Revision summary
डिजिटल भारत (2015) कनेक्टिविटी, पहचान और ई-सेवाओं को लोक अवसंरचना मानता है। नौ स्तम्भ ब्रॉडबैंड और सीएससी से ई-क्रांति, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी नौकरियों तक चलते हैं। जेएएम और यूपीआई वहाँ समावेश दिखाते हैं जहाँ स्टैक नागरिक तक पहुँचता है। अंतिम-मील फाइबर, साक्षरता, लैंगिक पहुँच, निजता और साइबर जोखिम में अंतर रहता है। मिशन तभी सफल होता है जब स्तम्भ और अधिकार साथ चलें।
Model answer
Introduction
डिजिटल भारत 2015 में शुरू संघीय कार्यक्रम है ताकि लोक सेवाएँ, कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन निजी विलास नहीं, लोक वस्तु बनें। विवेचना को नौ स्तम्भ अंतिम-मील पहुँच, साक्षरता, निजता और राज्य क्षमता के वास्तविक अंतर से जोड़ना चाहिए।
Body
अर्थ
- डिजिटल भारत संपूर्ण-सरकार मिशन है जो डिजिटल अवसंरचना को उपयोगिता बनाए, माँग पर शासन और सेवा दे, और डिजिटल साक्षरता तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण बढ़ाए।
- यह केवल वेबसाइट नहीं: आधार, युनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, कॉमन सर्विस सेंटर, भारतनेट और डिजिलॉकर एक ही लोक स्टैक पर बैठने के लिए हैं।
- राजनीतिक दावा समावेश है—जेएएम (जन धन-आधार-मोबाइल)—ताकि ब्लॉक का निवासी दलाल के बिना राज्य तक पहुँचे।
स्तम्भ
- ब्रॉडबैंड राजमार्ग और मोबाइल कनेक्टिविटी तक सार्वभौम पहुँच ग्राम पंचायतों तक फाइबर और अँधेरे गाँवों में मोबाइल कवरेज का लक्ष्य रखते हैं।
- लोक इंटरनेट पहुँच कार्यक्रम कॉमन सर्विस सेंटर और डाकघरों को सहायता प्राप्त डिजिटल कियोस्क बनाता है।
- ई-गवर्नेंस और ई-क्रांति प्रपत्र, कार्यप्रवाह तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और वित्तीय सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी गढ़ते हैं।
- सभी के लिए सूचना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रोजगार के लिए आईटी और अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम नौ-स्तम्भ सूची पूरी करते हैं: खुला डेटा, मेक इन इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स, रोजगार योग्यता और त्वरित जन-मुख ऐप।
चुनौतियाँ
- भारतनेट और मोबाइल कवरेज अभी पहाड़ी, वन और गरीब जिलों में कमजोर अंतिम-मील फाइबर और महँगा डेटा छोड़ते हैं।
- डिजिटल साक्षरता, फोन स्वामित्व में लैंगिक अंतर और विकलांगता-अमित्र इंटरफेस कियोस्क को विलुप्त बिंदु नहीं, बिचौलिया बनाए रखते हैं।
- आधार और वैयक्तिक-डेटा मुकदमेबाजी के बाद निजता, निगरानी और डेटा-स्थानीकरण बहस दिखाती है कि अधिकार कानून के बिना स्टैक समावेश के साथ बहिष्कार भी कर सकता है।
- बिजली, भुगतान और पहचान प्रणालियों की साइबर सुरक्षा, विक्रेता लॉक-इन और असमान राज्य क्षमता का अर्थ है कि एक संघ डैशबोर्ड संघीय डिलिवरी पूरा नहीं कर सकता।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अभी आयातित घटकों पर निर्भर है; आईटी नौकरियाँ स्वतः उनको नहीं सोखतीं जिन्हें एनालॉग कार्यालयों से हटाया गया।
Flow diagram
flowchart TD D[डिजिटल भारत] --> I[उपयोगिता के रूप में अवसंरचना] D --> S[माँग पर सेवाएँ] D --> E[डिजिटल सशक्तिकरण] I --> P[नौ स्तम्भ] S[S] --> P[P] E[E] --> P[P] P --> C[अंतिम मील साक्षरता निजता क्षमता]
Conclusion
डिजिटल भारत का अर्थ लोक डिजिटल अवसंरचना, माँग पर सेवाएँ और नौ नामित स्तम्भों से डिजिटल सशक्तिकरण है। कार्यक्रम ने भुगतान और पहचान बदले; दावे से मेल तभी होगा जब कनेक्टिविटी, साक्षरता, निजता कानून और संघीय क्षमता शेष डिजिटल विभाजन बंद करें।
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क्या डिजिटल भारत केवल ग्रामीण ब्रॉडबैंड योजना है?
नहीं। ब्रॉडबैंड एक स्तम्भ है। शासन सुधार, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोजगार और खुली सूचना समान रूप से मिशन का भाग हैं।
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क्या आधार डिजिटल भारत के बराबर है?
आधार पहचान पाइपलाइन है जिसका अनेक डिजिटल भारत सेवाएँ उपयोग करती हैं। कार्यक्रम व्यापक है: फाइबर, सीएससी, ई-क्रांति और विनिर्माण।
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