Revision summary
गरीबी और असमानता इसलिए टिकती हैं क्योंकि वृद्धि नौकरी-पतली रही और अनौपचारिक काम जोखिम भरा है। जाति, जनजाति, लिंग और पिछड़े क्षेत्र औसत जीडीपी उठने के बाद भी समूह अंतर रखते हैं। पोषण और स्कूल-अधिगम असफलता गरीबी को अगली पीढ़ी में पुनर्चक्रित करती है। अंतिम-मील रिसाव और संपत्ति का पतला कर अंतरण और पुनर्वितरण कुंद करते हैं। गरीबी रेखा पर माप लड़ाई उस भूख को छुपा सकती है जिसे लगभग 0.35 की गिनी नहीं दिखाती।
Model answer
Introduction
भारत ने दशकों में चरम नितांत गरीबी काटी, फिर भी लाखों पोषण, काम और परिसंपत्ति में गरीब हैं, और संपत्ति की असमानता लगभग 0.35 के उपभोग गिनी से तेज है। चुनौती गायब नारा नहीं है। वह श्रम बाजार, अंतिम-मील राज्य और सामाजिक पदानुक्रम है जो फर्श को सीढ़ी बनने नहीं देते।
Body
श्रम और वृद्धि की संरचना
- वृद्धि सेवा- और पूँजी-भारी रही; नियमित कारखाना और औपचारिक पेरोल ने युवाओं को उत्पादन जितनी तेजी से नहीं सोखा।
- शहरों सहित अनौपचारिक और आकस्मिक काम का अर्थ है कि अस्पताल बिल या मानसून किसी भी गरीबी रेखा के नीचे परिवार धकेल सकता है।
- महिलाओं की नीची वैतनिक भागीदारी और अवैतनिक देखभाल परिवार की कमाई शक्ति सिकोड़ती हैं भले जीडीपी स्वस्थ दिखे।
समूह, क्षेत्र और मानव पूँजी
- एससी, एसटी, कुछ अल्पसंख्यक और दिव्यांग औसत पर गरीब रहते हैं; जाति और वन भूगोल अंतरण के बाद अवशिष्ट नहीं हैं।
- पूर्वी और वर्षा-आधारित जिले तटीय और मेट्रो भारत से पीछे हैं; प्रवास मुकाबला रणनीति है, बंद अंतर नहीं।
- स्टंटिंग, एनीमिया और कमजोर स्कूल-अधिगम का अर्थ है बच्चा गरीबी आँकड़े से निकले और कम-मजदूरी वयस्क के रूप में लौटे।
वितरण, राजकोष और माप
- पीडीएस, पेंशन और छात्रवृत्ति रिसाव करते हैं या असूचीबद्ध को छोड़ते हैं; आधार मदद करता है और सीडिंग असफल हो तो सच्चे नाम भी गिराता है।
- शीर्ष पर प्रगतिशील कर वसूली भूमि और इक्विटी में संपत्ति संकेन्द्रण के सापेक्ष पतली है।
- गरीबी रेखाएँ (तेंदुलकर, रंगराजन) और असमानता माप लड़ते हैं; नीची रेखा बिना भरे थाली के सफलता गढ़ती है।
- जलवायु झटके, स्वास्थ्य महामारी और शहरी आवास लागत पुरानी योजनाओं के पुराने गरीब सेवानिवृत्त करने से तेज नए गरीब बनाते हैं।
गरीबी और असमानता साथ घटाना इसलिए नौकरियाँ plus सेवाएँ plus ईमानदार मानचित्र चाहता है, केवल मोटा राशन नहीं।
Flow diagram
flowchart TD J[नौकरी पतली अनौपचारिक काम] --> P[चिपचिपी गरीबी] G[जाति क्षेत्र लिंग अंतर] --> P H[पोषण अधिगम] --> P L[रिसाव सूची कर पतला] --> I[चिपचिपी असमानता] M[रेखा बहस जलवायु झटका] --> P P[P] --> I[I]
Conclusion
प्रमुख चुनौतियाँ नौकरी-पतली वृद्धि, अनौपचारिक जोखिम, समूह और क्षेत्रीय अंतर, पोषण और अधिगम असफलता, रिसाव वाली अंतिम-मील सूचियाँ, कमजोर संपत्ति कर, और विवादित गरीबी रेखाएँ हैं। लगभग 0.35 का उपभोग गिनी समान जीवन-अवसर का प्रमाण नहीं है। गरीब तब निकलते हैं जब काम और सार्वजनिक वस्तुएँ टिकें, रेखा जब फिर खींची जाए नहीं।
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यदि जीडीपी बढ़े तो क्या गरीबी गायब होगी?
नहीं यदि नौकरियाँ अनौपचारिक हों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व स्कूल असफल हों। औसत उठ सकते हैं जबकि समूह पीछे रहें।
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क्या असमानता केवल गरीबी रेखा के बारे में है?
नहीं। कम लोग कैलोरी रेखा के नीचे बैठें तब भी संपत्ति, भूमि और शीर्ष आय संकेन्द्रित हो सकती हैं।
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