Revision summary
जल संकट जरूरत के सापेक्ष असुरक्षित या अविश्वसनीय जल है, केवल सूखा वर्ष नहीं। उसके मात्रा, गुणवत्ता और पहुँच चेहरे हैं, जिनमें भूजल गिरावट और प्रदूषण शामिल हैं। प्रबंधन को माँग काटनी, जलभृत पुनर्भरने और उपचारित जल पुनः प्रयोग करने चाहिए। जल जीवन नल, सीवेज उपचार और फसल खिसकाव एक ही पैकेज हैं। संस्थाएँ और बेसिन साझेदारी एक बड़े बाँध से अधिक मायने रखती हैं।
Model answer
Introduction
जल संकट लोगों, खेतों और नदियों की जरूरत के सापेक्ष सुरक्षित, विश्वसनीय जल की कमी है। यह केवल सूखा वर्ष नहीं; तब है जब माँग, प्रदूषण और असमान पहुँच संसाधन से आगे चलें। प्रबंधन उपायों को वह अंतर काटना चाहिए।
Body
संकट क्या है
- भौतिक दुर्लभता गिरते भूजल, सिकुड़ते तालाब, और दुबली ऋतु में नीचे की जरूरत न पूरी करने वाली नदियों के रूप में आती है।
- गुणवत्ता संकट फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट, और उसी जलभृत तथा धारा में अनुपचारित सीवेज के रूप में आता है जिससे नगर पीते हैं।
- पहुँच संकट तब आता है जब स्त्रियाँ और गरीब कतार लगाएँ, टैंकर खरीदें, या सिंचाई में अंतिम रहें, भले बेसिन औसत पर्याप्त लगे।
- जलवायु परिवर्तनशीलता, खेतों में धान-गन्ना बाढ़ सिंचाई, और लीक नगरीय पाइप प्रबंधनीय मानसून को उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों और प्रायद्वीप में संकट बना देते हैं।
उपयुक्त प्रबंधन उपाय
- जल को बेसिन मानें: सतही और भूजल का संयुक्त प्रयोग, जलभृत मानचित्रण, और जहाँ स्तर गिर रहा हो अटल भूजल-प्रकार सामुदायिक जल बजट।
- पहले माँग पक्ष: बाढ़ सिंचाई से सूक्ष्म सिंचाई, तनावग्रस्त खंडों में गन्ना-धान अधिकता से कम प्यासी फसलें, और लीक नगर लाइनों से मीटर युक्त मरम्मत आपूर्ति।
- संग्रह और पुनः प्रयोग: तालाब, खेत पोखर, छत वर्षाजल, आर्द्रभूमि पुनरुद्धार, तथा उद्योग और उद्यानों के लिए उपचारित अपशिष्ट जल।
- गुणवत्ता और अधिकार: नदी विसर्जन से पहले सीवेज उपचार, कूप-शीर्ष रक्षा, और जल जीवन मिशन के अधीन घरेलू नल ताकि संकट स्टैंडपोस्ट पर स्त्रियों पर न डाला जाए।
- संस्थाएँ: जल-उपयोगकर्ता संघ, भूजल अधिनियम जो बोरवेल वास्तव में सीमित करें, और अंतर-राज्य नदियों पर मौसमी झगड़े के स्थान पर केंद्र-राज्य साझेदारी।
Flow diagram
flowchart TD C[जल संकट] --> Q[मात्रा गुणवत्ता पहुँच] M[माँग कट पुनर्भरण पुनःप्रयोग] --> S[बेहतर प्रबंधन] I[बेसिन संस्था उपचार] --> S Q --> M
Conclusion
जल संकट मात्रा, गुणवत्ता और पहुँच की एक साथ कमी है। उपयुक्त प्रबंधन बेसिन योजना, माँग कटौती, पुनर्भरण और पुनः प्रयोग, स्वच्छ विसर्जन, तथा निष्पक्ष राशन करने वाली संस्थाएँ हैं—केवल नया बाँध नहीं।
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क्या सूखा जल संकट के समान है?
सूखा मौसम या जल-वैज्ञानिक शुष्क अवधि है। संकट में सामान्य मानसून में भी प्रदूषण, अति-दोहन और अन्यायपूर्ण पहुँच शामिल हैं।
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क्या नदियों को जोड़ने से संकट समाप्त होगा?
अकेले नहीं। माँग कटौती, पुनर्भरण और उपचार के बिना स्थानांतरित जल भी व्यय या प्रदूषित होता है।
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