Revision summary
अनुच्छेद 263 और 1990 राष्ट्रपति आदेश ने सरकारिया के बाद अंतर-राज्यीय परिषद बनाई। यह केंद्र-राज्य और अंतर-राज्य समन्वय का राजनीतिक मंच है, न्यायालय नहीं। यह विवाद दर्ज और सिफारिश कर सकती है; अधिनियम की तरह संघ को बाध्य नहीं कर सकती। विरल बैठकें और प्रधानमंत्री-अध्यक्ष, सिफारिशी डिज़ाइन भूमिका कमजोर करते हैं। जीएसटी परिषद और राजकोषीय निकाय अब अक्सर इस परिषद से कठिन सौदा करते हैं।
Model answer
Introduction
अंतर-राज्यीय परिषद केंद्र-राज्य और अंतर-राज्य समन्वय का अनुच्छेद 263 मंच है। आलोचनात्मक विवेचन को पूछना चाहिए कि उसने सहकारी संघवाद वास्तव में चलाया या कभी-कभार बुलाई जाने वाली बातचीत बनकर रह गई।
Body
अधिदेश और डिज़ाइन
- अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को विवाद जाँच, साझी रुचि के विषयों पर चर्चा और बेहतर समन्वय की सिफारिश हेतु परिषद स्थापित करने देता है।
- सरकारिया आयोग के बाद 1990 के राष्ट्रपति आदेश ने स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद बनाई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री सदस्य हैं।
- पुंछी आयोग ने बाद में नियमित, एजेंडा-चालित बैठकें माँगी ताकि परिषद सहयोग का राजनीतिक मुख बन सके।
सहकारी संघवाद में योगदान
- यह एकमात्र संवैधानिक राजनीतिक मेज है जहाँ राज्य सुरक्षा, राजकोषीय अंतरण और समवर्ती विषयों का केंद्र-राज्य रगड़ साझे अभिलेख पर रख सकते हैं।
- सरकारिया विषयों पर सिफारिशों और कभी-कभार मुद्दा-आधारित बैठकों ने साझेदारी की भाषा दी जिसे नीति आयोग के कार्यपालक मंच पूरी तरह नहीं बदलते।
आलोचनात्मक सीमाएँ
- बैठकें विरल रही हैं; प्रधानमंत्री की अध्यक्षता और सिफारिशी अधिदेश का अर्थ है कि संघ परिणाम टाल या अनसुना कर सकता है।
- जीएसटी परिषद (अनुच्छेद 279क) और वित्त आयोग मार्ग अब अंतर-राज्यीय परिषद से अधिक वास्तविक सौदा ढोते हैं।
- वैधानिक पंचांग, प्रकाशित अनुवर्तन और राज्यों को समान सचिवालय समर्थन के बिना परिषद सहकारी संघवाद को नियमित व्यवहार से अधिक पाठ में बढ़ाती है।
Flow diagram
flowchart TD A[अनुच्छेद 263] --> I[अंतर-राज्यीय परिषद 1990] I --> D[साझे विषयों पर संवाद] D --> R[सिफारिशें] R --> F[पालन हो तो सहकारी संघवाद] I --> W[बैठकें विरल हों तो कमजोर]
Conclusion
अंतर-राज्यीय परिषद सहकारी संघवाद का सही संवैधानिक उपकरण है, पर अनियमित बैठकें और नरम अधिदेश ने उसकी पकड़ सीमित की। वह सहयोग तभी बढ़ाएगी जब संघ उसे वैकल्पिक शिखर नहीं, कार्यकारी परिषद माने।
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क्या अंतर-राज्यीय परिषद नदी विवाद न्यायाधिकरण की तरह निपटा सकती है?
नहीं। वह चर्चा और सिफारिश कर सकती है। अंतर-राज्य नदी विवाद अनुच्छेद 262 और संसदीय विधि से चलते हैं।
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क्या नीति आयोग परिषद का विकल्प है?
नीति आयोग कार्यपालक थिंक-टैंक है। अनुच्छेद 263 संवैधानिक राजनीतिक परिषद है; दोनों एक पद नहीं।
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