Revision summary
अपवाहन और घर्षण वायु-अपरदन के दो औजार हैं। गर्त, वेंटिफैक्ट, मशरूम शैल, यार्डंग और मरुस्थलीय फर्श अपरदनात्मक रूप हैं। बरखान, सीफ, अनुप्रस्थ, परवलयिक और तारा टिब्बे निक्षेपणात्मक हैं। लोएस चादरों में वायु-निक्षेपित गाद है। थार अपरदन गर्त और पूरा टिब्बा सूट दोनों दिखाता है।
Model answer
Introduction
वायु वहाँ काम करती है जहाँ वनस्पति पतली हो, अवसाद सूखा और ढीला हो, और दाब प्रवणता रेत तथा धूल चलाए—मुख्यतः गर्म मरुस्थलों और वृष्टि-छाया मैदानों में। अपरदन शैल काटता और महीन उड़ाता है; निक्षेपण टिब्बे और लोएस चादरें बनाता है।
Body
वायु अपरदन भू-आकृतियाँ
- अपवाहन ढीली गाद और रेत उठाकर सतह नीची करता है; ब्लोआउट और अपवाहन गर्त (कुछ बाद में लवण पैन या प्लेया) थार और अन्य शुष्क बेसिन चिह्नित करते हैं।
- घर्षण (रेत-प्रहार) कंकरों को वेंटिफैक्ट में पालिश और फलक देता है तथा मशरूम शैल (गौरा) और ज़्यूजेन काटता है जहाँ कठोर टोपी मुलायम शैल पर बैठे।
- यार्डंग प्रमुख पवन के समांतर धारा-रेखित कटक हैं; मरुस्थलीय फर्श (रेग, गिबर) मोटे पत्थरों का अवशिष्ट है जब महीन उड़ जाए।
- शुष्क भारत में इंसेलबर्ग और अवशिष्ट पहाड़ियाँ अक्सर जोड़-नियंत्रित ग्रेनाइट या बलुआ पत्थर अवशेष हैं लंबे अपवाहन और अपक्षय के बाद, केवल वायु नहीं।
वायु निक्षेपण भू-आकृतियाँ
- रेत टिब्बे मुख्य निक्षेपण सूट हैं: बरखान (अर्धचंद्राकार, सींग पवन की ओर) सीमित रेत के खुले मैदान पर; अनुप्रस्थ कटक जहाँ रेत अधिक; सीफ या अनुदैर्ध्य टिब्बे पवन समांतर; परवलयिक टिब्बे सींग पवन की ओर, अक्सर वनस्पति से स्थिर।
- तारा टिब्बे पवन-दिशा संगम पर बनते हैं; चढ़ते और गिरते टिब्बे कगार लपेटते हैं।
- लोएस मोटी चादरों में वायु-निक्षेपित गाद है (क्लासिक चीन और यूरोप; भारत के मरुस्थल किनारों पर पतली धूल चादरें)।
- टिब्बा मुखों पर रिपल, और फिसलन मुख बिना रेत चादरें, निक्षेपण परिवार पूरा करती हैं।
भारतीय चित्रण
- पश्चिमी राजस्थान और गुजरात का थार बरखान, परवलयिक टिब्बे और अपवाहन गर्त दिखाता है; रण किनारे लवण-अपवाहन समतल जोड़ते हैं।
- प्रक्रिया शुष्क-ऋतु मानसून-पवन और पश्चिमी विक्षोभ रेत चलाना है, फिर संक्षिप्त आर्द्र ऋतु जो झाड़ से परवलयिक रूप स्थिर कर सकती है।
Flow diagram
flowchart TD W[वायु सूखी ढीली रेत] --> E[अपवाहन घर्षण] E --> F[गर्त वेंटिफैक्ट यार्डंग] W --> D[टिब्बे लोएस] D --> T[थार बरखान परवलयिक]
Conclusion
वायु अपरदन अपवाहन गर्त, वेंटिफैक्ट, मशरूम शैल, यार्डंग और अवशिष्ट फर्श बनाता है; वायु निक्षेपण कई योजनाओं के टिब्बे और लोएस बनाता है। थार भारत का दोनों सूट का कार्यशील संग्रहालय है।
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बरखान को सीमित रेत और काफी स्थिर पवन चाहिए। रेत-समृद्ध एर्ग अनुप्रस्थ और सीफ क्षेत्र बनाते हैं।
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क्या मशरूम शैल केवल वायु रूप है?
वायु घर्षण आधार काटता है, किंतु लवण अपक्षय और कठोर टोपी शैल आमतौर पर मदद करते हैं। वायु मुख्य आकारकर्ता है, एकमात्र प्रक्रिया नहीं।
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