Revision summary
वन संपदा आवरण गुणवत्ता, जैवविविधता और जलग्रहण है, केवल अंकित क्षेत्र नहीं। पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर आर्द्र वन रखते हैं; प्रायद्वीप शुष्क पर्णपाती; हिमालय शंकुधारी और बांज। मैंग्रोव तटीय वन संसाधन हैं। एफआरए सामुदायिक अधिकार, सही स्थल पर सही प्रजाति, गलियारे और एलपीजी विकल्प मुख्य संरक्षण सिद्धांत हैं। संपदा तब बढ़ती है जब वृद्धि स्टॉक और आजीविका साथ बढ़ें।
Model answer
Introduction
भारत की वन संपदा इमारती लकड़ी, ईंधन, चारा, वन्यजीव और जलग्रहण जल है। वह प्रदेश से असमान है, और संरक्षण सिद्धांतों को केवल अंकित वन प्रतिशत नहीं, गुणवत्ता बढ़ानी होती है।
Body
वन संसाधन
- भारतीय वन सर्वेक्षण आवरण को अत्यंत घन, मध्यम घन और खुले वन में वर्गीकृत करता है, जिससे क्षेत्र और गुणवत्ता भिन्न संसाधन दिखते हैं।
- पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर के उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वन उच्च जैवविविधता और जलग्रहण मूल्य रखते हैं।
- प्रायद्वीप के शुष्क पर्णपाती वन ईंधन और चारा देते हैं किंतु भारी जन दबाव में हैं।
- हिमालय में शंकुधारी और बांज पेटियाँ मिट्टी और हिम-पोषित नदियों की रक्षा करती हैं।
- मैंग्रोव, तट के लिए पहले जैसे, तूफान रक्षा और मत्स्यन के विशेष वन संसाधन हैं।
- अंकित वन हमेशा अच्छी स्टॉक वाला वन नहीं; आग, चराई और अवैध कटाई मानचित्र हरे होने पर भी वृद्धि स्टॉक घटाती हैं।
संरक्षण सिद्धांत
- शेष अखंड खंडों की रक्षा बाद के रोपण से सस्ती है, यही जैवविविधता हॉटस्पॉट में पहला कटौती न करने का सिद्धांत है।
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अधीन सामुदायिक अधिकार संपदा सुधार सकते हैं यदि ग्राम सभाओं को गश्त और उपज में वास्तविक हिस्सा मिले, केवल कागज स्वत्व नहीं।
- संयुक्त वन प्रबंधन और बाद की कम्पा निधि को एक विदेशी खंड नहीं, सही स्थल पर सही प्रजाति लगानी चाहिए।
- वन्यजीव गलियारे और रैखिक परियोजनाओं से खंडन पर रोक जीन प्रवाह रखते हैं, जो भूदृश्य संरक्षण का सिद्धांत है।
- ईंधन और गैर-काष्ठ उपज की सतत कटाई, तथा एलपीजी जैसे विकल्प, खुले वन पर दैनिक भार घटाते हैं।
- आग प्रबंधन, आक्रामक प्रजाति नियंत्रण, और क्षरित खुले वन का पुनर्स्थापन मौजूदा संपदा के भीतर वृद्धि स्टॉक बढ़ाते हैं।
संपदा सुधार
- वन संपदा तब सुधरती है जब घनत्व, प्रजाति मिश्रण और स्थानीय आजीविका साथ बढ़ें, केवल हरित आवरण प्रतिशत उद्धृत होने पर नहीं।
- लोगों को नजरअंदाज करने वाले सिद्धांत असफल होते हैं; पारिस्थितिकी नजरअंदाज करने वाले सिद्धांत बिना वन के रोपण पैदा करते हैं।
Flow diagram
flowchart TD R[वन प्रकार] --> Q[घनत्व जैवविविधता जलग्रहण] P[रक्षा पुनर्स्थापन एफआरए गलियारा एलपीजी] --> W[वृद्धि स्टॉक]
Conclusion
भारत के वन संसाधन आर्द्र घाट और पूर्वोत्तर वनों से शुष्क पर्णपाती, हिमालयी और मैंग्रोव पेटियों तक भिन्न हैं। अखंड वन की रक्षा, क्षरित स्टॉक का पुनर्स्थापन, समुदायों के साथ अधिकार, और गलियारे रखने वाला संरक्षण केवल मानचित्र प्रतिशत से अधिक संपदा सुधारेगा।
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क्या वन-आवरण प्रतिशत बढ़ने का अर्थ संपदा सुधरी है?
स्वयं नहीं। खुला वन, रोपण, और चाय या ताड़ क्षेत्र जोड़ सकते हैं बिना वृद्धि स्टॉक या जैवविविधता जोड़े।
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क्या लोगों का बहिष्कार एकमात्र संरक्षण सिद्धांत है?
नहीं। मूल आवास की कठोर रक्षा बफर भूदृश्य में सामुदायिक अधिकारों के साथ बैठ सकती है। कोई भी चरम असफल होता है।
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