Q3 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2018 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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उत्तर प्रदेश में किसान और कृषि के क्षेत्र की समस्याओं एवं चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। इनके सुधार के लिये सुझाव दीजिए।

विषय: Social sector services. पाठ्यक्रम: Issues relating to the development and management of Social Sector services. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2018 और Social sector services से।

Revision summary

उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में आगे है पर छोटी जोत और असमान जल पर कृषि आय कम रहती है। पूर्वी बाढ़ और बुंदेलखंड सूखे पश्चिमी भूजल तनाव और गन्ना-भुगतान विलंब के साथ बैठते हैं। धान-गेहूँ लॉक-इन और पतली मंडी-एफपीओ पहुँच किसानों को कीमत-स्वीकारक रखती है। उपचार लास्ट-माइल सिंचाई, वैधानिक गन्ना देय, एफपीओ और ई-नाम बाजार, तथा दाल, मिलेट, दूध और प्रसंस्करण की ओर खिसकाव हैं। भूमि-पट्टा स्पष्टता और काम करने वाला फसल बीमा उन उपायों के साथ चलना चाहिए।

Model answer

Introduction

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक है, फिर भी जोत छोटी, जल और बाजार असमान, तथा गन्ना और धान नकदी और जलभृत बाँधते हैं, इसलिए कृषि आय पतली रहती है। क्षेत्र पर प्रकाश उन संरचनात्मक समस्याओं को राज्य और संघ के काम के उपायों से जोड़ना चाहिए।

Body

समस्याएँ और चुनौतियाँ

  • औसत संचालन जोतें अत्यंत छोटी और खंडित हैं, इसलिए मशीनरी, ऋण और जोखिम-पूलन पैमाना नहीं बनाते, और मॉडल कृषि भूमि पट्टा अधिनियम टेम्पलेट के बावजूद पट्टा अनौपचारिक रहता है।
  • पूर्वी जिले बाढ़, जलभराव और कमजोर ग्रामीण सड़कों से जूझते हैं, जबकि बुंदेलखंड और पश्चिम के भाग सूखा, भूजल खनन और नलकूपों के लिए बिजली-गुणवत्ता तनाव झेलते हैं।
  • गन्ना बकाया, विलंबित पेमेंट और मिल बीमारी एक बड़ी नकदी फसल फँसाते हैं; पश्चिम में धान-गेहूँ प्रभुत्व दाल, तिलहन और बागवानी को भीड़ देता है जो आयात बिल और जल उपयोग काट सकती थीं।
  • मंडी शुल्क, कम भंडारण और पतला एफपीओ कवरेज किसान को कीमत-स्वीकारक रखता है; पशुधन और मत्स्य ग्रामीण जीडीपी में बड़े होने पर भी अनाज जितना संगठित बाजार सहारा नहीं पाते।

सुधार के उपाय

  • सिंचाई लास्ट-माइल (नहर, सूक्ष्म-सिंचाई, और अति-दोहित प्रखंडों में अटल भू-जल जैसा माँग प्रबंधन) तथा फसल-मौसम सलाह बढ़ाएँ ताकि पंपिंग और बुवाई बिजली-सब्सिडी नहीं, जलभृत से मेल खाएँ।
  • गन्ना देय वैधानिक कैलेंडर पर चुकाएँ, मिलों को एथेनॉल और सह-उत्पादन की ओर विविधीकृत करें, और एमएसपी-प्लस खरीद को दाल, मिलेट और दूध की ओर खिसकाएँ जहाँ उत्तर प्रदेश का उत्पादन आधार पहले से है।
  • किसान उत्पादक संगठन, ई-नाम और गोदाम रसीदें बढ़ाएँ, तथा एपीएमसी सुधार लागू करें ताकि टमाटर या आलू का ग्लट मौसम न मिटाए।
  • भूमि-पट्टा नियमितीकरण, काश्तकारों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड गहराई, वास्तव में भुगतान करने वाला फसल बीमा, और खाद्य प्रसंस्करण से गैर-कृषि ग्रामीण रोजगार आय का ढेर पूरा करते हैं।

Flow diagram

flowchart TD
  P[छोटी जोत बाढ़ सूखा बकाया] --> I[कम कृषि आय]
  M[सिंचाई एफपीओ गन्ना कैलेंडर] --> R[बेहतर प्राप्ति]
  D[दाल दूध बागवानी विविधीकरण] --> R

Conclusion

उत्तर प्रदेश कृषि प्रयास की विफलता नहीं; यह छोटी जोत, जल बेमेल और कमजोर कीमत प्राप्ति का दबाव है। सुधार सिंचाई प्लस भुगतान अनुशासन प्लस बाजार और विविधीकरण है, एक और अलग सब्सिडी घोषणा नहीं।

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  • क्या कम उत्पादन उत्तर प्रदेश कृषि की मूल समस्या है?

    नहीं। उत्पादन बड़ा है। दबाव छोटी जोत, विलंबित गन्ना नकदी, जल चरम और नाशवानों में कमजोर कीमत प्राप्ति है।

  • क्या केवल ऊँचा एमएसपी उत्तर प्रदेश कृषि ठीक करेगा?

    भंडारण, विविधीकरण और मिल भुगतान अनुशासन के बिना एमएसपी मुख्यतः धान-गेहूँ-गन्ना लॉक-इन और राजकोषीय बिल फुलाता है।

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