Revision summary
एसएचजी छोटा ग्रामीण बचत-ऋण समूह है, प्रायः महिलाओं का। नाबार्ड के 1992 बैंक लिंकेज ने कम जमानत वाले समूह ऋण खोले। डे-एनआरएलएम आजीविका और अंतिम-मील योजना प्रदाय के लिए एसएचजी संघबद्ध करता है। सामाजिक लाभ में महिलाओं की गति, बहीखाता और स्थानीय सेवाओं पर दबाव हैं। सीमाएँ अभिजात कब्जा, अति-ऋण और कमजोर बाजार-पंचायत कड़ियाँ हैं।
Model answer
Introduction
स्वयं सहायता समूह छोटा आत्मीय समूह है, प्रायः ग्रामीण महिलाओं का, जो साथ बचत करता है और बैंक या अपने कोष से उधार लेता है। भारतीय ग्रामीण विकास में एसएचजी पंचायत नहीं और विभाग नहीं; यह सामाजिक-वित्त कोशिका है जिसे नाबार्ड और दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने बढ़ाया है।
Body
ऋण और आजीविका भूमिका
- नाबार्ड का एसएचजी-बैंक लिंकेज कार्यक्रम, 1992 में शुरू, समूह को बचत खाता खोलने और कम जमानत वाला ऋण लेने देता है, जिससे उपभोग और कृषि कार्यशील पूँजी पर गाँव के साहूकार की पकड़ कटती है।
- डे-एनआरएलएम (आजीविका) एसएचजी को ग्राम संगठनों और क्लस्टर संघों में जोड़ता है, फिर रसोई बाग, बकरी, गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यम और उत्पादक समूहों से आजीविका बाँधता है।
- समूह के भीतर मितव्ययिता स्वास्थ्य और फसल झटकों का बफर बनाती है, जो जोखिम प्रबंधन के रूप में ग्रामीण विकास है, केवल एकबारगी संपत्ति नहीं।
- केरल में कुदुम्बश्री जैसे राज्य मॉडल दिखाते हैं कि एसएचजी पोषण, कचरा और स्थानीय उद्यम के लिए पंचायतों के साथ प्रदाय भुजा बन सकते हैं।
सामाजिक और संस्थागत भूमिका
- साप्ताहिक बैठक, बहीखाता और बैंक जाना महिलाओं की गति और घर में आवाज़ बढ़ाते हैं, जो आय बढ़ने से पहले भी विकास परिणाम है।
- एसएचजी वित्तीय समावेशन, बीमा और सरकारी योजनाओं का अंतिम-मील मार्ग बनते हैं, ताकि ग्रामीण प्रशासन उन महिलाओं तक पहुँचे जो अकेले खंड कार्यालय न जाएँ।
- वे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के अधीन काम माँग सकते हैं और आँगनवाड़ी निगरानी कर सकते हैं, जो सामाजिक पूँजी को लोक सेवाओं से जोड़ता है।
सीमाएँ
- अभिजात कब्जा, महिला के ऋण का पुरुष उपयोग, और अनेक सूक्ष्मवित्त स्रोतों से अति-ऋण समूह को चुकौती मशीन बना सकते हैं।
- बाजार संपर्क, कौशल और पंचायत समन्वय के बिना एसएचजी ग्रामीण रूपांतरण इंजन नहीं, मितव्ययिता क्लब रह जाता है।
- राज्यों में कवरेज असमान है; सबसे गरीब और सबसे अलग-थलग टोले अभी संघों से बाहर रह सकते हैं।
Flow diagram
flowchart TD S[महिला एसएचजी मितव्ययिता] --> B[एसएचजी-बैंक लिंकेज नाबार्ड] S --> F[डे-एनआरएलएम संघ] B --> L[ऋण और आजीविका] F[F] --> L[L] L --> R[ग्रामीण विकास] V[आवाज़ और योजना अंतिम मील] --> R
Conclusion
एसएचजी सस्ते समूह ऋण, डे-एनआरएलएम के अधीन आजीविका संघों और महिलाओं की सामूहिक आवाज़ से ग्रामीण विकास में सहायक हैं। वे तब काम करते हैं जब बैंक, पंचायतें और बाजार जुड़े रहें; जब समूह केवल ऋण की पाइपलाइन हो तब असफल होते हैं।
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क्या एसएचजी वैधानिक स्थानीय सरकार है?
नहीं। 73वें संशोधन के अधीन पंचायतें ग्रामीण स्थानीय सरकार हैं। एसएचजी स्वैच्छिक मितव्ययिता समूह हैं जिन्हें राज्य विकास साझेदार के रूप में इस्तेमाल करता है।
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क्या हर एसएचजी स्वतः बैंक ऋण पाता है?
नहीं। बैंक समूह की बचत अनुशासन और ग्रेडिंग देखते हैं। लिंकेज कार्यक्रम है, एनएफएसए राशन कार्ड जैसा व्यक्तिगत कानूनी अधिकार नहीं।
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