Revision summary
धम्मपद और मैत्री सुत्त सिखाते हैं कि द्वेष द्वेष से नहीं मिटता और मैत्री सामाजिक कर्तव्य है। जातक और राजधर्म सुत्त शांति को न्यायपूर्ण शासन और दरिद्रता-निवारण से बाँधते हैं। कलिंग के बाद अशोक के अभिलेख शास्त्रीय अहिंसा को धम्म-विजय बनाते हैं। त्रिपिटक और महायान सूत्र एशिया में साझा नीति के रूप में यात्रा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र वेसाक और आधुनिक संलग्न बौद्ध धर्म उस साहित्य को शांति भाषा के रूप में पुनः प्रयोग करते हैं।
Model answer
Introduction
बौद्ध साहित्य केवल मठीय पिटक नहीं; सुत्त पिटक, धम्मपद, जातक और बाद के महायान सूत्र अहिंसा की सार्वजनिक नीति सिखाते हैं। अशोक के अभिलेखों से संयुक्त राष्ट्र के वेसाक तक वह नीति राज्यों और व्यक्तियों के बीच शांति की शब्दावली रही है।
Body
पिटक: चित्त, वाणी और अहिंसा
- धम्मपद इस दावे से खुलता है कि मन सभी धर्मों से पूर्व है; द्वेष द्वेष से नहीं मिटता, जो वैर, प्रतिशोध और प्रतिशोधी युद्ध के विरुद्ध सीधा साहित्यिक आदेश है।
- मैत्री सुत्त और करणीय गाथाएँ पाठक से माँ के समान सभी भूतों पर मैत्री फैलाने को कहती हैं, जिससे निजी ध्यान सामाजिक शांति-साधना बनता है।
- आर्य अष्टांगिक मार्ग और मध्यम मार्ग भोग-लिप्तता और आत्म-पीड़न दोनों त्यागते हैं, और राजनीति में शून्यवादी हिंसा तथा कठोर हठधर्म दोनों — संयम का साहित्यिक घोषणापत्र।
- बोधिसत्त्व की दान-कथा वाले जातक तथा कूटदंत और चक्रवर्ती-सिंहनाद सुत्त राजाओं को चेताते हैं कि अपराध और युद्ध दरिद्रता और अन्यायपूर्ण शासन से बढ़ते हैं, इसलिए शांति राज्य का आर्थिक और नैतिक कर्तव्य है।
अशोक से विश्व श्रोता तक
- अशोक के प्रमुख शिलालेख, विशेषकर चतुर्थ, तेरहवें और कलिंग पश्चात्ताप, शास्त्रीय अहिंसा को राजनीति में बदलते हैं: भेरीघोष के स्थान पर धम्म-विजय, विलय के स्थान पर दूत।
- त्रिपिटक भिक्षुओं के साथ रेशम मार्ग से चीन, कोरिया, जापान और तिब्बत गया; सद्धर्मपुंडरीक और हृदय सूत्रों के अनुवाद पूर्वी एशियाई संस्कृतियों को पालते हैं जो अभी भी युद्ध-विरोधी अनुष्ठान में उन ग्रंथों का आह्वान करती हैं।
- बीसवीं शताब्दी के चौदहवें दलाई लामा, थिक न्यात हान और ए. टी. अरियारत्ने की सर्वोदय ने निर्वासन कूटनीति, संलग्न बौद्ध धर्म और ग्राम शांति-कार्य में करुणा तथा प्रतीत्यसमुत्पाद की सूत्र भाषा प्रयोग की।
- संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस (1999 संकल्प) और यूनेस्को की विश्व स्मृति सूची बौद्ध पांडुलिपियों को संवाद की विश्व धरोहर मानती है, केवल एशियाई धर्म नहीं।
Flow diagram
flowchart TD C[सुत्त धम्मपद जातक] --> E[मैत्री अहिंसा मध्यम मार्ग] E --> A[अशोक धम्म-विजय] E --> U[वेसाक संयुक्त राष्ट्र संलग्न बौद्ध धर्म] A --> P[विश्व शांति शब्दावली] U[U] --> P[P]
Conclusion
बौद्ध साहित्य शांति की व्याकरण बनाता है — मैत्री, अहिंसा, मध्यम मार्ग, और हिंसा के कारण हटाने का राजकर्तव्य। अशोक, अंतर-एशियाई पिटक, और समकालीन वेसाक कूटनीति दिखाते हैं कि राज्य जब संयम खोजते हैं तो ये पुस्तकें अभी सार्वजनिक भाषा देती हैं।
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क्या बौद्ध साहित्य केवल भिक्षुओं के संसार-त्याग का है?
विनय मठीय है, किंतु राजाओं को दिए सुत्त, जातक और अशोक का धम्म स्पष्टतः नागरिक हैं। यहाँ शांति गृहस्थ और राज्य नीति भी है, केवल निर्वाण-मार्ग नहीं।
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क्या बौद्ध धर्म ने ऐतिहासिक रूप से सभी युद्ध रोके?
नहीं। बौद्ध राज्यों ने युद्ध किए। साहित्य की भूमिका घृणा और विजय के विरुद्ध स्थायी नैतिक शब्दावली है, संघर्ष का जादुई अंत नहीं।
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