Revision summary
दबाव समूह प्रायः पद चाहे बिना प्रभाव डालते हैं। भारत के मानचित्र में चैंबर, संघ, किसान मोर्चे, जाति सभाएँ, आस्था निकाय और मुद्दा एनजीओ हैं। वे हित उच्चारित करते, जानकारी भरते, सरकार रोक या कब्जा कर सकते हैं। दलों से भिन्न हैं क्योंकि सरकार-प्रतीक्षा के रूप में आम चुनाव नहीं लड़ते। पारदर्शिता और खुली सुनवाई भूमिका को लोकतांत्रिक रखती है।
Model answer
Introduction
दबाव समूह प्रायः दल के रूप में चुनाव लड़े बिना सत्ता को प्रभावित करना चाहते हैं। भारतीय राजनीति उनसे भरी है: चैंबर, संघ, किसान मोर्चे, जाति सभाएँ, आस्था निकाय और पेशेवर संघ। भूमिका हितों का उच्चारण है; जोखिम बिना घोषणा-पत्र राज्य कब्जा है।
Body
भारत में प्रमुख प्रकार
- व्यापार और उद्योग: फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, नैसकॉम बजट, श्रम संहिता और व्यापार नीति पर лоबी करते हैं।
- श्रम: आईएनटीयूसी, बीएमएस, एआईटीयूसी, सीआईटीयू और स्वतंत्र महासंघ हड़ताल, चार्टर और त्रिपक्षीय बात करते हैं।
- कृषि: भारतीय किसान संघ और अन्य किसान संघ एमएसपी, बिजली सब्सिडी और ऋण माफी दबाते हैं; 2020 में नए कृषि कानून विरोध भी जुटते दिखे।
- जाति और समुदाय: जाति चैंबर, अल्पसंख्यक संगठन और भाषा संघ टिकट, कल्याण और जनगणना श्रेणियाँ सौदा करते हैं।
- आस्था और संस्कृति: मंदिर, वक्फ, गिरजा और पुनरुत्थान निकाय वैयक्तिक विधि, धर्म परिवर्तन और पर्व राजनीति में आते हैं।
- पेशेवर और छात्र: बार, आईएमए, शिक्षक संघ, एनएसयूआई, एबीवीपी, एसएफआई विधेयक और परिसर शक्ति गढ़ते हैं।
- मुद्दा और नए सामाजिक आंदोलन: पर्यावरण, आरटीआई, महिला समूह और निःशक्तता जाल PIL, मीडिया और सड़क प्रयोग करते हैं।
भारतीय राजनीति में भूमिका
- हित उच्चारण और एकत्रीकरण: वे मंत्रिमंडल को बताते हैं कि क्षेत्र क्या सहेगा, जिसे दल सर्वग्राही घोषणा-पत्र में धुंधला कर देते हैं।
- पहुँच: समितियाँ, पूर्व-बजट बैठकें और अनौपचारिक दिल्ली-लखनऊ गलियारे उनका वास हैं, मतपेटी नहीं।
- विपक्ष और पूरक के कार्य: हड़ताल या बंद सरकार रोक सकता है; चैंबर उसी खंड का मसौदा भी दे सकता है जिसकी मंत्रालय को जरूरत है।
- लोकतांत्रिक शिक्षा: संघ सौदा सिखाते हैं, जो कम जानकारी वाले लोकतंत्र में उपयोगी है।
- विकृति: धन, टिकट पर जाति वीटो, सांप्रदायिक लामबंदी और अनिर्वाचित एनजीओ या कॉर्पोरेट लोबी नागरिक को ग्राहक बना सकते हैं।
परीक्षण
- बड़े असमान समाज में दबाव समूह आवश्यक हैं क्योंकि संसद प्रश्नकाल में हर मिल और मंडी नहीं सुन सकती।
- वे दलों के विकल्प नहीं: सरकार नहीं बनाते और बंद कमरे में कानून नहीं लिखने चाहिए।
- न्यायपूर्ण परीक्षण उन्हें हितों का तंत्रिका तंत्र कहता है, और फिर भी आरटीआई, चुनावी बंध पारदर्शिता और दल-बदल तर्क माँगता है कि लोबी नहीं, दल मतदाता का सामना करें।
Flow diagram
flowchart TD S[समाज के हित] --> G[दबाव समूह] G --> L[लोबी हड़ताल PIL मीडिया] L --> Gv[सरकार] P[दल] --> V[मतदाता] G -.घोषणा पत्र नहीं.-> V
Conclusion
प्रमुख भारतीय दबाव समूह व्यापार, श्रम, किसान, जाति, आस्था, पेशेवर, छात्र और मुद्दा आंदोलन हैं। वे उच्चारण करते और कभी कब्जा करते हैं। भूमिका तब वैध है जब नीति को सार्वजनिक में सूचित करे; हानिकारक जब बिना मत खंड या दंगा खरीदे।
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नहीं। दल पद जीतकर सरकार चलाना चाहता है। दबाव समूह प्रायः उनको प्रभावित करता है जो पहले से पद पर हैं।
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क्या जाति संघ अवैध हैं?
नहीं। संघ अधिकार है। हिंसा भड़काना या चुनाव विधि तोड़ना अवैध है; कल्याण सभा चलाना नहीं।
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