UPPSC PCS Mains · year-wise PYQ

UPPSC Mains 2018 General Hindi PYQ · Hindi

Official questions in exam order — Section A (8 marks, 125 words) and Section B (12 marks, 200 words). Each answer will sit on one canonical WRAP URL.

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Q1 · UPPSC 2018 · UPHIN · 30 marks · Solution

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए।मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ। जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से बचा न सके, जो उसकी आत्मा को तेजोद्दीप्त न बना सके, जो उसके हृदय को परदुःखकातर और संवेदनशील न बना सके, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है। मैं अनुभव करता हूँ कि हम लोग एक कठिन समय के भीतर से गुजर रहे हैं। आज नाना भाँति के संकीर्ण स्वार्थों ने मनुष्य को कुछ ऐसा अंधा बना दिया है कि जाति-धर्म-निर्विशेष मनुष्य के हित की बात सोचना असंभव हो गया। ऐसा लग रहा है कि किसी विकट दुर्भाग्य के इंगित पर दलगत स्वार्थ-प्रेम ने मनुष्यता को दबोच लिया है। दुनिया छोटे-छोटे संकीर्ण स्वार्थों के आधार पर अनेक दलों में विभक्त हो गई है। अपने दल के बाहर का आदमी संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। उसके रोने-गाने तक पर असदुद्देश्य का आरोप किया जाता है। उसके तप और सत्यनिष्ठा का मजाक उड़ाया जाता है।(क) प्रस्तुत गद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। (5 marks)(ख) साहित्य के लक्ष्य के विषय में उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर विचार कीजिए। (5 marks)(ग) प्रस्तुत गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए। (20 marks)

Q2 · UPPSC 2018 · UPHIN · 30 marks · Solution

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर निर्देशानुसार उत्तर लिखिए।परिवर्तन से हम बच नहीं सकते। परिवर्तन से बचना अगति और दुर्गति को आमंत्रित करना है। यद्यपि स्थिरता में किसी अंश में सुरक्षा है, तथापि बिना जोखिम लिए आगे नहीं बढ़ा जाता है। नियमों की स्थिरता जो विज्ञान में है और स्फूर्तिमय जीवन की गतिशीलता जो साहित्य में है, दोनों के बीच का हमें संतुलित मार्ग खोजना है। जीवन के संतुलनों में नए और पुराने का संतुलन भी विशेष महत्व रखता है। संसार की गतिशीलता के साथ हमको भी गतिशील होना पड़ेगा, किंतु आँखें खोलकर। नवीन के लिए हम अपने मनमंदिर का द्वार सदा खुला रखें, पूर्वाग्रहों से काम न लें। उसके पक्ष और विपक्ष की युक्तियों को न्याय की तुला पर तौलें। एक सीमा के भीतर नए प्रयोगों को भी अपने में स्थान दें, किंतु केवल नवीनता के प्रमाण-पत्र मात्र से संतुष्ट न हो जाएं। जिस तर्कबुद्धि को हम प्राचीन प्रथाओं के उन्मूलन में लगाते हैं उसी निर्मम तर्क को नवीन के परीक्षण में भी लगावें किंतु नवीन को भूत की भाँति भय का कारण न बनावें।(क) प्रस्तुत गद्यांश को उचित शीर्षक दीजिए। (5 marks)(ख) प्राचीन और नवीन में संतुलन क्यों आवश्यक है? विचार कीजिए। (5 marks)(ग) प्रस्तुत गद्यांश का संक्षेपण कीजिए। (20 marks)

Q3 · UPPSC 2018 · UPHIN · 20 marks · Solution

Q6 · UPPSC 2018 · UPHIN · 10 marks · Solution

Q8 · UPPSC 2018 · UPHIN · 30 marks · Solution