Revision summary
NEP 1991 ने व्यापार-निवेश उदार किया और सार्वजनिक क्षेत्र को आजीवन नियोक्ता के रूप में घटाया। वीआरएस, ठेका और आयात प्रतिस्पर्धा से संगठित कारखाना और पीएसयू नौकरियाँ पतली हुईं। अनौपचारीकरण और ठेका श्रम श्रमिक वर्ग का जन अनुभव बना। सेवा, निर्माण और कुछ निर्यात पंक्तियों ने पुरानी संघ सुरक्षा बिना काम पैदा किया। मनरेगा और बाद के डीबीटी ने ग्रामीण फर्श दिए, स्थानापन्न कारखाना कल्याण राज्य नहीं। 2019-20 के बाद श्रम संहिताएँ क़ानून सरल करने का प्रयास हैं; गिग और असंगठित कवर खुला सिरा रहता है।
Model answer
Introduction
1991 की नई आर्थिक नीति ने व्यापार खोला, पूँजी बुलाई और सार्वजनिक क्षेत्र की डिफ़ॉल्ट नियोक्ता भूमिका घटाई। श्रमिक वर्ग — कारखाना मजदूर, सार्वजनिक उद्यम कर्मी, शहरों में गिरता कृषि श्रम और बाद के गिग कर्मी — उस शिफ्ट का पादटिप्पण नहीं था। वही वर्ग था जिसके अनुबंध, संघ और नौकरी सुरक्षा फिर लिखे गए।
Body
श्रम बाजार में NEP ने क्या बदला
- उदारीकरण ने औद्योगिक लाइसेंस काटा और आयात खोला; संरक्षण के पीछे जी रही फर्मों ने स्थायी रोल घटाए या बंद हुईं, जिससे संगठित विनिर्माण पहले मारा गया।
- निजीकरण और विनिवेश ने यह धारणा समाप्त की कि सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरी औद्योगिक श्रमिक के लिए आजीवन कल्याण राज्य है; वीआरएस और भर्ती रोक ने संघबद्ध रोजगार पतला किया।
- वैश्वीकरण ने भारत को निर्यात परिधान, रत्न, ऑटो पुर्जे और आईटी-सक्षम सेवाओं में खींचा, जिसने प्रायः ठेका, आकस्मिक या व्हाइट-कॉलर काम पैदा किया, पुराना कारखाना बैज नहीं।
श्रमिक वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव
- अनौपचारीकरण केंद्रीय तथ्य है: दस में नौ से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा से बाहर रहते हैं, और संगठित कारखाने का कुल रोजगार हिस्सा जन फोर्डिस्ट मध्य नहीं बना।
- औपचारिक फर्मों के भीतर ठेका श्रम और निश्चित-अवधि भर्ती फैली, इसलिए “संगठित क्षेत्र” अब सुरक्षित श्रम नहीं रहा; ठेका श्रम अधिनियम नया सामाजिक अनुबंध नहीं, खिंचाव बना।
- कुछ औद्योगिक चरणों में रोजगार-विहीन या रोजगार-गरीब वृद्धि का अर्थ था जीडीपी अच्छी नौकरियों से तेज बढ़ी, जिसे श्रमिक वर्ग ने अल्परोजगार और ग्रामीण वापसी प्रवास के रूप में भोगा।
- अनेक निजी संयंत्रों में ट्रेड यूनियन घनत्व गया; सामूहिक सौदेबाजी सार्वजनिक उद्यम, बैंक और कुछ बड़े निजी घरानों के द्वीपों तक सिमटी।
- निर्यात कारखानों और घरेलू काम में महिलाओं को नकद मिला किंतु मातृत्व, क्रèche या समान पर्यवेक्षण नहीं; भेद्यता लिंगबद्ध रही।
- 2015 के बाद चार श्रम संहिताओं ने सरलीकरण वचन दिया; श्रमिक वर्ग के आलोचक आसान भर्ती-निकासी सीमाएँ और गिग तथा असंगठित के लिए अभी अधूरी सामाजिक सुरक्षा पढ़ते हैं।
वे लाभ जो उसी स्पष्टीकरण में बैठने चाहिए
- सेवाओं और निर्माण ने लाखों को सोखा, इसलिए कारखाना संघ घटने पर भी निरपेक्ष गरीबी गिर सकी।
- कुछ ग्रामीण और निर्माण बाजारों में वृद्धि, ग्रामीण फर्श के रूप में मनरेगा (2005) और बाद के डीबीटी से वास्तविक मजदूरी बढ़ी; वह औद्योगिक सुरक्षा के समान नहीं, किंतु उसी वर्ग पर प्रभाव है।
- आईटी, लॉजिस्टिक्स और निर्यात विनिर्माण में कुशल अल्पसंख्यक को वैश्विक मजदूरी मिली; श्रमिक वर्ग साथ नहीं उठा, बँटा।
एक पंक्ति में स्पष्टीकरण
- NEP ने सुरक्षित सार्वजनिक और कारखाना नौकरियाँ घटाकर, अनौपचारिक और ठेका काम फैलाकर, तथा सेवाओं में असमान नया रोजगार देकर श्रम को काफी प्रभावित किया — LPG का संरचनात्मक, आकस्मिक नहीं, परिणाम।
Flow diagram
flowchart TD NEP[NEP 1991 LPG] --> P[पीएसयू पतला और वीआरएस] NEP --> I[अनौपचारिक और ठेका श्रम] NEP --> S[सेवा और निर्यात नौकरियाँ] I --> L[श्रमिक वर्ग विभाजन] S --> L
Conclusion
नई आर्थिक नीति ने काम को संरक्षित, संघबद्ध सार्वजनिक विनिर्माण से अनौपचारिक, ठेका और सेवा नौकरियों की ओर पुनर्आवंटित किया। श्रमिक वर्ग को कुछ रोजगार और ग्रामीण मजदूरी फर्श मिले और पुरानी सुरक्षा का बड़ा भाग गया। वही दोहरी गति कथन का महत्वपूर्ण प्रभाव है।
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क्या NEP ने श्रम को केवल चोट पहुँचाई?
नहीं। उसने सुरक्षित संगठित नौकरियाँ चोट पहुँचाई और अनौपचारिक काम फैलाया, किंतु सेवाएँ और कुछ वास्तविक मजदूरी भी बढ़ीं। प्रभाव इसलिए महत्वपूर्ण है कि वर्ग बँटा।
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क्या चार श्रम संहिताएँ NEP 1991 के समान हैं?
नहीं। वे श्रम क़ानून का बाद का सरलीकरण हैं। आलोचक उन्हें अभी 1991 शुरू लचीलापन तर्क पूरा करना पढ़ते हैं।
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