Revision summary
2018 यूपी स्वास्थ्य नीति ने सार्वभौम पहुँच, प्राथमिक रोकथाम, मानव संसाधन और कम जेब-से-खर्च निर्देश दिए। एनएचएम, आशा–एएनएम और एम्बुलेंस नेटवर्क मानी गई आपूर्ति मशीन हैं। आयुष्मान भारत एचडब्ल्यूसी और पीएम-जेएवाई नीति की प्राथमिक-प्लस-बीमा डिज़ाइन से मेल खाते हैं। 2017–18 के बाद मेडिकल कॉलेज विस्तार ढाँचा निर्देश का अनुसरण करता है; सीट या करोड़ आँकड़े न गढ़ें। आलोचनात्मक खाई रिक्तियाँ, दवा स्टॉक, प्रसव कक्ष गुणवत्ता और नगर गरीब आवरण है।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 ने व्यापक पहुँच, मजबूत प्राथमिक देखभाल, बेहतर मातृ-शिशु परिणाम, और कम दरिद्र करने वाला जेब-से-खर्च दिशा रखी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 से संरेखित। परीक्षण को बाद के मेडिकल कॉलेज, आयुष्मान और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर काम को उसी नीति की पाइपलाइन पढ़ना चाहिए, गढ़ी करोड़ राशियों के बिना।
Body
2018 के नीति निर्देश
- व्यापक और अधिक समतामूलक पहुँच, विशेषकर वंचित बुंदेलखंड, पूर्वांचल और नगर किनारे झुग्गियों में, केवल तृतीयक लखनऊ अस्पतालों से नहीं, घने सार्वजनिक सुविधा जाल से।
- रोकथाम और प्राथमिक देखभाल की ओर खिसकाव: टीकाकरण, पोषण, स्वच्छता जोड़, गैर-संचारी रोग जाँच, और पहला द्वार के रूप में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर।
- मानव संसाधन और ढाँचा: अधिक चिकित्सा, नर्सिंग और पैरामेडिकल सीटें, भरे पीएचसी–सीएचसी–जिला अस्पताल पद, अग्रिम पंक्ति पर दवा और निदान।
- गुणवत्ता, रेफरल और मिश्रित प्रावधान: प्रसव कक्ष प्रोटोकॉल, विनियमन के साथ निजी साझेदारी, और बीमा ताकि गरीब घर एक शल्य से भूमि बिक्री पर न हो।
उसी पाइपलाइन में प्रयास और पहल
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आपूर्ति बस रहता है: आशा, एएनएम, 108/102 एम्बुलेंस, टीकाकरण सप्ताह, और जिला स्वास्थ्य समितियाँ जिन्हें 2018 नीति मजबूत मानती थी, बदलती नहीं।
- यूपी में आयुष्मान भारत के दो 2018-संगत भुजाएँ हैं: व्यापक प्राथमिक देखभाल के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, और पात्र गरीब परिवारों का पीएम-जेएवाई द्वितीयक–तृतीयक आवरण।
- राज्य ने 2017–18 के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल फैलाए ताकि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी से परे जनपद डॉक्टर प्रशिक्षित करें और भार लें—यह नीति का ढाँचा निर्देश है, भले वर्षवार सीट आँकड़े आधिकारिक तालिका के हों, अनुमान संख्या के नहीं।
- मातृ-शिशु कार्यक्रम (संस्थागत प्रसव, विशेष नवजात देखभाल, एनीमिया कार्य) और संचारी रोग नियंत्रण उसी 2018 जोर में बैठते हैं जो केवल नई इमारत नहीं, परिणाम संकेतक माँगता है।
परीक्षण
- उच्च भार, उच्च जनसंख्या राज्य के लिए दिशा सही है: पहले प्राथमिक, फिर बीमा और कॉलेज।
- ईमानदार परीक्षा को नामित खाइयाँ: सीएचसी पर विशेषज्ञ रिक्तियाँ, असमान एचडब्ल्यूसी, जेब-से दवा खर्च, नगर गरीब नगरपालिका और राज्य प्रणालियों के बीच, और एमएमआर/आईएमआर जिन्हें नारे से अधिक प्रसव कक्ष गुणवत्ता चाहिए।
- बीमा पैकेजों का निजी कैद और कमजोर शिकायत निवारण 2018 के समता वचन को खाली कर सकते हैं।
- निर्णय: 2018 प्रयोग योग्य कम्पास है; एचडब्ल्यूसी, चिकित्सा शिक्षा और पीएम-जेएवाई पर प्रयास वास्तविक हैं; परीक्षा भरे पद, पीएचसी पर दवा, और अंतिम ब्लॉक में सुरक्षित प्रसव है, अकेले नीति पीडीएफ नहीं।
Flow diagram
flowchart TD Pol[स्वास्थ्य नीति 2018] --> PHC[प्राथमिक एचडब्ल्यूसी रोकथाम] Pol --> HR[कॉलेज स्टाफ दवा] Pol --> Fin[पीएमजेएवाई कम जेब खर्च] PHC --> Out[आईएमआर एमएमआर एनसीडी] HR[HR] --> Out[Out] Fin[Fin] --> Out[Out]
Conclusion
यूपी स्वास्थ्य नीति 2018 ने राज्य को प्राथमिक देखभाल, समता, मानव संसाधन और वित्तीय सुरक्षा की ओर इंगित किया। बाद के एचडब्ल्यूसी, कॉलेज विस्तार, एनएचएम और आयुष्मान काम उसी कम्पास का अनुसरण करते हैं। परीक्षण सीएचसी–पीएचसी पर अधूरी आपूर्ति और पिछड़े जनपदों में अभी ऊँचा मातृ-नवजात जोखिम है।
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क्या उत्तर 2018 बजट करोड़ में उद्धृत करे?
नहीं जब तक आधिकारिक आँकड़ा न हो। निर्देश लिखें: प्राथमिक देखभाल, मानव संसाधन, बीमा और समता।
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क्या 2018 नीति ने एनएचएम बदल दिया?
नहीं। उसने राज्य दिशा सेट की। एनएचएम और बाद का आयुष्मान मुख्य क्रियान्वयन वाहन हैं।
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