Revision summary
विश्व बैंक समूह भारत में आईबीआरडी, आईडीए और आईएफसी से ऋण और सलाह देता है। क्षेत्र सिंचाई और विद्युत से आजीविका, स्वास्थ्य, नगरीय, जल और जलवायु तक गए। एसडीजी मूल्य रक्षोपाय पर निर्भर करता है, परियोजना शीर्षक पर नहीं। शर्तें प्रणालियाँ सुधार सकती हैं या राज्य क्रम दबा सकती हैं। बैंक उत्प्रेरक साझेदार है; भारत का बजट और पंचायतें विकास राज्य रहती हैं।
Model answer
Introduction
विश्व बैंक समूह — मुख्यतः आईबीआरडी और आईडीए, निजी पक्ष पर आईएफसी — भारत के अवसंरचना, मानव विकास और अब जलवायु फाइलों में लंबा ऋणदाता और सलाहकार रहा है। सतत विकास पूछता है कि वे ऋण लोग और पारिस्थितिकी साथ उठाते हैं या नहीं। बैंक की भूमिका उत्प्रेरक और सशर्त है; वह भारत का विकास राज्य नहीं।
Body
बैंक ने भारत में क्या किया
- आरंभिक सिंचाई और विद्युत परियोजनाओं से वह ग्रामीण आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय, जल और सामाजिक संरक्षण में गया, जो केवल जीडीपी नहीं कई एसडीजी पर मानचित्र बनाता है।
- कठिन शर्तों पर आईबीआरडी ऋण और आईडीए क्रेडिट (जब भारत आईडीए-पात्र था) ने सड़क, ग्रामीण जल, चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण, और राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य व शिक्षा एसडब्ल्यूपी वित्तपोषित किए।
- ज्ञान उत्पाद, कारोबार सुगमता सूचकांक और प्रतिपूर्ति-शैली प्रोग्राम-फॉर-रिजल्ट्स ईंट परियोजनाओं से नीति और परिणाम की ओर खिसकाने का प्रयास करते हैं।
- जलवायु और आपदा खिड़कियाँ (गर्मी, बाढ़, सौर, नगरीय लचीलापन) भारत में बैंक की वर्तमान सतत-विकास पेशकश हैं।
- आईएफसी और मिगा निजी पूँजी और गारंटी जोड़ते हैं, जो तब मायने रखते हैं जब एसडीजी अंतर केवल संघ बजट के लिए बहुत बड़ा हो।
यह सतत विकास कहाँ तक है
- खुले में शौच जोखिम काटने, कन्या शिक्षा बढ़ाने या तट को चक्रवात से बचाने वाली परियोजनाएँ एसडीजी-सकारात्मक हैं यदि भूमि और श्रम रक्षोपाय टिकें।
- बड़ी अवसंरचना उत्सर्जन और विस्थापन बढ़ा सकती है जब मूल्यांकन पाठ “हरित” कहे; सततता रक्षोपाय फाइल है, ऋण शीर्षक नहीं।
- शर्तें और पूर्व कार्रवाई वित्तीय प्रबंधन सुधार सकती हैं; वे राज्य के स्वयं के कल्याण क्रम को दबा भी सकती हैं।
- भारत अब मध्य-आय उधारकर्ता और शेयरधारक है जो अन्य दक्षिण देशों को अपनी आवाज भी उधार देता है, इसलिए बैंक-भारत सम्बन्ध दो-तरफा है, संरक्षण नहीं।
आलोचनात्मक मूल्यांकन
- बैंक सस्ते-सदृश लंबे धन, आपदा वित्त और राज्य प्रणालियों पर दूसरी राय के रूप में उपयोगी है।
- वह नीति, वित्त आयोग या पंचायत वितरण का स्थान नहीं ले सकता; न वह भारत के कोयला-से-नवीकरण राजनीतिक कैलेंडर रद्द कर सकता है।
- मूल्यांकन: महत्त्वपूर्ण किंतु द्वितीयक। भारत में सतत विकास अभी अधिकांशतः घरेलू नीति धन संघ-राज्य वित्त है; बैंक चयनित एसडीजी गलियारों पर साझेदार है।
Flow diagram
flowchart TD WB[विश्व बैंक आईबीआरडी आईडीए आईएफसी] --> IN[भारत परियोजनाएँ] IN --> SDG[चयनित एसडीजी] SG[रक्षोपाय जलवायु] --> SDG LIM[ऋण शर्त बजट प्रधानता] --> EV[उत्प्रेरक राज्य नहीं]
Conclusion
विश्व बैंक ने भारतीय अवसंरचना, मानव विकास और जलवायु लचीलापन वित्तपोषित और सलाह दी, जो चयनित एसडीजी सहारा देता है। भूमिका उत्प्रेरक, रक्षोपाय-निर्भर, और ऋण शर्तों तथा भारत के स्वयं के बजट से सीमित है। सतत विकास घरेलू परियोजना रहता है जिसमें बैंक ऋण एक उपकरण है, लेखक नहीं।
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क्या विश्व बैंक आईएमएफ के समान है?
नहीं। आईएमएफ मुख्यतः भुगतान संतुलन और समष्टि है। बैंक विकास के लिए परियोजना और नीति ऋण है।
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क्या विश्व बैंक ऋण सतत विकास गारंटी देता है?
नहीं। वह एसडीजी गलियारा वित्त कर सकता है। विस्थापन, उत्सर्जन और अंतिम-छोर रिसाव अभी लेबल गिरा सकते हैं।
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