Revision summary
पूर्वी उत्तर प्रदेश घना ग्रामीण, बाढ़-प्रवण और पश्चिमी दोआब से औद्योगिक रूप से पतला है। छोटी जोत और पलायन श्रम पश्चिम भेजते हैं, स्थानीय अधिशेष नहीं बनाते। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक ट्रंक कनेक्टिविटी बाध्यकारी बाधा रही। उपाय एक्सप्रेसवे और बिजली, बाढ़ निकासी, ओडीओपी कृषि-उद्योग और कॉलेज हैं। रक्षा-गलियारा और एमएसएमई नोड को गाँव के पास नौकरियाँ चाहिए, केवल नोएडा में नहीं।
Model answer
Introduction
पूर्वी उत्तर प्रदेश — घाघरा–राप्ती पट्टी से बिहार सीमा तक पूर्वांचल — घना बसा, बाढ़-प्रवण और पश्चिमी दोआब की तुलना में ऐतिहासिक रूप से पतला उद्योग वाला है। तुलनात्मक कम विकास एक गायब कारखाना नहीं। यह जलविज्ञान, जोत, मानव पूँजी और ट्रंक ढाँचे की लंबी प्रतीक्षा साथ हैं।
Body
कारक
- जनसांख्यिकी और भूमि: अत्यंत उच्च ग्रामीण घनत्व छोटी, खंडित जोतों पर; अतिरिक्त श्रम और पतला कृषि अधिशेष स्थानीय पूँजी निर्माण नहीं वित्तपोषित कर सकते।
- बाढ़ और निकासी: घाघरा, राप्ती, गंडक और मानसून बैकवाटर खरीफ मारते हैं, घरों में गाद भरते हैं, और निजी निवेशकों को पट्टी मौसमी जोखिम मानने देते हैं।
- पश्चिम की तुलना में औद्योगिक अंतर: कानपुर–गाजियाबाद–नोएडा ने मिल, अभियांत्रिकी और बाद में आईटी लिया; पूर्व श्रम-निर्यातक पृष्ठ बना रहा, कम बड़े निजी संयंत्रों के साथ।
- मानव पूँजी: कमजोर अधिगम परिणाम, प्रति लाख कम गुणवत्ता कॉलेज और अस्पताल, तथा युवाओं का मुंबई, दिल्ली और खाड़ी की ओर उच्च पलायन।
- हाल तक कनेक्टिविटी: सच्चे पूर्व–पश्चिम एक्सप्रेस रीढ़ की लंबी प्रतीक्षा; रेल और बिजली गुणवत्ता भी दोआब से पीछे रही।
- नगरीकरण और सेवाएँ: गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज द्वीप हैं; ग्रामीण ब्लॉक में अभी थोक बाजार, कोल्ड चेन और ऋण गहराई कम है।
- शासन भार: प्रति अधिकारी अधिक परिवार, बाढ़ राहत आवर्ती बजट, और संयंत्रों के लिए धीमी भूमि जुटाव।
उपाय
- ट्रंक ढाँचा: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (2021 में खुला), रेल माल और विश्वसनीय बिजली ताकि आजमगढ़ या मऊ में संयंत्र लॉजिस्टिक्स दंड के बिना बैठ सके।
- कृषि-उद्योग और ओडीओपी: चावल, केला, काला चावल और शिल्प क्लस्टर मिल भुगतान अनुशासन और फूड पार्क के साथ, केवल पश्चिम को कच्चा अनाज निर्यात नहीं।
- बाढ़ प्रबंधन: केवल राहत नहीं, तटबंध साथ निकासी; आर्द्रभूमि और नदी-कक्ष ताकि अगला मानसून वार्षिक कारखाना बंद न हो।
- मानव पूँजी: मेडिकल कॉलेज, स्थानीय व्यापार से जुड़े आईटीआई, और विश्वविद्यालय जो पलायन-प्रवण युवा को घर पर एक अतिरिक्त वर्ष रखें।
- रक्षा और औद्योगिक नोड: उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे के पूर्वी नोड, एमएसएमई पार्क, और पर्यटन (काशी, बौद्ध, रामायण सर्किट) गैर-कृषि नियोक्ता के रूप में।
- लक्षित सार्वजनिक निवेश: पूर्वांचल विकास निधि, गोरखपुर–वाराणसी में नगरीय सेवाएँ, और महिलाओं का काम ताकि समावेश स्थानीय हो, मनीऑर्डर नहीं।
पूर्व तब विकसित होता है जब जल प्रबंधित हो और गाँव से एक दिन की बस में नौकरी हो, जब पश्चिम तेज बढ़े तब नहीं।
Flow diagram
flowchart TD D[ऊँचा घनत्व छोटी जोत] --> L[पिछड़ता पूर्वी यूपी] F[बाढ़ घाघरा राप्ती] --> L I[पश्चिम से पतला उद्योग] --> L M[पलायन] --> L E[पूर्वांचल एक्सप्रेसवे] --> J[स्थानीय नौकरियाँ] O[ओडीओपी फूड पार्क कौशल] --> J J --> R[पकड़]
Conclusion
पूर्वी उत्तर प्रदेश इसलिए पीछे रहा क्योंकि घनत्व, बाढ़, छोटी जोत, पतला उद्योग और पलायन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी अंतर को संयोजित किया। उपाय पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बिजली, बाढ़ नियंत्रण, ओडीओपी कृषि-उद्योग, कौशल व कॉलेज, तथा रक्षा-एमएसएमई नोड हैं। यहाँ विकास जलविज्ञान साथ नौकरियाँ है, केवल पूर्वांचल गर्व का नारा नहीं।
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क्या पूर्वी उत्तर प्रदेश केवल बाढ़ से गरीब है?
बाढ़ मायने रखती है, पर छोटी जोत, पतला उद्योग और देर ट्रंक सड़कें समान बाध्यकारी हैं।
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क्या एक्सप्रेसवे काफी होगा?
वह आवश्यक है, पर्याप्त नहीं। उस रीढ़ पर संयंत्र, कौशल और बाढ़ निकासी बैठनी चाहिए।
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