लोकतंत्र शक्ति को हाई कमान या परिवार में केंद्रित करते हैं।
- पहचान ध्रुवीकरण और दसवीं अनुसूची का व्हिप बहस को निष्ठा परीक्षा तक सिकोड़ सकते हैं।
- दल-बदल विरोधी क़ानून सरकारें स्थिर करता है पर विधायक को अंतरात्मा मत के रूप में चुप कर सकता है।
समालोचनात्मक संतुलन
- भारत पार्टी-केंद्रित व्यवस्था है, शुद्ध उम्मीदवार-केंद्रित नहीं; वित्त और आंतरिक लोकतंत्र सुधार उस भूमिका का अधूरा भाग है।
Flow diagram
flowchart TD V[मतदाता] --> P[राजनीतिक दल] P --> G[सरकार और विपक्ष] P --> F[संघीय गठबंधन] P --> D[धन वंश व्हिप] G --> S[संसदीय व्यवस्था] D --> S
Conclusion
दल बहुमत और विपक्ष गठित कर प्रतिनिधि सरकार संभव बनाते हैं, और क्षेत्रीय सौदों से संघ को संघीय बनाते हैं। जहाँ धन, वंश और व्हिप कार्यक्रम और जवाबदेही का स्थान लेते हैं, प्रभाव विकृत होता है।
Quick related
Students also ask
-
Describe the role played by Parliamentary Committees in the functioning of Indian Parliament.
Next question in the 2021 paper (Q7). View answer →
-
क्या भारतीय व्यवस्था दलों के बिना चल सकती है?
संघ पैमाने पर नहीं। उत्तरदायी सरकार को संगठित बहुमत चाहिए; स्वतंत्र उम्मीदवार अकेले मंत्रिमंडल नहीं चला सकते।
-
क्या दल-बदल विरोध लोकतंत्र सुदृढ़ करता है?
यह घोड़े-व्यापार घटाता है पर विधायक स्वतंत्रता कमजोर कर सकता है; शुद्ध प्रभाव विचार-विमर्श से अधिक स्थिरता है।
PYQ trend
When UPSC asked this
Related PYQs from other years, newest first. Open a question to read it.
-
2021 · Q2 · UPGS2 · 8 marks
‘Citizen charter in India could not become effective. There is a need to make it effective and meaningful’ – Evaluate. -
2021 · Q4 · UPGS2 · 8 marks
The Preamble of the Constitution affirms the basic features of the Constitution and the promotion of human dignity – Elucidate. -
2021 · Q8 · UPGS2 · 8 marks
Comment on the main theme of the G-20 Summit held in 2021 (Rome). -
2021 · Q10 · UPGS2 · 8 marks
What are the major challenges before the revenue system of Uttar Pradesh? -
2021 · Q14 · UPGS2 · 12 marks
‘The structure of the Indian Constitution is federal but its soul is Unitary.’ Elucidate it. -
2021 · Q16 · UPGS2 · 12 marks
Analyse the problems that have restricted the successes of Panchayati Raj System in India. How far has the Seventy-Third Constitutional Amendment been successful in countering these problems? -
2021 · Q17 · UPGS2 · 12 marks
Examine the role of the Comptroller and Auditor General (CAG) in India as the custodian of public money. -
2021 · Q19 · UPGS2 · 12 marks
Evaluate the reasons of India’s ‘Soft Power’ diplomacy in Afghanistan.
More from this paper
Q1 · UPSC Mains 2021 · UPGS2 · 8 marks
नीति निर्माण प्रक्रिया में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Government policies for development
एनजीओ उपेक्षित सामाजिक और पर्यावरण तथ्य नीति एजेंडे में लाते हैं। वे शोध, आदर्श प्रारूप और कार्य-समूह टिप्पणियाँ डिज़ाइन में देते हैं। अंतिम छोर प्रदाय और सामाजिक अंकेक्षण विफलता मंत्रालयों को लौटाते हैं। मुकदमे राज्य को दिशानिर्देश लिखने को बाध्य कर सकते हैं। वे विधायन नहीं कर सकते; एफसीआरए और कब्जा उनकी भूमिका की सीमा हैं।
Q2 · UPSC Mains 2021 · UPGS2 · 8 marks
‘भारत में नागरिक अधिकार पत्र प्रभावी नहीं बन सके हैं। इसे प्रभावी एवं अर्थपूर्ण बनाने की आवश्यकता है।’ मूल्यांकन कीजिए।
Indian Constitution
नागरिक अधिकार पत्र सेवा मानक, समय-सीमा और शिकायत मार्ग प्रकाशित करता है। अधिकांश भारतीय पत्र स्टाफ, प्रचार और शास्ति के अभाव में अप्रभावी रहे। आरटीआई और गारंटी अधिनियम से दोहराव ने पत्र को पोस्टर बना दिया। वैधानिक समय-सीमा, सेवोत्तम-सदृश गुणवत्ता और मुआवजा उसे अर्थपूर्ण बना सकते हैं। मूल्यांकन मानता है कि सुधार शास्ति जोड़े, केवल नया दस्तावेज नहीं।
Q3 · UPSC Mains 2021 · UPGS2 · 8 marks
निर्वाचन और भूख से जुड़े मुद्दे भारत की चुनावी राजनीति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
Policies of other countries
दल खाद्य, काम और पेंशन को गरीब मतदाता के लिए घोषणापत्र की मुख्य वस्तु मानते हैं। खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति भूख को प्रति-सत्ता आरोप बनाती है। गरीबी भूगोल टिकट और जाति–वर्ग गठबंधन प्रभावित करता है। राशन और रोजगार डिलीवरी देखभाल करने वाली सरकार का प्रमाण बेची जाती है। पहचान और नेतृत्व अभी फैसला बाँटते हैं; भूख बड़ा, एकमात्र चालक नहीं।
Toppers' copies
Toppers' copies for this question will be uploaded soon.