Revision summary
1866 से प्रयागराज स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय पूरे उत्तर प्रदेश को कवर करता है। लखनऊ खंडपीठ अवध जिलों की सेवा करती है। अनुच्छेद 226 की रिटें मौलिक अधिकारों की मुख्य रक्षा हैं। न्यायिक समीक्षा और जनहित समता तथा स्वतंत्रता को राज्य प्रशासन तक ले जाते हैं। भारी लंबित भार उस भूमिका की व्यावहारिक सीमा है।
Model answer
Introduction
इलाहाबाद न्यायपीठ, अब प्रयागराज में बैठती हुई, पूरे उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय है। चर्चा में क्षेत्रीय अधिकार, लखनऊ खंडपीठ, और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाला रिट कार्य आना चाहिए।
Body
क्षेत्राधिकार
- न्यायालय 1866 में स्थापित हुआ; मुख्य पीठ प्रयागराज में है।
- अनुच्छेद 226 और 227 के अधीन दीवानी, फौजदारी और रिट मामलों में इसका अधिकार पूरे उत्तर प्रदेश पर है।
- लखनऊ खंडपीठ पुराने अवध जिलों के मामले सुनती है, इसलिए मध्य यूपी के वादियों को हमेशा प्रयागराज नहीं जाना पड़ता।
- नवंबर 2000 तक इसमें वे पहाड़ी जिले भी थे जो उत्तराखंड बने; वह क्षेत्र अब अलग उच्च न्यायालय का है।
संवैधानिक मूल्य
- अनुच्छेद 226 की बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा रिटें अवैध निरोध, मनमानी कार्यपालिका और मौलिक अधिकार भंग के विरुद्ध दैनिक उपकरण हैं।
- गंगा प्रदूषण, कारागार, चुनाव और सेवा विधि पर जनहित याचिकाओं ने इस न्यायालय को विशाल जनसंख्या के अधिकार मंच के रूप में प्रयुक्त किया है।
- राज्य विधियों और सरकारी आदेशों की न्यायिक समीक्षा यूपी के भीतर समता, स्वतंत्रता और संघीय संतुलन की परीक्षा करती है।
सीमा
- विलंब, रिक्तियाँ और बहुत बड़ा लंबित भार अधिकारों को कमजोर कर सकता है, भले कागज पर क्षेत्राधिकार पूरा हो।
Flow diagram
flowchart TD HC[इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रयागराज] --> UP[सभी यूपी जिले] HC --> LB[लखनऊ खंडपीठ अवध] HC --> W[अनुच्छेद 226 रिट] W --> V[संवैधानिक मूल्य]
Conclusion
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय, अपनी लखनऊ खंडपीठ के साथ, राज्यव्यापी क्षेत्राधिकार रखता है और संवैधानिक मूल्यों को मुख्यतः अनुच्छेद 226 रिटों तथा न्यायिक समीक्षा से थामता है। भूमिका वहाँ वास्तविक है जहाँ आदेश समय पर हों; बैकलॉग स्थायी जोखिम है।
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Next question in the 2025 paper (Q7). View answer →
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क्या लखनऊ का अलग उच्च न्यायालय है?
नहीं। लखनऊ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ है, दूसरा उच्च न्यायालय नहीं।
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न्यायालय संवैधानिक मूल्य कैसे थामता है?
मुख्यतः रिट, राज्य कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा, तथा अधिकार और पर्यावरण पर जनहित मामलों से।
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2024 · Q6 · UPGS5 · 8 marks
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