Revision summary
यूपीएसडीएम 2013 का राज्य मिशन है जो आईटीआई, अल्पकालिक पाठ्यक्रम और केन्द्रीय योजनाओं का समन्वय करता है। प्रावधान युवा और वंचित समूह, एनएसक्यूएफ प्रमाणन, जनपद माँग मैप और नियोजन सहायता कवर करते हैं। 2013 के बाद नामांकन बढ़ा पर नियमित नियोजन और जनपद गुणवत्ता कमजोर रहे। योजना दोहराव और पिछड़े क्षेत्रों में पतला उद्योग परिणाम सीमित करते हैं। परीक्षा भरोसेमंद प्रमाण पत्र और टिकी नौकरी है, प्रशिक्षण-गिनती प्रेस नोट नहीं।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) राज्य की छतरी है ताकि बड़ी कार्य-आयु आबादी केवल स्कूल-छाँट आँकड़ा न रहे, रोजगार-योग्य बने। 2013 में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधीन शुरू, यह राज्य आईटीआई, अल्पकालिक पाठ्यक्रम और केन्द्रीय योजनाओं को एक लक्ष्य से जोड़ता है: प्रमाणित, काम-तैयार श्रमिक। 2018 प्रश्न इसलिए कानूनी-प्रशासनिक प्रावधान और जमीन पर ईमानदार प्रस्थिति दोनों माँगता है।
Body
यूपीएसडीएम के प्रमुख प्रावधान
- यूपीएसडीएम मिशन-मोड राज्य निकाय है जो अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण, आईटीआई-पॉलिटेक्निक पाइपलाइन और पीएमकेवीवाई तथा डीडीयू-जीकेवाई जैसी केन्द्रीय खिड़कियों का समन्वय करता है, एक अलग कोर्स सूची नहीं चलाता।
- लक्ष्य समूह मुख्यतः युवा (ड्रॉपआउट सहित), महिलाएँ, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक और दिव्यांग हैं, उन जनपदों पर जोर के साथ जहाँ प्रवासी श्रम जाता है।
- प्रशिक्षण सरकारी आईटीआई, गुणवत्ता मानदंड पर सूचीबद्ध निजी भागीदारों और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम सहयोगियों से होता है; आकलन राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे की भूमिकाओं पर प्रमाणन सहित।
- जनपद कौशल समितियाँ और रोजगार कार्यालय स्थानीय माँग — निर्माण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली, आतिथ्य, रसद, ग्रामीण सेवाएँ — मैप करें ताकि पाठ्यक्रम केवल दिल्ली सूची की नकल न हों।
- प्रावधानों में परामर्श, चयनित केन्द्रों में आवास, प्रशिक्षण-पश्चात नियोजन सहायता, और पूर्व शिक्षण की मान्यता शामिल है ताकि अनौपचारिक कौशल वाले श्रमिक को प्रमाण पत्र मिले।
- शिक्षुता, मुद्रा-प्रकार स्वरोजगार और उद्योग क्लस्टर से अभिसरण मिशन डिजाइन में लिखा है ताकि प्रमाण पत्र मजदूरी या सूक्ष्म उद्यम का पुल हो, दीवार का कागज नहीं।
क्रियान्वयन की प्रस्थिति (2018 पाठ)
- 2013 के बाद नामांकन और प्रमाणन बढ़े क्योंकि मिशन ने अनेक अल्पकालिक बैच और निजी भागीदार खोले; राज्य बड़ा प्रशिक्षित शीर्ष दिखा सका।
- नियोजन और टिकाव कमजोर आधा रहे: कई प्रमाण पत्र विज्ञापित मजदूरी की नियमित नौकरी नहीं बने, उद्योग ने पाठ्यक्रम अंतर और कम कार्यशाला घंटे की शिकायत की।
- गुणवत्ता जनपदों में असमान रही; पश्चिमी और एनसीआर-सटे पट्टी ने प्रशिक्षु जल्दी सोखे, बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नियोक्ता और प्रशिक्षक पतले रहे।
- समानांतर योजनाओं ने दोहराव और रिपोर्ट शोर पैदा किया; अभिसरण केवल कागज पर हो तो एक प्रशिक्षु एक से अधिक खिड़की में गिना जा सकता था।
- महिलाओं की भागीदारी और आवासीय सुविधा चयनित व्यवसायों में सुधरी पर रात्रि पाली और कारखाना भूमिकाओं में सुरक्षित परिवहन और छात्रावास अभी पीछे थे।
- 2018 की ईमानदार प्रस्थिति इसलिए मिश्रित है: वास्तुकला और पैमाना थे; मजदूरी रोजगार, एनएसक्यूएफ सत्यता और पिछड़े जनपद कवरेज अभी परीक्षा थे।
यूपीएसडीएम के प्रावधान समन्वय मिशन के रूप में ठोस हैं। क्रियान्वयन सफलता बैच फोटो नहीं; रखा गया कामगार या प्रमाणित कारीगर है जो अपना काम कीमत कर सके।
Flow diagram
flowchart TD M[यूपीएसडीएम 2013] --> T[आईटीआई पीएमकेवीवाई भागीदार] D[जनपद माँग मानचित्र] --> T T --> C[एनएसक्यूएफ आकलन प्रमाणन] C --> J[मजदूरी या सूक्ष्म उद्यम] Q[गुणवत्ता नियोजन अंतर] --> J
Conclusion
यूपीएसडीएम (2013) जनपद माँग मानचित्र और सूचीबद्ध भागीदारों से एनएसक्यूएफ-संरेखित अल्पकालिक प्रशिक्षण, आईटीआई और केन्द्रीय कौशल खिड़कियों का समन्वय करता है। 2018 तक मिशन के पास पैमाना और कानूनी-प्रशासनिक ढाँचा था, पर नियोजन गुणवत्ता, जनपद असमानता और योजना दोहराव ने परिणाम सीमित किया। जमीन पर जो प्रावधान मायने रखता है वह प्रमाण पत्र है जिस पर नियोक्ता भरोसा करे।
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क्या यूपीएसडीएम केवल आईटीआई विभाग का नया नाम है?
नहीं। यह मिशन आईटीआई, अल्पकालिक भागीदारों और केन्द्रीय योजनाओं को एक राज्य कौशल छतरी के अधीन समन्वित करता है।
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क्या ऊँची प्रशिक्षित-गिनती मिशन की सफलता है?
नहीं। सफलता नियोजन, टिकाव और एनएसक्यूएफ गुणवत्ता है, जो 2018-कालीन समीक्षाओं में नामांकन से पीछे रही।
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