Correct answer: (a) केवल 1
व्याख्या
- A
केवल 1
विकल्प (a) यह कहता है कि केवल कथन 1 सही है। यह विकल्प सही ढंग से पहचानता है कि संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत, भारत के महान्यायवादी के पास सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने की योग्यता होनी चाहिए, जबकि कथन 2 गलत है क्योंकि महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- B
केवल 2
विकल्प (b) दावा करता है कि केवल कथन 2 सही है। यह विकल्प गलत है क्योंकि महान्यायवादी को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की तरह महाभियोग की विशेष प्रक्रिया द्वारा नहीं हटाया जाता है।
- C
1 और 2 दोनों
विकल्प (c) यह दावा करता है कि कथन 1 और 2 दोनों सही हैं। यह विकल्प अमान्य है क्योंकि पहला कथन संवैधानिक योग्यता मानदंडों को सटीक रूप से दर्शाता है, जबकि दूसरा कथन गलत तरीके से महान्यायवादी की हटाने की प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान बताता है।
- D
न तो 1 और न ही 2
विकल्प (d) सुझाता है कि न तो कथन 1 और न ही 2 सही है। यह विकल्प गलत है क्योंकि देश के सर्वोच्च विधि अधिकारी को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पहला कथन पूरी तरह से सही है।
Summary. आधिकारिक कुंजी (x) है। आधिकारिक कुंजी (a) केवल 1 है। कथन 1 सही है क्योंकि संविधान यह अनिवार्य करता है कि महान्यायवादी के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यता होनी चाहिए। कथन 2 गलत है क्योंकि महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और उसे किसी भी समय हटाया जा सकता है। उम्मीदवार अक्सर संवैधानिक पदाधिकारियों की कार्यकाल सुरक्षा को महान्यायवादी के साथ भ्रमित कर देते हैं। इसलिए, दिए गए विकल्पों में से केवल पहला कथन सही है।