Q7 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2024 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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भारतीय प्रशासनिक विकास में नागरिक समाज की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

विषय: NGOs, SHGs and associations. पाठ्यक्रम: Development processes — role of NGOs, SHGs, various groups and associations. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2024 और NGOs, SHGs and associations से।

Revision summary

नागरिक समाज संघों और आंदोलनों के रूप में नागरिकों और प्रशासन के बीच बैठता है। एमकेएसएस-सदृश अभियानों ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 बनाने में मदद की। सामाजिक अंकेक्षण और लोकहित याचिका विभागों को गाँव और न्यायालय में जवाब देते हैं। एनजीओ स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका प्रदाय में भी साझेदार हैं। सीमाओं में अप्रतिनिधिक कब्जा, एफसीआरए बाधाएँ और संवैधानिक अंकेक्षकों की जरूरत हैं।

Model answer

Introduction

भारत में नागरिक समाज स्वैच्छिक संघों, सामाजिक आंदोलनों, पेशेवर समूहों और गैर-लाभ संस्थाओं का वह क्षेत्र है जो नागरिक और राज्य के बीच बैठता है। प्रशासनिक विकास का अर्थ लोक प्रशासन की बेहतर प्रक्रिया, प्रदाय और जवाबदेही है। नागरिक समाज की भूमिका उस विकास की माँग करना, उसमें साझेदार बनना और कभी कमजोर अंतिम मील का स्थान लेना है।

Body

प्रहरी और अधिकार भूमिका

  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन जैसे अभियानों से बढ़ा; नागरिक समाज ने गोपनीयता को प्रत्येक लोक प्राधिकारी का वैधानिक कर्तव्य बना दिया।
  • उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के समक्ष लोकहित याचिका, पर्यावरण, बंधुआ मजदूरी और विचाराधीन कैदियों पर समूहों द्वारा, ने विभागों को शपथपत्र दाखिल करने और प्रथा सुधारने को बाध्य किया है।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के अधीन सामाजिक अंकेक्षण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की सामुदायिक निगरानी प्रशासन को ग्राम सभा में खींचते हैं।

प्रदाय और सुधार में साझेदारी

  • एनजीओ और स्वयं सहायता संघ स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका घटक लागू करते हैं जिन्हें लाइन विभाग अकेले स्टाफ नहीं कर सकते, जो केवल विरोध नहीं, क्षमता के रूप में प्रशासनिक विकास है।
  • नागरिक घोषणा-पत्र, सेवोत्तम, तथा नैतिकता और स्थानीय शासन पर द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के प्रतिवेदन विलंब और छोटी भ्रष्टाचार पर नागरिक समाज के साक्ष्य से बने।
  • तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधन की संस्थाएँ तब बेहतर चलती हैं जब निवासी कल्याण संघ, उपयोगकर्ता समूह और महिला सामूहिक वार्ड सभाओं और नियोजन बैठकों में बैठते हैं।

सीमाएँ

  • अचयनित समूह अप्रतिनिधिक हो सकते हैं; विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के नियम और कभी प्रतिकूल राजनीति असुविधाजनक प्रहरियों का स्थान सिकोड़ती है।
  • ठेकेदारों या एक दाता का कब्जा एनजीओ को नागरिकता की पाठशाला के बजाय संरक्षण की अतिरिक्त परत बना सकता है।
  • सीएजी, लोकपाल और मानवाधिकार आयोग जैसे संवैधानिक कार्यालय औपचारिक जवाबदेही रीढ़ रहते हैं; नागरिक समाज पूरक है, समानांतर राज्य नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  CS[नागरिक समाज आंदोलन एनजीओ] --> RTI[आरटीआई अधिनियम 2005]
  CS --> SA[सामाजिक अंकेक्षण मनरेगा एनएफएसए]
  CS --> P[प्रदाय में साझेदारी]
  RTI --> A[प्रशासनिक विकास]
  SA[SA] --> A[A]
  P[P] --> A[A]
  A --> G[जवाबदेह लोक प्रशासन]

Conclusion

नागरिक समाज पारदर्शिता थोपकर, अधिकारों पर मुकदमा कर, सामाजिक अंकेक्षण से और अंतिम-मील काम बाँटकर भारतीय प्रशासन विकसित करता है। परीक्षण तभी पूरा है जब यह जोड़ा जाए कि गणराज्य को अभी वैधानिक नियामक और निर्वाचित परिषदें चाहिए, क्योंकि स्वैच्छिक ऊर्जा स्वयं सरकार नहीं बन सकती।

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  • क्या प्रत्येक एनजीओ संवैधानिक अर्थ में नागरिक समाज का भाग है?

    नागरिक समाज पंजीकृत एनजीओ से व्यापक है। इसमें आंदोलन, संघ, पेशेवर निकाय और अनौपचारिक संगठन हैं। पंजीकरण कानूनी रूप है, पूरा क्षेत्र नहीं।

  • क्या नागरिक समाज सीएजी या लोकपाल का स्थान ले सकता है?

    नहीं। वे संवैधानिक या वैधानिक अंकेक्षक हैं। नागरिक समाज उन्हें साक्ष्य दे सकता है और आरटीआई इस्तेमाल कर सकता है; सीएजी अंकेक्षण पैरा नहीं जारी कर सकता।

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